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Lakhimpur Kheri News: अचार के कारोबार ने जीवन में घोली खुशहाली की मिठास

Thu, 23 Oct 2025 12:35 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Thu, 23 Oct 2025 12:35 AM IST
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The pickle business has brought sweetness and happiness to life
कुंभी के महेशपुर गांव में अचार बना रही बबिता व उनकी टीम। संवाद - फोटो : रामकोट में दीपों से जगमगाता गंगासागर तीर्थ व हुई आतिशबाजी।
लखीमपुर खीरी। अचार के कारोबार ने विकासखंड कुंभी (गोला) की ग्राम पंचायत महेशपुर की बबिता कुशवाहा के जीवन में खुशहाली की मिठास घोल दी है। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर अचार निर्माण के क्षेत्र में नए-नए प्रयोग किए हैं, जो उपभोक्ताओं की पसंद बन गए हैं।
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बबिता के नेतृत्व में अब महिलाएं पारंपरिक आम, लहसुन, आंवले, करौंदे और मेंथी के अचार के साथ ही भरवां मिर्च, गाजर, गोभी, कटहल, सहजन और जिमीकंद जैसे नए स्वाद वाले अचार भी तैयार कर रही हैं। यही नहीं, उनके द्वारा बनाए गए आंवले का मुरब्बा और विभिन्न स्वादों से भरपूर मिक्स अचार भी उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
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इस नवाचार का सबसे बड़ा लाभ महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने के रूप में सामने आया है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से न केवल रोजगार का सृजन हुआ, बल्कि ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से भी सशक्त हो रही हैं। इस अभियान को इंडियन सोशल रिस्पांसिबिलिटी नेटवर्क नई दिल्ली तथा लघु कृषक कृषि व्यापार संघ के सहयोग से नई ऊर्जा मिली है। संवाद
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उत्पाद टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण हो रहे साबित

बबिता का कहना है कि अचार की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। महिलाएं केवल अच्छे किस्म के खड़े मसालों और सरसों के तेल का प्रयोग करती हैं। साथ ही अचार को लंबे समय तक ताजा और स्वादिष्ट बनाए रखने के लिए सिरके का भी उपयोग किया जाता है। यही वजह है कि उनके उत्पाद टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण साबित हो रहे हैं।
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गांव का स्वाद पहुंच रहा शहरों की रसोई तक

बाजार की दृष्टि से भी यह पहल बेहद सफल रही है। महिलाएं घर बैठे ही स्थानीय दुकानों और बड़े शोरूम तक अपने अचार की आपूर्ति कर रही हैं। इससे जहां बिक्री में वृद्धि हुई है। वहीं गांव का पारंपरिक स्वाद अब शहरों की रसोई तक पहुंच चुका है। बबिता कुशवाहा की मेहनत, सृजनशीलता और नवाचार आज महेशपुर ही नहीं, पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। उनके बनाए अचार अब सिर्फ स्वाद का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता हुआ एक सशक्त कदम हैं।

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पहले अकेले शुरू किया काम, फिर जुड़ता गया कारवां
बबिता ने शुरुआत में यह काम अकेले ही शुरू किया था। घर के बड़ों से अचार बनाने की विधि सीखी। इसके बाद उन्होंने इसे व्यवसायिक रूप दिया। बाद में उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ा। बबिता ने बताया कि धीरे-धीरे उनकी एक टीम बन गई, जिसमें कई महिलाएं जुड़ चुकी हैं। अब यह महिलाएं अचार तैयार कर बाजार में बेचकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। बबिता का मानना है कि अगर महिलाओं को सही दिशा और अवसर मिले तो वे भी स्वावलंबन की राह पर आगे बढ़ सकती हैं।
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