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अब राजस्व परिषद की टीम करेगी जांच
निघासन
Updated Thu, 03 Sep 2015 11:01 PM IST
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तहसील के बाढ़ राहत घोटाले की जांच अब राजस्व परिषद की टीम करेगी। घोटाले की बाबत अमर उजाला में छपी कई खबरों और जिला पंचायत सदस्य राजीव गुप्ता के शिकायती पत्र को संज्ञान में लेते हुए राजस्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने प्रमुख सचिव सुरेश चंद्रा को बाढ़ राहत घोटाले के साथ-साथ अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से फसलों को हुई क्षति के मुआवजे के लिए सर्वे में हुई घपलेबाजी की जांच के आदेश दिए हैं। प्रमुख सचिव ने राजस्व परिषद की टीम को जांच कर रिपोर्ट दो सप्ताह के अंदर उपलब्ध कराने को कहा है।
बहुचर्चित बाढ़ राहत घोटाले की छह माह से चल रही जांच में जांच अधिकारी की हीलाहवाली के चलते जिला पंचायत सदस्य राजीव गुप्ता ने राजस्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव को एक पत्र भेजा था। पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2013 में आई भीषण बाढ़ में तबाह हुई फसलों का मुआवजा वितरण में समूची तहसील में बड़े पैमाने पर गोलमाल किया गया। इस घोटाले में तहसीलदार से लेकर लेखपाल के साथ में गांव के कुछ दलाल भी शामिल थे। मामले की जांच एसडीएम को सौंपी गई, लेकिन छह माह बीतने के बाद भी दोषी लेखपालों पर विभागीय कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा इसी साल ओलावृष्टि से तबाह हुई फसलों के सर्वे में भी लेखपालों ने मनमानी की।
पत्र में जिला पंचायत सदस्य ने इस बात का भी उल्लेख किया है कि मोहाना नदी के कटान से बेघर हुए लोगों को बसाने के लिए जमीन 16 लाख रुपये प्रति एकड़ खरीदी गई, जबकि खरीदी गई जमीन का रेट इतना महंगा नहीं था। इस जमीन पर कई अपात्रों को बसाने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने इन मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग राजस्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव से की थी।
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राजस्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को राजस्व परिषद की टीम से इन मामलों की जांच कराकर दो सप्ताह के अंदर जांच रिपोर्ट देने को कहा है। राजस्व मंत्री के इस आदेश से निघासन तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है। इस मामले में कई लेखपालों के अलावा अधिकारियों तक की गर्दन फंस सकती है।
इन ग्राम पंचायतों में भी हुआ है बाढ राहत घोटाला
तहसील क्षेत्र के लालपुर के अलावा, बैलहा, बल्लीपुर, मुर्गहा, मदनापुर, त्रिकोलिया, अदलाबाद, मूड़ा बुजुर्ग आदि ग्राम पंचायतों में भी बाढ़ राहत के नाम पर घोटाला किया गया है। इन ग्राम पंचायतों में लाभार्थियों को बाढ़ राहत चेक देने के बजाय दलालों के माध्यम से कैश करा लिए गए। जांच में यह गोलमाल खुलने की आशंका से चेक वितरण के जिम्मदार लेखपाल और कानूनगो हलकान हैं।
बैंक कर्मी भी हैं दोषी
बाढ़ राहत घोटाले में फर्जी आईडी के सहारे फर्जी खाता खोलने के मामले में बैंक कर्मचारी भी दोषी हैं। यदि मामले की जांच सही ढंग से हुई तो इस जांच में बैंक, तहसील के अलावा कई ग्राम प्रधानों की गर्दन भी फंस सकती है। फर्जी आईडी बनाने वाले लोगों पर भी शिकंजा कस सकता है।
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बहुचर्चित बाढ़ राहत घोटाले की छह माह से चल रही जांच में जांच अधिकारी की हीलाहवाली के चलते जिला पंचायत सदस्य राजीव गुप्ता ने राजस्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव को एक पत्र भेजा था। पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2013 में आई भीषण बाढ़ में तबाह हुई फसलों का मुआवजा वितरण में समूची तहसील में बड़े पैमाने पर गोलमाल किया गया। इस घोटाले में तहसीलदार से लेकर लेखपाल के साथ में गांव के कुछ दलाल भी शामिल थे। मामले की जांच एसडीएम को सौंपी गई, लेकिन छह माह बीतने के बाद भी दोषी लेखपालों पर विभागीय कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा इसी साल ओलावृष्टि से तबाह हुई फसलों के सर्वे में भी लेखपालों ने मनमानी की।
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पत्र में जिला पंचायत सदस्य ने इस बात का भी उल्लेख किया है कि मोहाना नदी के कटान से बेघर हुए लोगों को बसाने के लिए जमीन 16 लाख रुपये प्रति एकड़ खरीदी गई, जबकि खरीदी गई जमीन का रेट इतना महंगा नहीं था। इस जमीन पर कई अपात्रों को बसाने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने इन मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग राजस्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव से की थी।
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राजस्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को राजस्व परिषद की टीम से इन मामलों की जांच कराकर दो सप्ताह के अंदर जांच रिपोर्ट देने को कहा है। राजस्व मंत्री के इस आदेश से निघासन तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है। इस मामले में कई लेखपालों के अलावा अधिकारियों तक की गर्दन फंस सकती है।
इन ग्राम पंचायतों में भी हुआ है बाढ राहत घोटाला
तहसील क्षेत्र के लालपुर के अलावा, बैलहा, बल्लीपुर, मुर्गहा, मदनापुर, त्रिकोलिया, अदलाबाद, मूड़ा बुजुर्ग आदि ग्राम पंचायतों में भी बाढ़ राहत के नाम पर घोटाला किया गया है। इन ग्राम पंचायतों में लाभार्थियों को बाढ़ राहत चेक देने के बजाय दलालों के माध्यम से कैश करा लिए गए। जांच में यह गोलमाल खुलने की आशंका से चेक वितरण के जिम्मदार लेखपाल और कानूनगो हलकान हैं।
बैंक कर्मी भी हैं दोषी
बाढ़ राहत घोटाले में फर्जी आईडी के सहारे फर्जी खाता खोलने के मामले में बैंक कर्मचारी भी दोषी हैं। यदि मामले की जांच सही ढंग से हुई तो इस जांच में बैंक, तहसील के अलावा कई ग्राम प्रधानों की गर्दन भी फंस सकती है। फर्जी आईडी बनाने वाले लोगों पर भी शिकंजा कस सकता है।