फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   The women of the revolution of the lighted torch

यहां महिलाओं ने भी रोशन की क्रांति की मशाल

Thu, 11 Aug 2016 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी। Updated Thu, 11 Aug 2016 11:34 PM IST
विज्ञापन
जरा याद करो कुर्बानी
विज्ञापन

पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ीं नारियां

जिले के स्वतंत्रता संग्राम में नारी शक्ति भी किसी से पीछे नहीं रही। कई महिलाओं ने स्वाधीनता आंदोलन में हिस्सा लेकर क्रांति की मशाल रोशन की। जांगड़ा राजा सुरेंद्र विक्रम सिंह की पत्नी रानी मां ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए क्रांतिकारियों के परिवार की मदद में अपना पूरा जीवन गुजार दिया, तो गोदावरी देवी, तुलसा देवी, निर्मला देवी ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेकर जेल में अंग्रेजों की यातनाएं सहीं।

क्रांतिकारियों की मदद में गुजार दी जिंदगी 
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 में धौरहरा के जांगड़ा राजा इंद्र विक्रम सिंह और उनके भाई सुरेंद्र विक्रम सिंह अंग्रेजों से लोहा लेते हुए गिरफ्तार कर लिए गए। उनकी रियासत जब्त कर कैप्टन हिरसी को पुरस्कार में दे दी गई। राजा इंद्र विक्रम सिंह की जेल में ही मौत हो गई। सुरेंद्र विक्रम सिंह लंबे अरसे बाद जेल से छूटे। इस बीच उनकी पत्नी रानी मां कफारा में रहकर जीवन भर क्रांतिकारियों की मदद करती रहीं। उन्होंने क्रांति की मशाल जलाए रखी। 
विज्ञापन


सत्याग्रह आंदोलन में दो बार जेल गईं निर्मला देवी
भीरा के स्वामी रामस्वरूप की पत्नी निर्मला देवी गांधी जी के सत्याग्रह आंदोलन से बेहद प्रभावित थीं। गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियां भी उन्हें स्वतंत्रता सेनानी बनने से नहीं रोक सकीं और वह स्वाधीनता आंदोलन में कूद पड़ीं। सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान 1932 में तीन माह की कैद तथा सत्याग्रह आंदोलन के दौरान 1941 में तीन माह की सजा पाई। जीवन भर आजादी के लिए संघर्ष किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्रांतिकारियों तक संदेश पहुंचाए तुलसा देवी ने
तहसील लखीमपुर के फुटहा गांव निवासी तुलसा देवी निर्मला देवी के प्रभाव में आकर विद्रोही बन गईं। अपने परिवार और अंग्रेजी सत्ता से विद्रोह कर 1940-41 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में भाग लिया। उन्हें तीन महीने की सजा हुई। 1942 की क्रांति में फरार रहकर वह कांग्रेस की डाक उन नेताओं तक पहुंचाती रहीं जो भूमिगत रहकर अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे।


सत्याग्रह की संचालिका रहीं गोदावरी देवी 
गोदावरी देवी उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सदस्य रहीं। राजनीतिक और सामाजिक संस्थाओं से संबद्ध रहकर व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन में हिस्सा लिया। इसी दौरान 1941 में तीन माह की कैद और 50 रुपये जुर्माने की सजा हुई। भारत छोड़ो आंदोलन के सिलसिले में 1942 में पकड़ीं गईं और 12 माह नजरबंद रहीं। 1940-41 में गांधी जी ने जिला खीरी में गोदावरी देवी को सत्याग्रह की संचालिका नियुक्त किया। उन्होंने महिला शिक्षा को बढ़ावा देने का काम किया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed