{"_id":"6a2700c878743265910a6cb3","slug":"the-jungle-like-atmosphere-is-why-leopards-are-staying-in-dhaurahra-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1002-177060-2026-06-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: जंगल जैसा माहौल, इसलिए धौरहरा में रुक रहे तेंदुए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: जंगल जैसा माहौल, इसलिए धौरहरा में रुक रहे तेंदुए
Mon, 08 Jun 2026 11:20 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 08 Jun 2026 11:20 PM IST
विज्ञापन
धौरहरा। वन रेंज का गन्ना बहुल क्षेत्र तेंदुओं का पसंदीदा ठिकाना बनता जा रहा है। गन्ने के घने खेत, केले के बागान, शारदा-घाघरा नदियों से जुड़े नालों का जाल और भरपूर शिकार उन्हें जंगल जैसा माहौल उपलब्ध करा रहा है। यही वजह है कि बहराइच के जंगलों से आने वाले तेंदुए यहां लंबे समय तक डेरा जमा रहे हैं।
वन विभाग के अनुसार, धौरहरा वन रेंज की भौगोलिक परिस्थितियां तेंदुओं के लिए अनुकूल हैं। क्षेत्र में शारदा और घाघरा नदियों से जुड़े करीब 40 छोटे-बड़े नाले हैं, जो पानी की सतत उपलब्धता बनाए रखते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गन्ने की ऊंची और सघन फसल तेंदुओं को टाइगर ग्रास जैसी आड़ देती है, जबकि केले के बागान जंगल जैसा सुरक्षित वातावरण प्रदान करते हैं।
क्षेत्र में घूमने वाले सियार, आवारा गोवंश, कुत्ते और बंदर तेंदुओं के लिए सहज शिकार उपलब्ध कराते हैं। भोजन और पानी की उपलब्धता के कारण उन्हें बार-बार जंगल लौटने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, आबादी और खेतों के करीब पहुंचने पर मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
विज्ञापन
एसडीओ मनोज तिवारी ने बताया कि अधिकांश तेंदुए बहराइच के जंगलों से नदी पार कर धौरहरा क्षेत्र में पहुंचते हैं। यहां की अनुकूल परिस्थितियां उन्हें रुकने के लिए आकर्षित करती हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 तक 11 तेंदुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा चुका है, लेकिन वन क्षेत्र और आसपास के गांवों में उनकी मौजूदगी अब भी बनी हुई है।
-- -- -- -- -- -- -- --
बढ़ी निगरानी, किसानों से सतर्क रहने की अपील
एसडीओ मनोज तिवारी ने किसानों और ग्रामीणों से खेतों में अकेले न जाने, सुबह-शाम विशेष सावधानी बरतने तथा तेंदुआ दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने की अपील की है। उनका कहना है कि सतर्कता और समय पर सूचना से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम किया जा सकता है।
-- -- -- -- -- -- --
वनमंत्री तक पहुंचा तेंदुओं का मुद्दा
धौरहरा विधायक विनोद शंकर अवस्थी ने 24 मई को वनमंत्री अरुण कुमार सक्सेना से मिलकर क्षेत्र को तेंदुओं के आतंक से निजात दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की थी। क्षेत्र में बढ़ती घटनाओं के कारण यह मुद्दा वन विभाग और शासन स्तर तक पहुंच चुका है।
-- -- -- -- -- -- -- -- --
तेंदुए के हमले की प्रमुख घटनाएं
09 मार्च 2025: रमुआपुर निवासी हरीनरायन (55) घायल।
13 अप्रैल 2025: बानो (22) पत्नी खलीक, धौरहरा घायल।
23 मई 2025: सिंगावर, ईसानगर निवासी हरीश (30) व कालिका (25) घायल।
25 जून 2025: बबुरी भट्ठा पर मिहीलाल (35), रेंजर नृपेंद्र चतुर्वेदी, वन दरोगा राजेश दीक्षित (45), पीआरवी आरक्षी राम सजीवन (37) और जुगनूपुर निवासी इकबाल खां घायल।
