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भाकपा माले ने मार्च निकाला
लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 08 Jun 2015 06:33 PM IST
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भाकपा माले के हजारों कार्यकर्ताओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ रेलवे स्टेशन से कोतवाली रोड होते हुए नसीरुद्दीन मौजी भवन तक नारेबाजी करते हुए मार्च निकाला। भाकपा माले कार्यकर्ता भूमि अधिग्रहण बिल वापस लेने और बाढ़ कटान पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग कर रहे थे। नसीरुद्दीन मौजी भवन पहुंचकर यह मार्च सभा में तब्दील हो गया। सभा को पार्टी के कई नेताओं ने संबोधित किया।
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले केंद्रीय कमेटी सदस्य कृष्णा अधिकारी ने कहा कि देश और प्रदेश में सांप्रदायिक कॉरपोरेट कंपनी की स्थापना हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश और नदी कटान से किसानों की फसलें नष्ट हो गईं। कर्ज में डूबे किसानों की या तो सदमे से मौत हो रही है या वे आत्महत्या कर रहे हैं। चीनी मिलें किसानों का सात अरब 55 करोड़ रुपये दबाए बैठी हैं। दूसरी ओर केंद्र सरकार भूमि अधिग्रहण अध्यादेश ला रही है।
राज्य कमेटी सदस्य क्रांति कुमार सिंह ने कहा कि कर्ज में डूबे किसानों और आपदा पीड़ित किसानों को मरने के लिए बाध्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की आत्महत्याएं इस बात की गवाह हैं कि किसान जान दे सकता है लेकिन जमीन देने को तैयार नहीं है।
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अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष रामदरस ने कहा कि किसानों को जमीन से बेदखल करने के लिए भाजपा और सपा की सरकार ने वन अधिनियम-2006 को रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी किसानों की मांगों के समर्थन में बेमियादी धरने का नेतृत्व करेगी। सभा को खेमस जिलाध्यक्ष राम किशन और जिला सचिव श्रीनाथ ने भी संबोधित किया।
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सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले केंद्रीय कमेटी सदस्य कृष्णा अधिकारी ने कहा कि देश और प्रदेश में सांप्रदायिक कॉरपोरेट कंपनी की स्थापना हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश और नदी कटान से किसानों की फसलें नष्ट हो गईं। कर्ज में डूबे किसानों की या तो सदमे से मौत हो रही है या वे आत्महत्या कर रहे हैं। चीनी मिलें किसानों का सात अरब 55 करोड़ रुपये दबाए बैठी हैं। दूसरी ओर केंद्र सरकार भूमि अधिग्रहण अध्यादेश ला रही है।
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राज्य कमेटी सदस्य क्रांति कुमार सिंह ने कहा कि कर्ज में डूबे किसानों और आपदा पीड़ित किसानों को मरने के लिए बाध्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की आत्महत्याएं इस बात की गवाह हैं कि किसान जान दे सकता है लेकिन जमीन देने को तैयार नहीं है।
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अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष रामदरस ने कहा कि किसानों को जमीन से बेदखल करने के लिए भाजपा और सपा की सरकार ने वन अधिनियम-2006 को रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी किसानों की मांगों के समर्थन में बेमियादी धरने का नेतृत्व करेगी। सभा को खेमस जिलाध्यक्ष राम किशन और जिला सचिव श्रीनाथ ने भी संबोधित किया।