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Lakhimpur Kheri News: सोने नहीं दे रहा भयावह मंजर... चौंककर उठ पड़ती है प्रीति

Fri, 05 Jul 2024 02:01 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jul 2024 02:01 AM IST
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The horrifying scene is not letting me sleep... Preeti wakes up with a startle.
हाथरस घटना के बाद भोलेबाबा के आश्रम में पड़ा ताला। संवाद
अमीरनगर। हाथरस हादसे में दादी यशोदा को गंवाने वाली मोहम्मदी कोतवाली के बहादुरगंज गांव निवासी 12 वर्षीय प्रीती भगदड़ के भयावह दृश्य को यादकर सिहर उठती है। डरावना मंजर उसे सोने नहीं दे रहा है। वह चौंककर उठ पड़ती है। परिवार के लोग उसे संभाल रहे हैं। उधर, मृतका यशोदा के यहां बृहस्पतिवार को भी लोगों का तांता लगा रहा।
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गांव बहादुरगंज निवासी 62 वर्षीय यशोदा अपनी 12 वर्षीय पोती प्रीति, द्वारिका प्रसाद, उपासना तथा रीता के साथ भोलेबाबा के सत्संग में गई थीं। प्रीति के अनुसार, सत्संग समाप्त होने के बाद वे लोग बस की तरफ जा रहे थे। तभी अचानक भगदड़ मच गई। वह दादी से बिछड़ गई। तलाश करने पर दादी का पता चला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
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लाशों के बीच उसने साड़ी से दादी की पहचान की। बुधवार की शाम यशोदा का अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन पोती प्रीति उस भयावह हादसे को भूल नहीं पा रही है। वह पूरे दिन गुमसुम बनी रही। उसकी आंखों के सामने घटित हुआ या हादसा उसे रात में सोने नहीं दे रहा। पीड़ित परिवार के घर में बृहस्पतिवार को भी चूल्हा नहीं जला। गांव में मातम पसरा है।
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फोटो-49
सुंदरवल आश्रम में ताला, सेवादार गायब
महेवागंज। हाथरस के सिकंदराराऊ थाना इलाके में भाेलेबाबा के सत्संग में भगदड़ की घटना के बाद उनके सुंदरवल कस्बे में बने आश्रम से चहल पहल नदारद है। आश्रम के मुख्य गेट पर ताला पड़ा है। सेवादार गायब हो गए हैं।
जिले में बाबा साकार हरि उर्फ सूरज पाल के कई अनुयायी हैं। हाथरस हादसे का शोर फैलते ही बाबा के सुंदरवल स्थित आश्रम में सन्नाटा पसर गया है। लोगों का कहना है कि हाथरस कांड से पहले आश्रम में प्रार्थना और घंटे-घड़ियाल का शोर सुनाई देता था। घटना के बाद इक्का दुक्का अनुयायी बाबा के आश्रम पर पहुंचे तो गेट पर ताला लगा देख मायूस होकर लौट गए।

ग्रामीणों के अनुसार हाथरस कांड के बाद से स्थानीय सत्संग और चहल पहल पर असर पड़ा है। अनुयायियों का मानना है कि बाबा के चरणों की धूल से इंसान को सभी बीमारियों से निजात मिल जाती है। बृहस्पतिवार को एक महिला ऑटो से उतर कर आश्रम के मुख्य द्वार पर पहुंची। गेट बंद देख उसने सड़क पर ही माथा टेका। संवाद


सप्ताह और माह में होता है सत्संग

जानकार बताते हैं कि आश्रम की देखभाल और ट्रस्ट से जुड़े लोग हर सप्ताह छोटे और महीने में बड़े सत्संग का आयोजन करते हैं। वर्ष में एक बार सालाना उत्सव भी होता है। इसमें बाबा और माता जी का आगमन होता है। हजारों की संख्या में लोग जुटते हैं। बीमार और पीड़ितों को अमृत जल और चरणों की धूल मिलती थी। हाथरस हादसे के बाद से यहां सन्नाटा पसरा है।

हाथरस घटना के बाद भोलेबाबा के आश्रम में पड़ा ताला। संवाद

हाथरस घटना के बाद भोलेबाबा के आश्रम में पड़ा ताला। संवाद

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