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शिक्षक के स्कूल न आने पर ग्रामीणों ने काटा हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो निघासन।
Updated Thu, 31 Aug 2017 10:55 PM IST
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हंगामा
- फोटो : अमर उजाला
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बीएसए ने कहा कि शिक्षक पर होगी कार्रवाई
प्राथमिक विद्यालय टांडा में शिक्षक के न आने पर ग्रामीणों ने हंगामा किया। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत बीएसए से की। बीएसए ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए ग्रामीणों को शांत कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि एमडीएम के नाम पर पैसा निकाल लिया गया, लेकिन करीब छह माह से भोजन नहीं बना है।
ब्लॉक रमियाबेहड़ के खरवहिया नंबर दो के मजरा टांडा में अभिभावकों चुन्नू लाल, रामनरेश, रमाकांत, दयाशंकर, रामबहादुर, सर्वेश कुमार, विश्राम, रामकुमार, केदारनाथ, अंकेश, राजेश आदि ने बताया कि स्कूल के प्रधानाध्यापक सौरभ बीती 13 जुलाई से स्कूल नहीं आए हैं। आरोप है कि करीब छह माह से स्कूल में एमडीएम नहीं बना है, जबकि एमडीएम के नाम पर पैसा भी निकाला गया है। स्कूल का भवन अत्यधिक जर्जर होने के कारण वहां पर मौजूद दो शिक्षक रमेश कुमार और सुशील बच्चों को बरामदे में पढ़ाने को मजबूर है। जरा सी बरसात में पूरा स्कूल टपकने लगता है। छत व दीवारों के प्लास्टर गिर रहे है। स्कूल में बना शौचालय में झाड़ियां उग आई हैं। स्कूल की बाउंड्री देखरेख के अभाव में टूट गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल मरम्मत के नाम पर आने वाली धनराशि भी नहीं खर्च की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक की सत्ता पक्ष के एक प्रभावशाली नेता से ऊपर तक पहुंच के चलते वह माह में एक बार आते हैं और रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके चले जाते हैं। ग्राम प्रधान जगदीश ने बीएसए समेत कई उच्चाधिकारियों से शिक्षक की शिकायत की है। बीएसए ने फोन पर ग्रामीणों को कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उधर शिक्षक ने जरूरी काम पड़ने के कारण न आने की बात कही है।
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प्राथमिक विद्यालय टांडा में शिक्षक के न आने पर ग्रामीणों ने हंगामा किया। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत बीएसए से की। बीएसए ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए ग्रामीणों को शांत कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि एमडीएम के नाम पर पैसा निकाल लिया गया, लेकिन करीब छह माह से भोजन नहीं बना है।
ब्लॉक रमियाबेहड़ के खरवहिया नंबर दो के मजरा टांडा में अभिभावकों चुन्नू लाल, रामनरेश, रमाकांत, दयाशंकर, रामबहादुर, सर्वेश कुमार, विश्राम, रामकुमार, केदारनाथ, अंकेश, राजेश आदि ने बताया कि स्कूल के प्रधानाध्यापक सौरभ बीती 13 जुलाई से स्कूल नहीं आए हैं। आरोप है कि करीब छह माह से स्कूल में एमडीएम नहीं बना है, जबकि एमडीएम के नाम पर पैसा भी निकाला गया है। स्कूल का भवन अत्यधिक जर्जर होने के कारण वहां पर मौजूद दो शिक्षक रमेश कुमार और सुशील बच्चों को बरामदे में पढ़ाने को मजबूर है। जरा सी बरसात में पूरा स्कूल टपकने लगता है। छत व दीवारों के प्लास्टर गिर रहे है। स्कूल में बना शौचालय में झाड़ियां उग आई हैं। स्कूल की बाउंड्री देखरेख के अभाव में टूट गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल मरम्मत के नाम पर आने वाली धनराशि भी नहीं खर्च की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक की सत्ता पक्ष के एक प्रभावशाली नेता से ऊपर तक पहुंच के चलते वह माह में एक बार आते हैं और रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके चले जाते हैं। ग्राम प्रधान जगदीश ने बीएसए समेत कई उच्चाधिकारियों से शिक्षक की शिकायत की है। बीएसए ने फोन पर ग्रामीणों को कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उधर शिक्षक ने जरूरी काम पड़ने के कारण न आने की बात कही है।
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