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... तो फिर क्या खडे़ होकर पढे़गे विद्यार्थी
लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 20 Oct 2015 07:06 PM IST
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद निदेशालय ने सभी डिग्री कॉलेजों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति का प्रतिदिन का ब्योरा भेजने का निर्देश दिया है। निर्देश आने के बाद कॉलेजों ने प्रतिदिन उपस्थिति भेजना शुरू भी कर दी है लेकिन कई डिग्री कॉलेजों में छात्रों की संख्या के हिसाब से संसाधनों की संख्या बहुत कम है ऐसे में यदि सभी विद्यार्थी कॉलेज आ जाएं तो कॉलेज विद्यार्थियों की उपस्थिति ही नहीं ले पाएंगे।
विश्वविद्यालय के नियमानुसार सभी विद्यार्थियों की उपस्थिति वर्ष में 75 प्रतिशत अवश्य होनी चाहिए तभी वे परीक्षा दे सकते हैं। हालांकि इस पर विश्वविद्यालय से बहुत दबाव नहीं है इसलिए विद्यार्थी बच जाते हैं लेकिन इधर हाईकोर्ट के आदेश के बाद निदेशालय से प्रतिदिन उपस्थिति का ब्योरा मांगे जाने के बाद कॉलेजों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। शहर का वाईडी डिग्री कॉलेज जिले का सबसे बड़ा और पुराना डिग्री कॉलेज है। यहां लगभग स्नातक से परास्नातक तक 9000 विद्यार्थी संस्थागत रूप से पंजीकृत हैं। इस विद्यालय में कक्षों की संख्या 30 है। नियमानुसार एक कक्षा में अधिकतम 80 विद्यार्थी ही बैठाए जा सकते हैं। यहां यदि एक कक्षा में 100 विद्यार्थी भी बैठाए जाएं तो यह क्षमता 3000 विद्यार्थियों तक ही हो पाएगी। यदि 80 विद्यार्थियों के मानक को ही देखा जाए तो यहां करीब शिक्षण के लिए 72 कक्ष चाहिए। बात यहीं तक होती तो भी गनीमत थी। इस विद्यालय में शिक्षकों के 70 पद सृजित हैं इसके सापेक्ष मात्र 28 शिक्षक ही हैं। एक शिक्षक पर करीब 322 विद्यार्थी को शिक्षा देने की जिम्मेदारी है। मौजूदा समय में ही यहां करीब 42 शिक्षक कम हैं। ऐसे में यदि सभी 9000 विद्यार्थी कॉलेज आ जाएं तो शायद उन्हें फील्ड में खड़े कर दिन भर में उनकी उपस्थिति लेने का कार्य पूरा हो पाएगा। शिक्षण व्यवस्था की तो बात ही छोड़िए। हालत यह है कि बीएससी कैमेस्ट्री में लगभग 1400 विद्यार्थी पंजीकृत हैं इस विभाग में केवल दो शिक्षक हैं। हिंदी स्नातक में करीब 1700 विद्यार्थी पंजीकृत हैं जबकि सिर्फ एक शिक्षक है। कॉलेज में गणित का कोई शिक्षक ही नहीं है। शहर का दूसरा भगवानदीन आर्य कन्या डिग्री कॉलेज बालिकाओं का सबसे बड़ा कॉलेज है यहां की स्थिति भी लगभग इसी तरह की है। यहां अंग्रेजी विषय सहित कई विषयों की शिक्षिकाएं ही नहीं है। अब निदेशालय के प्रतिदिन छात्रों और शिक्षकों की उपस्थिति का ब्योरा भेजने के निर्देश ने कॉलेजों की मुसीबत और बढ़ा दी है। विद्यालय राहत में इसलिए हैं कि कॉलेज में प्रतिदिन लगभग 20 प्रतिशत विद्यार्थी ही आते हैं।
विद्यार्थी आएं हो जाएगी व्यवस्था
इस संबंध में वाईडी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरके सिंह ने बताया कि वे हमेशा विद्यार्थियों से कहते हैं कि वे नियमित रूप से कॉलेज आएं। उपस्थिति लेना और उनके पढ़ने की व्यवस्था करना कॉलेज की जिम्मेदारी है लेकिन विद्यार्थी ही नहीं आते तो हम क्या करें। उन्होंने कहा शिक्षकों की कमी है हर बार आश्वासन मिलता है कि शिक्षक मिल जाएंगे लेकिन जितने विद्यार्थी आते हैं सभी के लिए व्यवस्था की जाती है।
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विश्वविद्यालय के नियमानुसार सभी विद्यार्थियों की उपस्थिति वर्ष में 75 प्रतिशत अवश्य होनी चाहिए तभी वे परीक्षा दे सकते हैं। हालांकि इस पर विश्वविद्यालय से बहुत दबाव नहीं है इसलिए विद्यार्थी बच जाते हैं लेकिन इधर हाईकोर्ट के आदेश के बाद निदेशालय से प्रतिदिन उपस्थिति का ब्योरा मांगे जाने के बाद कॉलेजों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। शहर का वाईडी डिग्री कॉलेज जिले का सबसे बड़ा और पुराना डिग्री कॉलेज है। यहां लगभग स्नातक से परास्नातक तक 9000 विद्यार्थी संस्थागत रूप से पंजीकृत हैं। इस विद्यालय में कक्षों की संख्या 30 है। नियमानुसार एक कक्षा में अधिकतम 80 विद्यार्थी ही बैठाए जा सकते हैं। यहां यदि एक कक्षा में 100 विद्यार्थी भी बैठाए जाएं तो यह क्षमता 3000 विद्यार्थियों तक ही हो पाएगी। यदि 80 विद्यार्थियों के मानक को ही देखा जाए तो यहां करीब शिक्षण के लिए 72 कक्ष चाहिए। बात यहीं तक होती तो भी गनीमत थी। इस विद्यालय में शिक्षकों के 70 पद सृजित हैं इसके सापेक्ष मात्र 28 शिक्षक ही हैं। एक शिक्षक पर करीब 322 विद्यार्थी को शिक्षा देने की जिम्मेदारी है। मौजूदा समय में ही यहां करीब 42 शिक्षक कम हैं। ऐसे में यदि सभी 9000 विद्यार्थी कॉलेज आ जाएं तो शायद उन्हें फील्ड में खड़े कर दिन भर में उनकी उपस्थिति लेने का कार्य पूरा हो पाएगा। शिक्षण व्यवस्था की तो बात ही छोड़िए। हालत यह है कि बीएससी कैमेस्ट्री में लगभग 1400 विद्यार्थी पंजीकृत हैं इस विभाग में केवल दो शिक्षक हैं। हिंदी स्नातक में करीब 1700 विद्यार्थी पंजीकृत हैं जबकि सिर्फ एक शिक्षक है। कॉलेज में गणित का कोई शिक्षक ही नहीं है। शहर का दूसरा भगवानदीन आर्य कन्या डिग्री कॉलेज बालिकाओं का सबसे बड़ा कॉलेज है यहां की स्थिति भी लगभग इसी तरह की है। यहां अंग्रेजी विषय सहित कई विषयों की शिक्षिकाएं ही नहीं है। अब निदेशालय के प्रतिदिन छात्रों और शिक्षकों की उपस्थिति का ब्योरा भेजने के निर्देश ने कॉलेजों की मुसीबत और बढ़ा दी है। विद्यालय राहत में इसलिए हैं कि कॉलेज में प्रतिदिन लगभग 20 प्रतिशत विद्यार्थी ही आते हैं।
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विद्यार्थी आएं हो जाएगी व्यवस्था
इस संबंध में वाईडी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरके सिंह ने बताया कि वे हमेशा विद्यार्थियों से कहते हैं कि वे नियमित रूप से कॉलेज आएं। उपस्थिति लेना और उनके पढ़ने की व्यवस्था करना कॉलेज की जिम्मेदारी है लेकिन विद्यार्थी ही नहीं आते तो हम क्या करें। उन्होंने कहा शिक्षकों की कमी है हर बार आश्वासन मिलता है कि शिक्षक मिल जाएंगे लेकिन जितने विद्यार्थी आते हैं सभी के लिए व्यवस्था की जाती है।
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