{"_id":"efdce6415811d630efdf96ab13aa483d","slug":"the-family-is-an-example-of-loyalty-hornbill-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"परिवार के प्रति वफादारी की मिसाल है हार्नबिल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परिवार के प्रति वफादारी की मिसाल है हार्नबिल
बांकेगंज
Updated Sat, 23 May 2015 07:57 PM IST
विज्ञापन
मानव के लिए प्रकृति से बड़ा शिक्षक दूसरा नहीं है। तमाम जीव-जन्तुओं का व्यवहार मानव जीवन के लिए भी आदर्श बनता है। पिता, पति अथवा घर का मुखिया कैसा हो, हार्नबिल पक्षी का स्वभाव इसका आदर्श है। यह पक्षी देखने में जितना सुंदर है, उससे अधिक सुंदर होता है उसका दिल। अपनी मादा साथी और बच्चों के लिए उसका प्यार देखते ही बनता है। प्रजनन काल में मादा को अंडे देने के लिए नर खुद घोंसला बनाता है। वह इसमें खाने-पीने की चीजें जुटाता है। बड़े होने तक बच्चों और मादा की पूरी देखभाल भी करता है।
सर्दियों में प्रजनन
मादा हार्नबिल सर्दियों में प्रजनन करती है। गर्भावस्था से पहले ही नर मादा के लिए जंगल में किसी सुरक्षित पेड़ में ऊंचाई पर अपनी नुकीली चोंच और पंजों से गद्दानुमा घोंसला बनाकर उसी के अंदर बैठा देता है। गड्ढे के खुले स्थान को तालाब की चिकनी मिट्टी का लेप लगाकर बंद कर देता है। इससे पहले वह उसमें उसके खाने के लिए वस्तुएं रखना नहीं भूलता और जरूरत पर भोजन पानी देने के लिए चोंच भर का सुराख खुला रखता है। मादा इसी में अंडे देती है और बच्चों को पालती है। जब तक बच्चे उड़ने लायक नहीं हो जाते उनके और उनकी मां के लिए नर पक्षी ही भोजन जुटाने की जिम्मेदारी निभाता है।
बेहद खूबसूरत होता है हार्नबिल
दक्षिण खीरी वन प्रभाग, दुधवा और किशनपुर सेंक्च्युरी में दिखाई पड़ने वाले नर हार्नबिल 89 से 130 सेंटीमीटर तक होते है, मादा कुछ छोटी होती है। इनकी 54 प्रजातियां पाईं जाती हैं। इसमें तराई के जंगलों में तीन प्रजातियां ग्रे, पाइड और ग्रेट इंडियन पाइड हार्नबिल। इनकी चोंच पीली और खूबसूरत होती है। इसका जुलेजिकल नाम एलब्रोस्टिस एन्थ्रास है। यह पक्षी तराई, पहाड़ी या समुद्री क्षेत्रों के किनारे रहना पसंद करते हैं। हार्नबिल की सुंदर चोंच को आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों के लोग पगड़ी की कलंगी के रूप में लगाते है।
विज्ञापन
पंख ही दुश्मन...
हार्नबिल के पंख बड़े होते हैं। उड़ते समय तेज आवाज होती है। ये पेड़ों में भी छुप नहीं पाते। सबकी नजर में आ जाते हैं।
पेड़ों का कटान रुके और संरक्षण मिले
पूर्व सदस्य उप्र. वन्यजीव सलाहकार परिषद डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि हार्नबिल पक्षियों के संरक्षण के लिए जंगलों और मैदानी इलाकों में ऊंचे पेड़ों का कटान रुकना बहुत जरूरी है। यदि इन्हें संरक्षित करने का प्रयास नहीं किया गया तो आने वाले कुछ सालों में इस खूबसूरत पक्षी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
डीएफओ साउथ और वीके सिंह, डीडी, दुधवा नेशनल पार्क नीरज कुमार ने बताया कि हार्नबिल पक्षियों के संरक्षण के प्रति वन विभाग और दुधवा नेशनल पार्क पूरी तरह संवेदनशील और सतर्क है। झीलों, तालाबों और ऊंचे पेड़ों की लगातार निगरानी कराई जा रही है।
विज्ञापन
सर्दियों में प्रजनन
मादा हार्नबिल सर्दियों में प्रजनन करती है। गर्भावस्था से पहले ही नर मादा के लिए जंगल में किसी सुरक्षित पेड़ में ऊंचाई पर अपनी नुकीली चोंच और पंजों से गद्दानुमा घोंसला बनाकर उसी के अंदर बैठा देता है। गड्ढे के खुले स्थान को तालाब की चिकनी मिट्टी का लेप लगाकर बंद कर देता है। इससे पहले वह उसमें उसके खाने के लिए वस्तुएं रखना नहीं भूलता और जरूरत पर भोजन पानी देने के लिए चोंच भर का सुराख खुला रखता है। मादा इसी में अंडे देती है और बच्चों को पालती है। जब तक बच्चे उड़ने लायक नहीं हो जाते उनके और उनकी मां के लिए नर पक्षी ही भोजन जुटाने की जिम्मेदारी निभाता है।
विज्ञापन
बेहद खूबसूरत होता है हार्नबिल
दक्षिण खीरी वन प्रभाग, दुधवा और किशनपुर सेंक्च्युरी में दिखाई पड़ने वाले नर हार्नबिल 89 से 130 सेंटीमीटर तक होते है, मादा कुछ छोटी होती है। इनकी 54 प्रजातियां पाईं जाती हैं। इसमें तराई के जंगलों में तीन प्रजातियां ग्रे, पाइड और ग्रेट इंडियन पाइड हार्नबिल। इनकी चोंच पीली और खूबसूरत होती है। इसका जुलेजिकल नाम एलब्रोस्टिस एन्थ्रास है। यह पक्षी तराई, पहाड़ी या समुद्री क्षेत्रों के किनारे रहना पसंद करते हैं। हार्नबिल की सुंदर चोंच को आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों के लोग पगड़ी की कलंगी के रूप में लगाते है।
विज्ञापन
पंख ही दुश्मन...
हार्नबिल के पंख बड़े होते हैं। उड़ते समय तेज आवाज होती है। ये पेड़ों में भी छुप नहीं पाते। सबकी नजर में आ जाते हैं।
पेड़ों का कटान रुके और संरक्षण मिले
पूर्व सदस्य उप्र. वन्यजीव सलाहकार परिषद डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि हार्नबिल पक्षियों के संरक्षण के लिए जंगलों और मैदानी इलाकों में ऊंचे पेड़ों का कटान रुकना बहुत जरूरी है। यदि इन्हें संरक्षित करने का प्रयास नहीं किया गया तो आने वाले कुछ सालों में इस खूबसूरत पक्षी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
डीएफओ साउथ और वीके सिंह, डीडी, दुधवा नेशनल पार्क नीरज कुमार ने बताया कि हार्नबिल पक्षियों के संरक्षण के प्रति वन विभाग और दुधवा नेशनल पार्क पूरी तरह संवेदनशील और सतर्क है। झीलों, तालाबों और ऊंचे पेड़ों की लगातार निगरानी कराई जा रही है।