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Lakhimpur Kheri News: अहिराना में दर-दर भटकने को मजबूर कटान पीड़ित
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रामनरेश कटान पीड़ित मंजरी निवासी
महेवागंज। शारदा नदी में उफान कम हो गया है। माना जा रहा था कि नदी भू कटान में तेजी दिखाएगी। मगर इससे उलट नदी के तेवर ढीले पड़ गए। चौबीस घंटे में भू कटान नही हुआ।
हालांकि अहिराना में अब कटने के लिए कुछ बाकी भी नही रहा। नदी पहले ही सब उजाड़ ले गई। सैकड़ों लोग खुले आसमान में आ गये। सिर छुपाने के लिए लोग दर दर भटक रहे हैं। सड़क और तटबंध किनारे बसेरा डाले है।
सदर तहसील से करदइया मानपुर का मजरा अहिराना, मंझरी और निघासन से जुड़े ग्रंट 12 गांव में शारदा नदी ने सब कुछ तबाह कर दिया है। सैकड़ो लोग बेघर हो गए हैं। इस विपदा में नाते रिश्तेदारो ने हाथ बढ़ाए तो लोगों की तकलीफ कुछ कम हुई। मजदूरी कर लोग दिन गुजार रहे हैं मगर अधिकांश को सिर छुपाने के लिए जमीन मिलने का इंतजार है।
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मंझरी के रामनरेश ने बताया कि नदी में मकान और ढाई बीघा कृषि भूमि चली गई। जिंदगी सड़क पर आ गई। प्रशासन से कोई मदद न मिलने से छह बच्चों को लिए दर-दर भटक रहे है। जबकि, राम अवतार ने बताया कि सड़क पर जीवन गुजार रहे है। दो एकड़ खेती और मकान सब नदी समेट ले गई। तटबंध पर अस्थायी झोपड़ी डाल कर रहते हैं।
प्रशासन की ओर से तीन बार में 56 लोगों को बसाया गया। हमारा भी घर कट गया। तीनों बार लिस्ट में हमारा नाम गायब कर दिया गया। प्रति परिवार ढाई डिसमिल जगह दी गई है। कहा कि सैकड़ों लोग अब भी जमीन की तलाश में दिन काट रहे हैं। राजस्व कर्मियों का दावा है कि जिनके घर पहले कटे हैं, उन्हे पहले बसाने का प्रयास किया जा रहा है।
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हालांकि अहिराना में अब कटने के लिए कुछ बाकी भी नही रहा। नदी पहले ही सब उजाड़ ले गई। सैकड़ों लोग खुले आसमान में आ गये। सिर छुपाने के लिए लोग दर दर भटक रहे हैं। सड़क और तटबंध किनारे बसेरा डाले है।
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सदर तहसील से करदइया मानपुर का मजरा अहिराना, मंझरी और निघासन से जुड़े ग्रंट 12 गांव में शारदा नदी ने सब कुछ तबाह कर दिया है। सैकड़ो लोग बेघर हो गए हैं। इस विपदा में नाते रिश्तेदारो ने हाथ बढ़ाए तो लोगों की तकलीफ कुछ कम हुई। मजदूरी कर लोग दिन गुजार रहे हैं मगर अधिकांश को सिर छुपाने के लिए जमीन मिलने का इंतजार है।
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मंझरी के रामनरेश ने बताया कि नदी में मकान और ढाई बीघा कृषि भूमि चली गई। जिंदगी सड़क पर आ गई। प्रशासन से कोई मदद न मिलने से छह बच्चों को लिए दर-दर भटक रहे है। जबकि, राम अवतार ने बताया कि सड़क पर जीवन गुजार रहे है। दो एकड़ खेती और मकान सब नदी समेट ले गई। तटबंध पर अस्थायी झोपड़ी डाल कर रहते हैं।
प्रशासन की ओर से तीन बार में 56 लोगों को बसाया गया। हमारा भी घर कट गया। तीनों बार लिस्ट में हमारा नाम गायब कर दिया गया। प्रति परिवार ढाई डिसमिल जगह दी गई है। कहा कि सैकड़ों लोग अब भी जमीन की तलाश में दिन काट रहे हैं। राजस्व कर्मियों का दावा है कि जिनके घर पहले कटे हैं, उन्हे पहले बसाने का प्रयास किया जा रहा है।

रामनरेश कटान पीड़ित मंजरी निवासी