{"_id":"5e077a9a8ebc3e88137e9678","slug":"tiger-lakhimpur-news-bly38981311","type":"story","status":"publish","title_hn":"दहशत: रात में बाघ की घुर्राहट से कांपते हैं.. सुबह पंजे तलाशते हैं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दहशत: रात में बाघ की घुर्राहट से कांपते हैं.. सुबह पंजे तलाशते हैं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांकेगंज। बैल को निवाला बनाने वाला बाघ गांव के पास ही गन्ने के खेतों में डेरा डाले है। वन कर्मियों को उसकी वापसी के कोई पगचिह्न नहीं मिले हैं। ग्रामीणों को पूरी रात बाघ के रुक-रुक कर दहाड़ने की आवाजें सुनाई दी। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि बाघ आबादी के नजदीक ही डेरा जमाए है।
मालूम हो कि गुरुवार की रात दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से निकले एक बाघ ने बांकेगंज कस्बा से पांच किलोमीटर की दूरी पर बरौंछा और सोहनरा भूड़ गांव के बीच एक बैल का शिकार किया था। शुक्रवार सुबह वन कर्मियों ने जब घटनास्थल का निरीक्षण किया तो मृत बैल के पास से बाघ के पगचिह्न गन्ने की खेतों की ओर जाते दिखाई दिए, लेकिन जंगल की ओर वापसी के कोई संकेत नहीं मिले। इससे वन कर्मियों ने अनुमान लगाया कि बाघ गन्ने के खेत में ही छिपा है। शुक्रवार की रात बरौंछा और सोहनरा भूड़ गांव के लोगों को गन्ने के खेतों की तरफ से बाघ के दहाड़ने की आवाजें कई बार सुनाई दी। इससे वन विभाग और ग्रामीणों का अनुमान है कि बाघ अभी गन्ने के खेत में ही छिपा हुआ है। दो दिनों से से बाघ की निगरानी कर रहे फॉरेस्टर मोहम्मद उमर, राजेंद्र वर्मा, आकाश खरवार, रामपाल वर्मा आदि को अब तक बाघ के वापस जंगल की ओर जाने के कोई पगचिह्न नहीं मिले हैं। वनाधिकारियों के मुताबिक अब इस बाघ को लोकेट करने के लिए ट्रैक्टर से कांबिंग की जाएगी। तकि यदि वह खेतों में छिपा है तो वापस जंगल में चला जाए।
बाघ ने बछड़े को मार डाला
कस्बे के सत्यवती पटेल महाविद्यालय और सरस्वती विद्या मंदिर के पीछे तीन दिनों से गन्ने के खेत में डेरा जमाए बाघ ने नहर कोठी के पास लालजी के ट्यूबवेल पर घास चर रहे बछड़े पर हमला कर अपना निवाला बना लिया। यहां से महेशपुर जंगल की दूरी छह किमी है। बाघ के बढ़ते हमलों, अधखाया शव, पगचिह्न मिलने से दहशत है।
विज्ञापन
प्रधान रामनरेश वर्मा, भेखराम वर्मा, रामपाल वर्मा आदि का कहना है कि यदि बाघ को जंगल में न खदेड़ा गया तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। फारेस्टर रामप्रसाद, श्यामकिशोर शुक्ला आदि वनकर्मियों का कहना है कि बाघ की लोकेशन का पता लागने के लिए निरंतर दबिश दी जा रही है। यहां तक कि परेली गांव के पास कैमरा भी लगवा दिया गया है। फिर भी बाघ शिकार के चक्कर में गन्ना नहीं छोड़ रहा है। रेंजर मोबीन आरिफ का कहना है कि जब तक गन्ने का एरिया कम नहीं होता, तब तक बाघ को खदेड़ना संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने, गन्ने की छिलाई समूह बनाकर करने की सलाह दी है।
बाघ ने नीलगाय का किया शिकार
बंशीनगर गांव के पास नकऊवा नाले के निकट बाघ ने नीलगाय को मार डाला। डर के मारे ग्रामीण खेत में गन्ना छिलाई करने नहीं जा रहे हैं।
जटपुरा बीट जंगल से सटे बरौंछा और सोहनरा भूड़ गांव के पास बैल का शिकार करने वाला बाघ अभी आबादी के निकट गन्ने के खेतों में ही मौजूद है। इसके जंगल वापसी के कोई संकेत नहीं मिले हैं। वन विभाग लगातार बाघ की निगरानी कर रहा है।
- केपी सिंह ,रेंजर दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन मैलानी रेंज।
विज्ञापन
मालूम हो कि गुरुवार की रात दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से निकले एक बाघ ने बांकेगंज कस्बा से पांच किलोमीटर की दूरी पर बरौंछा और सोहनरा भूड़ गांव के बीच एक बैल का शिकार किया था। शुक्रवार सुबह वन कर्मियों ने जब घटनास्थल का निरीक्षण किया तो मृत बैल के पास से बाघ के पगचिह्न गन्ने की खेतों की ओर जाते दिखाई दिए, लेकिन जंगल की ओर वापसी के कोई संकेत नहीं मिले। इससे वन कर्मियों ने अनुमान लगाया कि बाघ गन्ने के खेत में ही छिपा है। शुक्रवार की रात बरौंछा और सोहनरा भूड़ गांव के लोगों को गन्ने के खेतों की तरफ से बाघ के दहाड़ने की आवाजें कई बार सुनाई दी। इससे वन विभाग और ग्रामीणों का अनुमान है कि बाघ अभी गन्ने के खेत में ही छिपा हुआ है। दो दिनों से से बाघ की निगरानी कर रहे फॉरेस्टर मोहम्मद उमर, राजेंद्र वर्मा, आकाश खरवार, रामपाल वर्मा आदि को अब तक बाघ के वापस जंगल की ओर जाने के कोई पगचिह्न नहीं मिले हैं। वनाधिकारियों के मुताबिक अब इस बाघ को लोकेट करने के लिए ट्रैक्टर से कांबिंग की जाएगी। तकि यदि वह खेतों में छिपा है तो वापस जंगल में चला जाए।
विज्ञापन
बाघ ने बछड़े को मार डाला
कस्बे के सत्यवती पटेल महाविद्यालय और सरस्वती विद्या मंदिर के पीछे तीन दिनों से गन्ने के खेत में डेरा जमाए बाघ ने नहर कोठी के पास लालजी के ट्यूबवेल पर घास चर रहे बछड़े पर हमला कर अपना निवाला बना लिया। यहां से महेशपुर जंगल की दूरी छह किमी है। बाघ के बढ़ते हमलों, अधखाया शव, पगचिह्न मिलने से दहशत है।
विज्ञापन
प्रधान रामनरेश वर्मा, भेखराम वर्मा, रामपाल वर्मा आदि का कहना है कि यदि बाघ को जंगल में न खदेड़ा गया तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। फारेस्टर रामप्रसाद, श्यामकिशोर शुक्ला आदि वनकर्मियों का कहना है कि बाघ की लोकेशन का पता लागने के लिए निरंतर दबिश दी जा रही है। यहां तक कि परेली गांव के पास कैमरा भी लगवा दिया गया है। फिर भी बाघ शिकार के चक्कर में गन्ना नहीं छोड़ रहा है। रेंजर मोबीन आरिफ का कहना है कि जब तक गन्ने का एरिया कम नहीं होता, तब तक बाघ को खदेड़ना संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने, गन्ने की छिलाई समूह बनाकर करने की सलाह दी है।
बाघ ने नीलगाय का किया शिकार
बंशीनगर गांव के पास नकऊवा नाले के निकट बाघ ने नीलगाय को मार डाला। डर के मारे ग्रामीण खेत में गन्ना छिलाई करने नहीं जा रहे हैं।
जटपुरा बीट जंगल से सटे बरौंछा और सोहनरा भूड़ गांव के पास बैल का शिकार करने वाला बाघ अभी आबादी के निकट गन्ने के खेतों में ही मौजूद है। इसके जंगल वापसी के कोई संकेत नहीं मिले हैं। वन विभाग लगातार बाघ की निगरानी कर रहा है।
- केपी सिंह ,रेंजर दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन मैलानी रेंज।