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Lakhimpur Kheri News: 210 साल से जहां लगता है दशहरा मेला, उसी मैदान पर कब्जे का आरोप
Sat, 03 Oct 2026 01:16 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 03 Oct 2026 01:16 AM IST
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धौरहरा। दशहरा मेला मैदान पर कब्जे के प्रयास का आरोप लगा है। ग्रामीणों के मुताबिक, राजा रंजीत सिंह के वंशजों ने पारिवारिक बंटवारे का हवाला देकर मैदान में पिलर लगाए। विरोध के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पिलर हटवा दिए।
ग्रामीणों के अनुसार, ईसानगर के दशहरा मेला मैदान में तत्कालीन जांगड़ा राजा रंजीत सिंह ने करीब 210 वर्ष पहले मेले की शुरुआत कराई थी। तभी से यहां दशहरा मेले का आयोजन होता आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि हल्का लेखपाल ने रामलीला एवं दशहरा मेला मैदान की भूमि को घरौनी के रूप में दर्ज करने संबंधी फर्जी रिपोर्ट लगाई है। उन्होंने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
बृहस्पतिवार को कस्बे के हजारों ग्रामीणों ने बैठक कर मेला मैदान को कब्जामुक्त रखने का सामूहिक निर्णय लिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह किसी व्यक्ति विशेष की निजी भूमि नहीं, बल्कि वर्षों से सार्वजनिक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का स्थल है। उन्होंने प्रशासन से राजस्व अभिलेखों की जांच और मैदान की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
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बैठक में सरवन शुक्ला, श्रीकांत मिश्र, आकाश त्रिवेदी, रामकिशोर मिश्र, राजा सिद्दीकी, जगदीश शुक्ला, सोनेलाल मिश्र, रामगोपाल गुप्ता, राममिलन गुप्ता, बाबूराम भार्गव और रामपाल लोधी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
लेखपाल पर फर्जी रिपोर्ट लगाने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि हल्का लेखपाल ने मेला मैदान की भूमि को घरौनी में दर्ज करने संबंधी रिपोर्ट लगाई। उन्होंने रिपोर्ट की जांच कर संबंधित लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
-- -- -- -- -- -- -वर्तमान में मेला मैदान अभिलेखों में दर्ज न होने के कारण 2021 के ड्रोन सर्वे में जिसके नाम भूमि दर्ज थी, घरौनी जारी हो गई। यदि मेला मैदान है तो ग्राम प्रधान प्रस्ताव भेजें, संशोधन हो जाएगा।
-आदित्य विशाल, तहसीलदार
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ग्रामीणों के अनुसार, ईसानगर के दशहरा मेला मैदान में तत्कालीन जांगड़ा राजा रंजीत सिंह ने करीब 210 वर्ष पहले मेले की शुरुआत कराई थी। तभी से यहां दशहरा मेले का आयोजन होता आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि हल्का लेखपाल ने रामलीला एवं दशहरा मेला मैदान की भूमि को घरौनी के रूप में दर्ज करने संबंधी फर्जी रिपोर्ट लगाई है। उन्होंने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
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बृहस्पतिवार को कस्बे के हजारों ग्रामीणों ने बैठक कर मेला मैदान को कब्जामुक्त रखने का सामूहिक निर्णय लिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह किसी व्यक्ति विशेष की निजी भूमि नहीं, बल्कि वर्षों से सार्वजनिक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का स्थल है। उन्होंने प्रशासन से राजस्व अभिलेखों की जांच और मैदान की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
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बैठक में सरवन शुक्ला, श्रीकांत मिश्र, आकाश त्रिवेदी, रामकिशोर मिश्र, राजा सिद्दीकी, जगदीश शुक्ला, सोनेलाल मिश्र, रामगोपाल गुप्ता, राममिलन गुप्ता, बाबूराम भार्गव और रामपाल लोधी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
लेखपाल पर फर्जी रिपोर्ट लगाने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि हल्का लेखपाल ने मेला मैदान की भूमि को घरौनी में दर्ज करने संबंधी रिपोर्ट लगाई। उन्होंने रिपोर्ट की जांच कर संबंधित लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
-आदित्य विशाल, तहसीलदार