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बाघ की दहाड़ ने उड़ा दी ग्रामीणों की नींद
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बरौंछा गांव के पास चौथे दिन भी गन्ने के खेतों से रुक-रुक कर आती रही आवाज
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के जटपुरा बीट और बांकेगंज कस्बे से पांच किलोमीटर दूर बरौंछा और सोहनरा भूड़ गांव आबादी से सटे गन्ने के खेत में गुरुवार रात लावारिस बैल को निवाला बनाने वाला बाघ अभी गन्ने के खेतों में ही डेरा डाले हैं। जटपुरा प्रधान कुलवंत सिंह उर्फ कक्की ग्रामीण जगतार सिंह, विरसा सिंह, धर्मेंद्र आदि का कहना है कि लगातार चौथे दिन गन्ने के खेतों से बाघ के दहाड़ने की आवाज सुनाई देती रही। हालांकि वन विभाग की टीम बाघ की लगातार निगरानी कर रहा है, बावजूद इसके लोगों में दहशत है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ का रूख आबादी की ओर न हो इसको लेकर लोग घरों के सामने आग जलाकर रात काटते हैं। इस बावत रेंजर मैलानी केपी सिंह का कहना है कि वन कर्मियों की टीम चौबीस घंटे बारी-बारी से बाघ की निगरानी कर रही हैं। ग्रामीण डरें नहीं, सतर्कता बरतें। संवाद
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के जटपुरा बीट और बांकेगंज कस्बे से पांच किलोमीटर दूर बरौंछा और सोहनरा भूड़ गांव आबादी से सटे गन्ने के खेत में गुरुवार रात लावारिस बैल को निवाला बनाने वाला बाघ अभी गन्ने के खेतों में ही डेरा डाले हैं। जटपुरा प्रधान कुलवंत सिंह उर्फ कक्की ग्रामीण जगतार सिंह, विरसा सिंह, धर्मेंद्र आदि का कहना है कि लगातार चौथे दिन गन्ने के खेतों से बाघ के दहाड़ने की आवाज सुनाई देती रही। हालांकि वन विभाग की टीम बाघ की लगातार निगरानी कर रहा है, बावजूद इसके लोगों में दहशत है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ का रूख आबादी की ओर न हो इसको लेकर लोग घरों के सामने आग जलाकर रात काटते हैं। इस बावत रेंजर मैलानी केपी सिंह का कहना है कि वन कर्मियों की टीम चौबीस घंटे बारी-बारी से बाघ की निगरानी कर रही हैं। ग्रामीण डरें नहीं, सतर्कता बरतें। संवाद