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महिला अस्पताल में भी नहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ
लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 19 Feb 2016 06:29 PM IST
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जिले की सीएचसी और पीएचसी पर स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं ही, लेकिन जिला महिला अस्पताल का हाल भी कुछ ऐसा ही है। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के दो पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां एक भी तैनाती नहीं है। इसी तरह पैैथोलॉजिस्ट का एक पद स्वीकृत है, लेकिन अर्से से रिक्त चल रहा है। इन विशेषज्ञों की तैनाती न होने से गरीब महिलाएं प्राइवेट अस्पतालों में मंहगा इलाज कराने के लिए मजबूर हैं।
जिले की आबादी पर गौर करें तो 2011 की जनगणना के मुुताबिक कुल आबादी 40,13,634 में 18,86,852 महिलाएं हैं। महिलाओं को सरकारी योजनाओं में बराबर की भागीदारी से लेकर राजनीति में 50 फीसदी हिस्सेदारी की बात हो रही है। वहीं, इनके स्वास्थ्य को लेकर सरकार कितनी फिक्रमंद हैं, जिसका इस बात से सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि जिले में सीएचसी/पीएचसी से लेकर जिला महिला अस्पताल में एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती नहीं है। लिहाजा इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों की सेवाओं पर निर्भर महिलाएं स्वास्थ्य संबंधी उचित इलाज से वंचित हो रही हैं। वहीं, विशेष आवश्यकता होने पर गरीब महिलाओं को प्राइवेट अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही हैै, जहां उन्हें इलाज कराना काफी महंगा पड़ रहा हैै। एकमात्र महिला सर्जन को मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका बनाया जा चुका है, जिससे वह प्रशासनिक कार्यों में ही ज्यादा व्यस्त रहती हैैं। खास बात यह है कि बाल रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत नहीं हैं, लेकिन सिक न्यू बार्न केयर यूनिट में तैनात डाक्टरों की सेवाएं ओपीडी में ली जा रहीं हैं। इसके अलावा अस्पताल में स्वीकृत पदों का मानक काफी पुराना है, जिससे अस्पताल से बगैर सलाह प्राप्त किए ही तमाम मरीजों को वापस लौैटना पड़ता है। पैरामेडिकल स्टाफ में वार्ड ब्वाय का एक पद स्वीकृत हैै, लेकिन यह भी रिक्त है। लिहाजा डिलीवरी के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को कई बार रेफर कर दिया जाता है या फिर प्राइवेट अस्पतालों में भेज दिया जाता है।
तीन डाक्टर महिला अस्पताल अटैच
जिला महिला अस्पताल में बढ़ती मरीजों की तादात के पीछे गांवों में सीएचसी और पीएचसी पर इलाज की सुविधा न होना है। जबकि विभिन्न सीएचसी पर तैनात तीन महिला डाक्टरों को महिला अस्पताल से अटैच किया गया है, जिनमें डॉ. यामिनी बादल, डॉ. नम्रता मिश्रा और डॉ. अंजलि वर्मा शामिल हैं।
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स्त्री रोग विशेषज्ञ के रिक्त पदों पर नई तैनाती की मांग शासन से कई बार की जा चुकी है, लेकिन अभी किसी की तैनाती नहीं हो सकी हैै। इससे महिला मरीजों के साथ ही अस्पताल प्रशासन को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसी तरह काम चलाया जा रहा है।
- डॉॅ. मीरा वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका
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जिले की आबादी पर गौर करें तो 2011 की जनगणना के मुुताबिक कुल आबादी 40,13,634 में 18,86,852 महिलाएं हैं। महिलाओं को सरकारी योजनाओं में बराबर की भागीदारी से लेकर राजनीति में 50 फीसदी हिस्सेदारी की बात हो रही है। वहीं, इनके स्वास्थ्य को लेकर सरकार कितनी फिक्रमंद हैं, जिसका इस बात से सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि जिले में सीएचसी/पीएचसी से लेकर जिला महिला अस्पताल में एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती नहीं है। लिहाजा इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों की सेवाओं पर निर्भर महिलाएं स्वास्थ्य संबंधी उचित इलाज से वंचित हो रही हैं। वहीं, विशेष आवश्यकता होने पर गरीब महिलाओं को प्राइवेट अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही हैै, जहां उन्हें इलाज कराना काफी महंगा पड़ रहा हैै। एकमात्र महिला सर्जन को मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका बनाया जा चुका है, जिससे वह प्रशासनिक कार्यों में ही ज्यादा व्यस्त रहती हैैं। खास बात यह है कि बाल रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत नहीं हैं, लेकिन सिक न्यू बार्न केयर यूनिट में तैनात डाक्टरों की सेवाएं ओपीडी में ली जा रहीं हैं। इसके अलावा अस्पताल में स्वीकृत पदों का मानक काफी पुराना है, जिससे अस्पताल से बगैर सलाह प्राप्त किए ही तमाम मरीजों को वापस लौैटना पड़ता है। पैरामेडिकल स्टाफ में वार्ड ब्वाय का एक पद स्वीकृत हैै, लेकिन यह भी रिक्त है। लिहाजा डिलीवरी के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को कई बार रेफर कर दिया जाता है या फिर प्राइवेट अस्पतालों में भेज दिया जाता है।
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तीन डाक्टर महिला अस्पताल अटैच
जिला महिला अस्पताल में बढ़ती मरीजों की तादात के पीछे गांवों में सीएचसी और पीएचसी पर इलाज की सुविधा न होना है। जबकि विभिन्न सीएचसी पर तैनात तीन महिला डाक्टरों को महिला अस्पताल से अटैच किया गया है, जिनमें डॉ. यामिनी बादल, डॉ. नम्रता मिश्रा और डॉ. अंजलि वर्मा शामिल हैं।
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स्त्री रोग विशेषज्ञ के रिक्त पदों पर नई तैनाती की मांग शासन से कई बार की जा चुकी है, लेकिन अभी किसी की तैनाती नहीं हो सकी हैै। इससे महिला मरीजों के साथ ही अस्पताल प्रशासन को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसी तरह काम चलाया जा रहा है।
- डॉॅ. मीरा वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका