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तीन हत्याभियुक्तों को उम्रकैद, जुर्माना
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 08 Jan 2016 10:15 PM IST
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मोहम्मदी अपर जिला जज की अदालत ने अपना पहला फैसला सुनाया है। हत्या के नौ साल पुराने एक मामले में फैसला सुनाते हुए एडीजे एमजी मदार ने दो हत्याभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही हत्याभियुक्तों पर 17-17 हजार रुपये का जुर्माना डाला है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए शासकीय अधिवक्ता कफील अहमद अंसारी ने बताया कि पसगवां थाना क्षेत्र के ग्राम सुकुरुद्दीनपुर निवासी राधेश्याम का गांव के ही मंगूलाल से रास्ते को लेकर जुलाई 2006 में विवाद हो गया था। बाद में गांव के प्रतिष्ठित लोगों की मध्यस्थता से विवाद का फैसला भी हो गया था, लेकिन मंगूलाल इसे लेकर रंजिश रखे था। आरोप है कि छह अक्तूबर 2006 की रात को मंगूलाल ने अपने साथी रामेश्वर और राम औतार के साथ धावा बोल दिया। आहट पर राधेश्याम और उसकी पत्नी जाग गए।
इसी बीच हमलावर हत्याभियुक्तों ने तमंचे से राधेश्याम के भाई रघुवीर के सीने में गोली मार दी। राधेश्याम और उसकी पत्नी मायादेवी ने शोर गुल किया तो हत्याभियुक्त भाग निकले। अभियोजन की ओर से इस मामले में राधेश्याम, मायादेवी, डॉ.एसके शुक्ला, कांस्टेबल राजमणि, एसआई श्यामलाल कश्यप, एसआई भगवती सिंह रामशंकर यादव और हेड कांस्टेबल रमेश सिंह की गवाही दर्ज कराई गई तथा बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी, जबकि बचाव पक्ष की ओर से सफाई साक्षी के रूप में पड़ोसी रामपाल को पेश किया गया।
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दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने मंगूलाल और रामऔतार को दोष सिद्ध पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। तीसरे अभियुक्त रामेश्वर की मुकदमा सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। न्यायालय ने दोनों पर 17-17 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
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अभियोजन पक्ष रखते हुए शासकीय अधिवक्ता कफील अहमद अंसारी ने बताया कि पसगवां थाना क्षेत्र के ग्राम सुकुरुद्दीनपुर निवासी राधेश्याम का गांव के ही मंगूलाल से रास्ते को लेकर जुलाई 2006 में विवाद हो गया था। बाद में गांव के प्रतिष्ठित लोगों की मध्यस्थता से विवाद का फैसला भी हो गया था, लेकिन मंगूलाल इसे लेकर रंजिश रखे था। आरोप है कि छह अक्तूबर 2006 की रात को मंगूलाल ने अपने साथी रामेश्वर और राम औतार के साथ धावा बोल दिया। आहट पर राधेश्याम और उसकी पत्नी जाग गए।
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इसी बीच हमलावर हत्याभियुक्तों ने तमंचे से राधेश्याम के भाई रघुवीर के सीने में गोली मार दी। राधेश्याम और उसकी पत्नी मायादेवी ने शोर गुल किया तो हत्याभियुक्त भाग निकले। अभियोजन की ओर से इस मामले में राधेश्याम, मायादेवी, डॉ.एसके शुक्ला, कांस्टेबल राजमणि, एसआई श्यामलाल कश्यप, एसआई भगवती सिंह रामशंकर यादव और हेड कांस्टेबल रमेश सिंह की गवाही दर्ज कराई गई तथा बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी, जबकि बचाव पक्ष की ओर से सफाई साक्षी के रूप में पड़ोसी रामपाल को पेश किया गया।
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दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अदालत ने मंगूलाल और रामऔतार को दोष सिद्ध पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। तीसरे अभियुक्त रामेश्वर की मुकदमा सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। न्यायालय ने दोनों पर 17-17 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।