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तीन साल पहले आता फैसला तो बर्बाद न होती सबीना की जिंदगी
अनिल मिश्र बांकेगंज।
Updated Thu, 24 Aug 2017 10:52 PM IST
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तीन तलाक
- फोटो : अमर उजाला
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शादी के तीन माह बाद ही दहेज के लिए शौहर ने दे दिया था तलाक
कस्बे की बेटी सबीना निंशा सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने के फैसले से बेहद खुश है। लेकिन उसके मन में एक टीस जरूर है कि यदि यह फैसला उसकी शादी के पहले आता तो उसकी जिंदगी तबाह होने से बच जाती। सबीना को शादी के महज तीन माह बाद ही तीन तलाक का सामना करना पड़ा। जिसका दंश वह आज तक झेल रही है।
बांकेगंज कस्बा निवासी मोहम्मद नसीम की 21 वर्षीया बेटी सबीना निंशा का विवाह 24 अप्रेल 2014 को जिला सीतापुर के हरगांव कस्बा में ईदगाह मोहल्ला निवासी लाला मोहम्मद के पुत्र मोहम्मद अहमद उर्फ पप्पू से हुआ था। पति पेशे से ड्राइवर है जबकि सबीना के पिता मांस कारोबारी। सबीना की शादी का एक महीना भी नहीं गुजरा था कि ससुराल से दहेज की मांग की जाने लगी। इसमें ससुराल वालों ने सबीना से लग्जरी गाड़ी, आलीशान मकान और नकदी की मांग करते हुए उसे परेशान करने लगे। दहेज की मांग पूरी न होने पर शादी के महज तीन महीने बाद ही शौहर ने उसे तलाक दे दिया। तबसे सबीना अपने मायके में रह रही है। महिलाओं के कपड़ों की सिलाई करके अपना गुजारा कर रही है।
सबीना ने तीन तलाक के खिलाफ लखीमपुर के महिला थाने में दहेज के लिए प्रताड़ित करने और तलाक देकर घर से निकालने की रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। सबीना ने तलाक के बाद दूसरी शादी भी नहीं की है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सबीना को तीन तलाक से पीड़िताओं को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। सबीना के पिता मोहम्मद नसीम और मां जन्नतुम बेगम भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बेहद खुश है। सबीना के माता-पिता,भाई और बहने अदालत के इस फैसले से खुश हैं।
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कस्बे की बेटी सबीना निंशा सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने के फैसले से बेहद खुश है। लेकिन उसके मन में एक टीस जरूर है कि यदि यह फैसला उसकी शादी के पहले आता तो उसकी जिंदगी तबाह होने से बच जाती। सबीना को शादी के महज तीन माह बाद ही तीन तलाक का सामना करना पड़ा। जिसका दंश वह आज तक झेल रही है।
बांकेगंज कस्बा निवासी मोहम्मद नसीम की 21 वर्षीया बेटी सबीना निंशा का विवाह 24 अप्रेल 2014 को जिला सीतापुर के हरगांव कस्बा में ईदगाह मोहल्ला निवासी लाला मोहम्मद के पुत्र मोहम्मद अहमद उर्फ पप्पू से हुआ था। पति पेशे से ड्राइवर है जबकि सबीना के पिता मांस कारोबारी। सबीना की शादी का एक महीना भी नहीं गुजरा था कि ससुराल से दहेज की मांग की जाने लगी। इसमें ससुराल वालों ने सबीना से लग्जरी गाड़ी, आलीशान मकान और नकदी की मांग करते हुए उसे परेशान करने लगे। दहेज की मांग पूरी न होने पर शादी के महज तीन महीने बाद ही शौहर ने उसे तलाक दे दिया। तबसे सबीना अपने मायके में रह रही है। महिलाओं के कपड़ों की सिलाई करके अपना गुजारा कर रही है।
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सबीना ने तीन तलाक के खिलाफ लखीमपुर के महिला थाने में दहेज के लिए प्रताड़ित करने और तलाक देकर घर से निकालने की रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। सबीना ने तलाक के बाद दूसरी शादी भी नहीं की है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सबीना को तीन तलाक से पीड़िताओं को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। सबीना के पिता मोहम्मद नसीम और मां जन्नतुम बेगम भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बेहद खुश है। सबीना के माता-पिता,भाई और बहने अदालत के इस फैसले से खुश हैं।
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