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रैबीज के मरीजों की संख्या में इजाफा
लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 28 Sep 2015 11:33 PM IST
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जिले में कुत्ता, बंदर समेत अन्य पशुओं के लोगों को काटने से रैबीज के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। जिले में वन्य जानवरों के काटने से प्रतिदिन लगभग दर्जनों लोग रैबीज की चपेट में आते हैं। जिले में प्रतिदिन करीब 300 लोग रैबीज के इंजेक्शन लगवाते हैं।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में आएदिन कुत्ता, बंदर और अन्य पशु लोगों को काटकर जख्मी कर देते हैं। इनके काटने के कारण रैबीज के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस संबंध में जिला अस्पताल के डॉक्टर एसके वर्मा ने बताया कि कुत्ता बंदर या अन्य कोई जानवर के काटने पर 10 दिन के अंदर वैक्सीन लगवा लेनी चाहिए। यदि काटने वाले जानवर में रैबीज है और समय सीमा निकल गई है तो फिर इसका इलाज असंभव हो जाता है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल के अलावा जिले में 20 ऐसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं जहां पर लोगों को रैबीज का वैक्सीन लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन इंजेक्शन लगवाने के लिए लगभग 50 से 60 तक लोग आते हैं। इसके अलावा पीएचसी पर भी लोग लगवाने पहुंचते हैं। औसतन प्रतिदिन लगभग 250 से 300 तक लोग रैबीज के इंजेक्शन लगवाते हैं। उन्होंने बताया यदि किसी के शरीर में रैबीज है तो वह व्यक्ति भी उतना ही खतरनाक हो जाता है जितना कि रैबीज वाला कोई जानवर इसलिए ऐसे व्यक्ति को भी अन्य लोगों से दूर ही रखना चाहिए।
डॉ. एसके मिश्रा ने बताया कि जिस व्यक्ति या जानवर में रैबीज होता है उसे पानी से डर लगने लगता है। उसे हवा और उजाले से भी डर रहता है ऐसा व्यक्ति अधिकतर अंधेरे में रहना चाहता है। स्थिति आगे बढ़ने पर यह जानवरों जैसी हरकतें भी करने लगता है। लोगों को काटने दौड़ता है यदि कोई व्यक्ति या जानवर ऐसी हरकत करता है तो उससे सावधान रहना चाहिए।
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डॉ. एसके मिश्रा ने बताया कि रैबीज होने पर इसका कोई इलाज नहीं है यदि किसी को जानवर ने काट लिया है तो बिना किसी लापरवाही के वैक्सीन का इंजेक्शन लगवा लेना चाहिए।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. वीके साहू ने बताया जिला अस्पताल सहित जिले की सीएचसी पर रैबीज का वैक्सीन उपलब्ध है । इसके पीड़ितों को जिला अस्पताल सहित पीएचसी और सीएचसी पर इंजेक्शन लगाए जाते हैं।
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शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में आएदिन कुत्ता, बंदर और अन्य पशु लोगों को काटकर जख्मी कर देते हैं। इनके काटने के कारण रैबीज के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस संबंध में जिला अस्पताल के डॉक्टर एसके वर्मा ने बताया कि कुत्ता बंदर या अन्य कोई जानवर के काटने पर 10 दिन के अंदर वैक्सीन लगवा लेनी चाहिए। यदि काटने वाले जानवर में रैबीज है और समय सीमा निकल गई है तो फिर इसका इलाज असंभव हो जाता है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल के अलावा जिले में 20 ऐसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं जहां पर लोगों को रैबीज का वैक्सीन लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन इंजेक्शन लगवाने के लिए लगभग 50 से 60 तक लोग आते हैं। इसके अलावा पीएचसी पर भी लोग लगवाने पहुंचते हैं। औसतन प्रतिदिन लगभग 250 से 300 तक लोग रैबीज के इंजेक्शन लगवाते हैं। उन्होंने बताया यदि किसी के शरीर में रैबीज है तो वह व्यक्ति भी उतना ही खतरनाक हो जाता है जितना कि रैबीज वाला कोई जानवर इसलिए ऐसे व्यक्ति को भी अन्य लोगों से दूर ही रखना चाहिए।
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डॉ. एसके मिश्रा ने बताया कि जिस व्यक्ति या जानवर में रैबीज होता है उसे पानी से डर लगने लगता है। उसे हवा और उजाले से भी डर रहता है ऐसा व्यक्ति अधिकतर अंधेरे में रहना चाहता है। स्थिति आगे बढ़ने पर यह जानवरों जैसी हरकतें भी करने लगता है। लोगों को काटने दौड़ता है यदि कोई व्यक्ति या जानवर ऐसी हरकत करता है तो उससे सावधान रहना चाहिए।
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डॉ. एसके मिश्रा ने बताया कि रैबीज होने पर इसका कोई इलाज नहीं है यदि किसी को जानवर ने काट लिया है तो बिना किसी लापरवाही के वैक्सीन का इंजेक्शन लगवा लेना चाहिए।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. वीके साहू ने बताया जिला अस्पताल सहित जिले की सीएचसी पर रैबीज का वैक्सीन उपलब्ध है । इसके पीड़ितों को जिला अस्पताल सहित पीएचसी और सीएचसी पर इंजेक्शन लगाए जाते हैं।