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सावन मेले के लिए सजने लगी भोले की नगरी
अमर उजाला ब्यूरो गोला गोकर्णनाथ।
Updated Thu, 06 Jul 2017 11:45 PM IST
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शिव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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आकर्षण का केन्द्र होंगी पीतल की मूर्तियां, बर्तन
दुकानदार मुरादाबाद, हरिद्वार और कानपुर से लाते हैं पूजा का सामान
शिव मंदिर के परिसर में स्थित बाजार में पूजा के बर्तन, पीतल की मूर्तियां, शंख और घंटियों की दुकानें सज गई हैं। दुकानदारों में जीएसटी को लेकर संशय है, लेकिन वह कहते हैं कि यहां अधिकांश सामान एक हजार रुपये से कम कीमत का हैं इसलिए इसका ज्यादा असर नहीं होगा। दुकानदार पिंकू गिरि, मोनू, संदीप गुप्ता, परशुराम, सोनू, सुशील गुप्ता, मनोज, लकी, शेखर, राजू सक्सेना, इमरान, विजय, संजय आदि ने पूजन सामग्री की दुकानें सजा रखी हैं। दुकानदारों ने बताया कि पूजा के बर्तन, पीतल की मूर्तियां और घंटियां मुरादाबाद से, शंख-झंड-वस्त्र हरिद्वार और कानपुर से खरीदते हैं। दर्शनार्थी यहां से बांटने के लिए प्रसाद भी ले जाते हैं, जिसमें लाई, चूरा बरेली से मंगाई जाती है। गट्टा चीनी का बना इलाइची दाना गोला में ही मुस्लिम समुदाय के लोग बनाते हैं। लाई चूरा का भाव 40 रुपये किग्रा, गट्टा, दाना 60 रुपये प्रति किग्रा बिक रहा है।
सज गईं हैं फूल और बेलपत्र की दुकानें
गोकर्ण तीर्थ के पास से पौराणिक शिव मंदिर द्वार तक फूल, बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि की लगभग 15 दुकानें हैं। जहां सुखदेव गिरि, सुभाष गिरि आदि ने बताया कि फूल धतूरा और कमल लखनऊ से मंगाते हैं, जिसमें गुलाब 200 रुपये किलो, गेंदा 100 रुपये किलो, धतूरा 100 रुपया सैकड़ा, कमल 200 रुपया सैकड़ा मिलता है।
देखते ही बनती हैं सौंदर्य प्रसाधन की दुकानें
तीर्थ बाजार में सौंदर्य प्रसाधन और चूड़ियों की दुकानें चूड़ी वाली गली में स्थित हैं। सौंदर्य प्रशाधन के दुकानदार सोनू गुप्ता, मोनू, कालिका आदि की रंग बिरंगी रोशनी से चकाचौंध दुकानें आकर्षण का केंद्र बनीं है। उन्होंने बताया कि पहले तो इस नगर में ही सिंदूर बनता था किंतु अब खर्चा अधिक होने के कारण वाराणसी से आने लगा है। चूड़ियां फिरोजाबाद से मंगाते हैं जबकि प्लास्टिक और धातु के बने सुंदर कड़े कानपुर से लाकर बेचते हैं।
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दुकानदार मुरादाबाद, हरिद्वार और कानपुर से लाते हैं पूजा का सामान
शिव मंदिर के परिसर में स्थित बाजार में पूजा के बर्तन, पीतल की मूर्तियां, शंख और घंटियों की दुकानें सज गई हैं। दुकानदारों में जीएसटी को लेकर संशय है, लेकिन वह कहते हैं कि यहां अधिकांश सामान एक हजार रुपये से कम कीमत का हैं इसलिए इसका ज्यादा असर नहीं होगा। दुकानदार पिंकू गिरि, मोनू, संदीप गुप्ता, परशुराम, सोनू, सुशील गुप्ता, मनोज, लकी, शेखर, राजू सक्सेना, इमरान, विजय, संजय आदि ने पूजन सामग्री की दुकानें सजा रखी हैं। दुकानदारों ने बताया कि पूजा के बर्तन, पीतल की मूर्तियां और घंटियां मुरादाबाद से, शंख-झंड-वस्त्र हरिद्वार और कानपुर से खरीदते हैं। दर्शनार्थी यहां से बांटने के लिए प्रसाद भी ले जाते हैं, जिसमें लाई, चूरा बरेली से मंगाई जाती है। गट्टा चीनी का बना इलाइची दाना गोला में ही मुस्लिम समुदाय के लोग बनाते हैं। लाई चूरा का भाव 40 रुपये किग्रा, गट्टा, दाना 60 रुपये प्रति किग्रा बिक रहा है।
सज गईं हैं फूल और बेलपत्र की दुकानें
गोकर्ण तीर्थ के पास से पौराणिक शिव मंदिर द्वार तक फूल, बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि की लगभग 15 दुकानें हैं। जहां सुखदेव गिरि, सुभाष गिरि आदि ने बताया कि फूल धतूरा और कमल लखनऊ से मंगाते हैं, जिसमें गुलाब 200 रुपये किलो, गेंदा 100 रुपये किलो, धतूरा 100 रुपया सैकड़ा, कमल 200 रुपया सैकड़ा मिलता है।
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देखते ही बनती हैं सौंदर्य प्रसाधन की दुकानें
तीर्थ बाजार में सौंदर्य प्रसाधन और चूड़ियों की दुकानें चूड़ी वाली गली में स्थित हैं। सौंदर्य प्रशाधन के दुकानदार सोनू गुप्ता, मोनू, कालिका आदि की रंग बिरंगी रोशनी से चकाचौंध दुकानें आकर्षण का केंद्र बनीं है। उन्होंने बताया कि पहले तो इस नगर में ही सिंदूर बनता था किंतु अब खर्चा अधिक होने के कारण वाराणसी से आने लगा है। चूड़ियां फिरोजाबाद से मंगाते हैं जबकि प्लास्टिक और धातु के बने सुंदर कड़े कानपुर से लाकर बेचते हैं।
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