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तीन चीनी मिलें अब भी दबाए बैठीं हैं 52 करोड़
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 29 Sep 2016 11:42 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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मिलों को बंद हुए बीत चुका पांच माह समय
शासन-प्रशासन के आदेश भी हुए बेअसर
डीसीओ ने तीनों मिलों को जारी की नोटिस
जिले की नौ चीनी मिलों में से छह ने बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया है, लेकिन तीन मिलों पलिया, खंभारखेड़ा और ऐरा ने अब तक भुगतान नहीं किया है। तीनों मिलों पर 52 करोड़ से अधिक गन्ना मूल्य बकाया है। जबकि पेराई सत्र खत्म हुए पांच माह बीत चुके हैं। जल्द भुगतान के लिए सरकार से लेकर डीएम ने चीनी मिल अध्यासियों को कई बार आदेश दिए थे, लेकिन सारी कवायद बेअसर रही है।
पेराई सत्र 2015-16 में नौ चीनी मिलों को किसानों ने 810.06 लाख क्विंटल गन्ना बेचा था, जिसके एवज में किसानों को 22 अरब 65 करोड़ 42 लाख 60 हजार रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाना था। प्रदेश सरकार ने मिल मालिकों को राहत देते हुए दो किस्तों में भुगतान करने की सुविधा दी थी। दूसरी किस्त का भुगतान चीनी मिल बंद होने की तिथि से 90 दिन के अंदर किया जाना था। समय सीमा बीतने के बावजूद पलिया, खंभारखेड़ा और ऐरा मिलें किसानों का 52 करोड़ दो लाख 93 हजार रुपये दबाए हैं। जबकि नया पेराई सत्र शुरू होने में करीब एक माह का समय शेष है। सबसे ज्यादा पलिया मिल पर 37 करोड़ 85 लाख 44 हजार, खंभारखेड़ा पर पांच करोड़ 69 लाख चार हजार और ऐरा पर आठ करोड़ 48 लाख 45 हजार रुपये बकाया है।
तो बिजली बिल के लिए रोका भुगतान
सूत्र बताते हैं कि चीनी मिलों ने सोची रणनीति के तहत किसानों का भुगतान रोक रखा है, क्योंकि यह मिलें बिजली उत्पादन कर प्रदेश सरकार को आपूर्ति करती है। बिजली का भुगतान न मिलने के चक्कर में मिलों ने किसानों का ही भुगतान रोक दिया है।
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मिलों पर 35.86 करोड़ ब्याज की देनदारी
इस वर्ष भी गन्ना मूल्य भुगतान में मिलों ने देरी की है, जिसके चलते गन्ना एक्ट के नियमों के मुताबिक मिलों पर 35 करोड़ 86 लाख 66 हजार रुपये ब्याज की देनदारी बन गई हैै।
सिर्फ तीन मिलों पर गन्ना मूल्य बकाया रह गया है, जिसके जल्द भुगतान के लिए नोटिस जारी की गई है। यदि एक सप्ताह के अंदर भुगतान नहीं हुआ, तो डीएम स्तर से कार्रवाई कराई जाएगी।
-जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी
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शासन-प्रशासन के आदेश भी हुए बेअसर
डीसीओ ने तीनों मिलों को जारी की नोटिस
जिले की नौ चीनी मिलों में से छह ने बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया है, लेकिन तीन मिलों पलिया, खंभारखेड़ा और ऐरा ने अब तक भुगतान नहीं किया है। तीनों मिलों पर 52 करोड़ से अधिक गन्ना मूल्य बकाया है। जबकि पेराई सत्र खत्म हुए पांच माह बीत चुके हैं। जल्द भुगतान के लिए सरकार से लेकर डीएम ने चीनी मिल अध्यासियों को कई बार आदेश दिए थे, लेकिन सारी कवायद बेअसर रही है।
पेराई सत्र 2015-16 में नौ चीनी मिलों को किसानों ने 810.06 लाख क्विंटल गन्ना बेचा था, जिसके एवज में किसानों को 22 अरब 65 करोड़ 42 लाख 60 हजार रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाना था। प्रदेश सरकार ने मिल मालिकों को राहत देते हुए दो किस्तों में भुगतान करने की सुविधा दी थी। दूसरी किस्त का भुगतान चीनी मिल बंद होने की तिथि से 90 दिन के अंदर किया जाना था। समय सीमा बीतने के बावजूद पलिया, खंभारखेड़ा और ऐरा मिलें किसानों का 52 करोड़ दो लाख 93 हजार रुपये दबाए हैं। जबकि नया पेराई सत्र शुरू होने में करीब एक माह का समय शेष है। सबसे ज्यादा पलिया मिल पर 37 करोड़ 85 लाख 44 हजार, खंभारखेड़ा पर पांच करोड़ 69 लाख चार हजार और ऐरा पर आठ करोड़ 48 लाख 45 हजार रुपये बकाया है।
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तो बिजली बिल के लिए रोका भुगतान
सूत्र बताते हैं कि चीनी मिलों ने सोची रणनीति के तहत किसानों का भुगतान रोक रखा है, क्योंकि यह मिलें बिजली उत्पादन कर प्रदेश सरकार को आपूर्ति करती है। बिजली का भुगतान न मिलने के चक्कर में मिलों ने किसानों का ही भुगतान रोक दिया है।
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मिलों पर 35.86 करोड़ ब्याज की देनदारी
इस वर्ष भी गन्ना मूल्य भुगतान में मिलों ने देरी की है, जिसके चलते गन्ना एक्ट के नियमों के मुताबिक मिलों पर 35 करोड़ 86 लाख 66 हजार रुपये ब्याज की देनदारी बन गई हैै।
सिर्फ तीन मिलों पर गन्ना मूल्य बकाया रह गया है, जिसके जल्द भुगतान के लिए नोटिस जारी की गई है। यदि एक सप्ताह के अंदर भुगतान नहीं हुआ, तो डीएम स्तर से कार्रवाई कराई जाएगी।
-जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी