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बाघों को ट्रंकुलाइज करने के लिए दुधवा पार्क से आ रहे दो हाथी
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ममरी। वन विभाग की बाघ को ट्रेंक्युलाइज करने की सारी तैयारी धरी की धरी रह गई है। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरा भी काम नहीं आ सका है। दुधवा से बुलाई गई गंगाकली (हाथी) भी बीमार हो गई। ऐसे में बाघ को अभी तक ट्रेंक्युलाइज नहीं किया जा सका है। जिसकी वजह से ग्रामीण जहां दिन-रात दहशत में जी रहे हैं, वहीं वन विभाग के अधिकारियों की चिंताएं बढ़ रही हैं। सारी कवायदें फेल होने के बाद अधिकारियों ने दुधवा से दो हाथियों को लाए जाने का निर्णय लिया है। ताकि एक महीने से दहशत का पर्याय बने बाघ को ट्रेंक्युलाइज किया जा सके।
इसी बात को लेकर डीएफओ समीर कुमार की मौजूदगी में बुधवार को परेली गांव के पंचायत भवन में एक गोष्ठी हुई। जिसमें बाघों को पकड़े जाने का मुद्दा छाया रहा। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ. प्रेमचंद पांडे ने कहा कि ग्रामीण थोड़ा धैर्य रखे बाघों को ट्रेंक्युलाइज करने के लिए दुधवा पार्क से दो हाथी आ रहे हैं। इधर, सुबह परेली गांव के पास खेतों में बाघ के पग बने देखे गए हैं।
ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष जब क्षेत्र में महीने भर दहशत का पर्याय बने बाघों को पकड़वाने का मुद्दा उइाया, जिस पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ. प्रेमचंद पांडे ने कहा कि आप लोग थोड़ी सावधानी बरतते रहें। जैसे मदिरा का सेवन कर बाहर न जाएं, घर के पास झाड़ी साफ रखें। गन्ने क छिलाई समूह में करें। बाघ द्वारा मारे गए शिकार के पास न जाएं और न ही उसका घेराव करें।
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डीएफओ समीर कुमार ने कहा कि आप लोग सहयोग बनाए रखें। बाघों को पकड़वाने का प्रयास हो रहा है। जिसके लिए परमीशन लेनी पड़ती है। हम लोग कानून से बंधे हैं। आप लोग यह मुद्दा विधायक के माध्यम से विधानसभा तक पहुंचा सकते हैं। कुछ लोगों ने जंगल के बाहर तारों की बाउंड्री कराने को कहा, जिस पर डीएफओ ने परमीशन लेने की बात कही। गोष्ठी को डब्ल्यूटीआई के डॉ. दक्ष गंगवार, रेंजर मोबीन आरिफ आदि अधिकारियों ने संबोधित किया। गोष्ठी में परेली, झारा, भिम्मापुर के तमाम ग्रामीण, महेशपुर रेंज के वनकर्मी मौजूद रहे।
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इसी बात को लेकर डीएफओ समीर कुमार की मौजूदगी में बुधवार को परेली गांव के पंचायत भवन में एक गोष्ठी हुई। जिसमें बाघों को पकड़े जाने का मुद्दा छाया रहा। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ. प्रेमचंद पांडे ने कहा कि ग्रामीण थोड़ा धैर्य रखे बाघों को ट्रेंक्युलाइज करने के लिए दुधवा पार्क से दो हाथी आ रहे हैं। इधर, सुबह परेली गांव के पास खेतों में बाघ के पग बने देखे गए हैं।
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ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष जब क्षेत्र में महीने भर दहशत का पर्याय बने बाघों को पकड़वाने का मुद्दा उइाया, जिस पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ. प्रेमचंद पांडे ने कहा कि आप लोग थोड़ी सावधानी बरतते रहें। जैसे मदिरा का सेवन कर बाहर न जाएं, घर के पास झाड़ी साफ रखें। गन्ने क छिलाई समूह में करें। बाघ द्वारा मारे गए शिकार के पास न जाएं और न ही उसका घेराव करें।
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डीएफओ समीर कुमार ने कहा कि आप लोग सहयोग बनाए रखें। बाघों को पकड़वाने का प्रयास हो रहा है। जिसके लिए परमीशन लेनी पड़ती है। हम लोग कानून से बंधे हैं। आप लोग यह मुद्दा विधायक के माध्यम से विधानसभा तक पहुंचा सकते हैं। कुछ लोगों ने जंगल के बाहर तारों की बाउंड्री कराने को कहा, जिस पर डीएफओ ने परमीशन लेने की बात कही। गोष्ठी को डब्ल्यूटीआई के डॉ. दक्ष गंगवार, रेंजर मोबीन आरिफ आदि अधिकारियों ने संबोधित किया। गोष्ठी में परेली, झारा, भिम्मापुर के तमाम ग्रामीण, महेशपुर रेंज के वनकर्मी मौजूद रहे।