23 जुलाई 2025: बैचरी सिंगावर निवासी कालिका प्रसाद घायल।
27 जुलाई 2025: लखनपुरवा निवासी किसान सोबरन लाल (70) को खेत से खींचकर मार डाला।
07 नवंबर 2025: मिलिक निवासी निशा (10) पुत्री कंधई घायल।
31 दिसंबर 2025: मंगरोली निवासी सिराजुद्दीन (65) को हमला कर मार डाला।
10 फरवरी 2026: कन्हैयादीनपुरवा निवासी हरीनरायन (60) और उनकी पत्नी हेमलता (55) घायल।
07 जून 2026: रायपुर, ईसानगर निवासी शुभम (6) की मौत।
विज्ञापन
वन विभाग के अनुसार, धौरहरा वन रेंज की भौगोलिक परिस्थितियां तेंदुओं के लिए अनुकूल हैं। क्षेत्र में शारदा और घाघरा नदियों से जुड़े करीब 40 छोटे-बड़े नाले हैं, जो पानी की सतत उपलब्धता बनाए रखते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गन्ने की ऊंची और सघन फसल तेंदुओं को टाइगर ग्रास जैसी आड़ देती है, जबकि केले के बागान जंगल जैसा सुरक्षित वातावरण प्रदान करते हैं।
विज्ञापन
क्षेत्र में घूमने वाले सियार, आवारा गोवंश, कुत्ते और बंदर तेंदुओं के लिए सहज शिकार उपलब्ध कराते हैं। भोजन और पानी की उपलब्धता के कारण उन्हें बार-बार जंगल लौटने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, आबादी और खेतों के करीब पहुंचने पर मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
विज्ञापन
एसडीओ मनोज तिवारी ने बताया कि अधिकांश तेंदुए बहराइच के जंगलों से नदी पार कर धौरहरा क्षेत्र में पहुंचते हैं। यहां की अनुकूल परिस्थितियां उन्हें रुकने के लिए आकर्षित करती हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 तक 11 तेंदुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा चुका है, लेकिन वन क्षेत्र और आसपास के गांवों में उनकी मौजूदगी अब भी बनी हुई है।
बढ़ी निगरानी, किसानों से सतर्क रहने की अपील
एसडीओ मनोज तिवारी ने किसानों और ग्रामीणों से खेतों में अकेले न जाने, सुबह-शाम विशेष सावधानी बरतने तथा तेंदुआ दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने की अपील की है। उनका कहना है कि सतर्कता और समय पर सूचना से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम किया जा सकता है।
वनमंत्री तक पहुंचा तेंदुओं का मुद्दा
धौरहरा विधायक विनोद शंकर अवस्थी ने 24 मई को वनमंत्री अरुण कुमार सक्सेना से मिलकर क्षेत्र को तेंदुओं के आतंक से निजात दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की थी। क्षेत्र में बढ़ती घटनाओं के कारण यह मुद्दा वन विभाग और शासन स्तर तक पहुंच चुका है।
तेंदुए के हमले की प्रमुख घटनाएं
09 मार्च 2025: रमुआपुर निवासी हरीनरायन (55) घायल।
13 अप्रैल 2025: बानो (22) पत्नी खलीक, धौरहरा घायल।
23 मई 2025: सिंगावर, ईसानगर निवासी हरीश (30) व कालिका (25) घायल।
25 जून 2025: बबुरी भट्ठा पर मिहीलाल (35), रेंजर नृपेंद्र चतुर्वेदी, वन दरोगा राजेश दीक्षित (45), पीआरवी आरक्षी राम सजीवन (37) और जुगनूपुर निवासी इकबाल खां घायल।
23 जुलाई 2025: बैचरी सिंगावर निवासी कालिका प्रसाद घायल।
27 जुलाई 2025: लखनपुरवा निवासी किसान सोबरन लाल (70) को खेत से खींचकर मार डाला।
07 नवंबर 2025: मिलिक निवासी निशा (10) पुत्री कंधई घायल।
31 दिसंबर 2025: मंगरोली निवासी सिराजुद्दीन (65) को हमला कर मार डाला।
10 फरवरी 2026: कन्हैयादीनपुरवा निवासी हरीनरायन (60) और उनकी पत्नी हेमलता (55) घायल।
07 जून 2026: रायपुर, ईसानगर निवासी शुभम (6) की मौत।