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ये है आदर्श गांव का है हाल, तीन साल फिर भी बदहाल 

विकास शुक्ला लखीमपुर खीरी। Updated Mon, 05 Jun 2017 12:20 AM IST
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गांव का हाल
गांव का हाल - फोटो : अमर उजाला

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सांसद के गोद लिए गांव ढखौरा की रिपोर्ट
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बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव 
करोड़ों मिली सांसद निधि से 35.34 लाख ही गांव के खाते में

 ब्लॉक पसगवां के औरंगाबाद से कटी करीब चार किलोमीटर की पक्की सड़क गांव ढखौरा जाती है। गांव के पक्के मकान संपन्नता का आभास कराते हैं। लेकिन गांव घूमने पर तस्वीर कुछ और नजर आती है। बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए गांव तरस रहा है। इस तरह के गांव तो कई होंगे। पर ढखौरा की बात अलग है। क्योंकि भाजपा सांसद रेखा वर्मा ने इसे आदर्श ग्राम बनाने के लिए वर्ष 2014-15 में गोद लिया था। अफसोस कि तीन सालों में विकास के नाम पर यहां कुछ भी मुकम्मल न हुआ। 
गांव में एक सूखा तालाब है, जिसमें घास उग रही है। इसमें बच्चे मैच खेलते हैं। बिजली व्यवस्था का हाल यह है कि कुछ इलाकों में पोल ही नहीं हैं। ओवरलोड के कारण ट्रांसफार्मर खराब हो जाते हैं तो हफ्तों बिजली नहीं आती। पक्की सड़क तो है, लेकिन इसका निर्माण 2014-15 में सांसद के गोद लेने से पहले हो गया था। इसे छोड़ दें तो पूरे गांव में धूल उड़ती नजर आती है। कुछ रास्तों पर कई साल पहले खड़ंजा लगाया गया था, जो जगह-जगह पर बैठ गया है। ड्रेनेज की व्यवस्था न होने से लोग घर के सामने गड्ढे में गंदा पानी भर देते हैं। बाद में उसे रास्ते में डाल देते हैं। इससे चलना तो मुश्किल होता ही है, गंदगी भी फैलती है। हां, विकास कार्यों के नाम पर एक पानी की टंकी और एक पांच सौ मीटर की पक्की सड़क जरूर निर्माणाधीन है। तीन सालों में मिली करोड़ों की सांसद निधि से इस गांव में सड़क के लिए महज 35.34 लाख रुपये ही निकले।


गांव वालों को दर्द: न राशन, न रोजगार
नहीं लगता सांसद ने गांव को गोद लिया


गांव के जागरूक किसान विदेशपाल सिंह कहते हैं, कोई कार्य ऐसा नहीं हुआ, जिससे लगे सांसद का गांव है। तीन साल में सिर्फ दो काम दिख रहे हैं, पहला गांव में टंकी बन रही है, दूसरा पांच सौ मीटर की सड़क का निर्माण हो रहा है, जिसमें पीला ईंट लग रही है और अतिक्रमण के कारण सड़क निर्माण ढंग से नहीं हो पाएगा।
 
गरीबों की नहीं होती सुनवाई
गांव के मजरा हरदवां निवासी रामपाल कहते हैं, गरीबों के न तो राशन कार्ड बनाए गए और न ही जॉब कार्ड। जो लोग प्रधान के खास हैं, उन्हें ही सुविधाएं मिलती हैं।
 
गांव नहीं आतीं सांसद
गांव निवासी मलिखान सिंह कहते हैं कि सांसद कभी गांव नहीं आतीं, जिससे उनकी समस्याएं जस की तस हैं। पात्रों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। अधिकांश लोगों के शौचालय नहीं बन सके। आवास भी नहीं मिले। पात्रों को पेंशन तक नहीं मिल सकी।
 
नहीं मिल पाता राशन
गांव निवासी विश्नू कुमार बताते हैं कि पात्रों राशन कार्ड नहीं बने हैं, जिससे लोगों को राशन नहीं मिल पाता। जिनके कार्ड बने हैं, उन्हें भी कई बार राशन नहीं मिलता। कोटे पर जो दबंगई दिखा लेता हैं, वही राशन ले जाता है।
 
क्या कहती हैं प्रधान....
सांसद गांव और क्षेत्र में आती रहती हैं। उनसे विकास को लेकर नियमित बात भी होती रहती है। निर्माणाधीन पानी की टंकी और सड़क इसके प्रमाण हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इस गांव के सभी घरों में शौचालय होंगे। इसके अलावा गांव में विकास हो रहा है।
किरन सिंह, प्रधान
 
सपा सरकार में थी दिक्कत
ढखौरा गांव को जब गोद लिया था, तब सपा की सरकार थी। सपा की सरकार में योजनाएं नहीं मिल सकीं, जिससे निर्माण कार्य शुरू होने में देरी हुई। वर्तमान में ओवरहेड टैंक और सड़क निर्माण हो रहा है।
रेखा वर्मा, सांसद-धौरहरा क्षेत्र

ऐसा है आदर्श गांव
आबादी : कुल 2977,   55 प्रतिशत सामान्य, 30 प्रतिशत दलित, 15 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग
मुख्य कारोबार :  खेती, मजदूरी
विद्युतीकरण : पांच ट्रांसफार्मर लगे हैं, दलित बस्ती में खंभे नहीं हैं
विद्यालय : एक उच्च प्राथमिक और एक प्राथमिक विद्यालय
बैंक सुविधा : नहीं
पेंशनार्थी : 185 (77 वृद्धावस्था, 62 विधवा, 46 समाजवादी पेंशन)
इंदिरा आवास  : 84
गरीब परिवार : 100
शौचालय  :  50 निर्मित  (500 प्रस्तावित)
मनरेगा जॉब कार्ड :  392
रोजगार मिला  : 180
100 दिन रोजगार : कोई नहीं
पौधरोपण : नहीं
तालाब की सफाई : नहीं 

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