{"_id":"577bf7ed4f1c1b6c117fab19","slug":"the-committee-formed-to-investigate-the-property-dm-ram-vatika","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामवाटिका संपत्ति की जांच को डीएम ने बनाई कमेटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामवाटिका संपत्ति की जांच को डीएम ने बनाई कमेटी
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 05 Jul 2016 11:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- जिला अधिवक्ता संघ की शिकायत पर की कार्रवाई
- कमेटी जांच कर तीन सप्ताह में डीएम को देगी रिपोर्ट
जिला अधिवक्ता संघ के एक प्रतिनिधि मंडल ने डीएम आकाशदीप ने मिलकर धौरहरा स्थित राम वाटिका ट्रस्ट की संपत्ति पर कुछ लोगों द्वारा कब्जे की साजिश किए जाने के बारे में अवगत कराया। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए अतिरिक्त एसडीएम की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी है।
जिला अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधि मंडल ने डीएम को अवगत कराया कि धौरहरा स्थित रामवाटिका मंदिर एक धार्मिक न्यास की संपत्ति है। इसमें जनसामान्य की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं। रामवाटिका मंदिर में गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस के बालकांड और सुंदरकांड की रचना की थी। भोजपत्र पर लिखीं इनकी पांडुलिपियां यहां मौजूद हैं। कुछ वर्ष पहले इस अति पवित्र ग्रंथ को रामाधार मिश्र और उनके पुत्र अपने साथ उठा ले गए तथा लोगों के पूछने पर यह बताया कि सुरक्षा की दृृष्टि से वह इसे घर पर रखे हैं। बालकांड इनके पास सुरक्षित हैं तथा सुंदरकांड दुलही निवासी जागेश्वर प्रसाद के यहां सुरक्षित हैं। तमाम हिंदू धार्मिक जनता की इस अमूल्य धरोहर के दर्शनों से वंचित है।
प्रतिनिधिमंडल ने अवगत कराया कि न्यास के पास पहले करीब चौदह सौ बीघा जमीन थी, जिसको अलग-अलग समय पर इसके व्यवस्थापक बेचते रहे। वर्तमान समय में करीब 13.9750 हेक्टेयर जमीन बची है। इसमें अधिकांश पर वृक्ष लगे हैं। कुछ प्रभावशाली नेता इस भूमि को अपने कब्जे में लेकर हड़पना चाहते है। डीएम से मिलने वाले अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधि मंडल में वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश सक्सेना, चंद्र मोहन सिंह, राकेश मिश्र, केवल कृष्ण और आनंद मोहन त्रिवेदी शामिल रहे।
विज्ञापन
डीएम ने इस भूमि की निगरानी के लिए डिप्टी कलेक्टर इंद्रकांत द्विवेदी की अध्यक्षता में समित का गठन किया है। इसमें तहसीलदार धौरहरा, नीरज कुमार पटेल और जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व रवि प्रताप सिंह को नामित किया है। यह समिति पूरे मामले का अच्छी तरह अध्ययन और स्थलीय निरीक्षण करेगी, दोनों पक्षों को साक्ष्य का अवसर देकर अपनी स्पष्ट और तथ्यात्मक जांच आख्या डीएम को तीन सप्ताह में उपलब्ध कराएंगी।
विज्ञापन
- कमेटी जांच कर तीन सप्ताह में डीएम को देगी रिपोर्ट
जिला अधिवक्ता संघ के एक प्रतिनिधि मंडल ने डीएम आकाशदीप ने मिलकर धौरहरा स्थित राम वाटिका ट्रस्ट की संपत्ति पर कुछ लोगों द्वारा कब्जे की साजिश किए जाने के बारे में अवगत कराया। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए अतिरिक्त एसडीएम की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी है।
जिला अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधि मंडल ने डीएम को अवगत कराया कि धौरहरा स्थित रामवाटिका मंदिर एक धार्मिक न्यास की संपत्ति है। इसमें जनसामान्य की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं। रामवाटिका मंदिर में गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस के बालकांड और सुंदरकांड की रचना की थी। भोजपत्र पर लिखीं इनकी पांडुलिपियां यहां मौजूद हैं। कुछ वर्ष पहले इस अति पवित्र ग्रंथ को रामाधार मिश्र और उनके पुत्र अपने साथ उठा ले गए तथा लोगों के पूछने पर यह बताया कि सुरक्षा की दृृष्टि से वह इसे घर पर रखे हैं। बालकांड इनके पास सुरक्षित हैं तथा सुंदरकांड दुलही निवासी जागेश्वर प्रसाद के यहां सुरक्षित हैं। तमाम हिंदू धार्मिक जनता की इस अमूल्य धरोहर के दर्शनों से वंचित है।
विज्ञापन
प्रतिनिधिमंडल ने अवगत कराया कि न्यास के पास पहले करीब चौदह सौ बीघा जमीन थी, जिसको अलग-अलग समय पर इसके व्यवस्थापक बेचते रहे। वर्तमान समय में करीब 13.9750 हेक्टेयर जमीन बची है। इसमें अधिकांश पर वृक्ष लगे हैं। कुछ प्रभावशाली नेता इस भूमि को अपने कब्जे में लेकर हड़पना चाहते है। डीएम से मिलने वाले अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधि मंडल में वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश सक्सेना, चंद्र मोहन सिंह, राकेश मिश्र, केवल कृष्ण और आनंद मोहन त्रिवेदी शामिल रहे।
विज्ञापन
डीएम ने इस भूमि की निगरानी के लिए डिप्टी कलेक्टर इंद्रकांत द्विवेदी की अध्यक्षता में समित का गठन किया है। इसमें तहसीलदार धौरहरा, नीरज कुमार पटेल और जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व रवि प्रताप सिंह को नामित किया है। यह समिति पूरे मामले का अच्छी तरह अध्ययन और स्थलीय निरीक्षण करेगी, दोनों पक्षों को साक्ष्य का अवसर देकर अपनी स्पष्ट और तथ्यात्मक जांच आख्या डीएम को तीन सप्ताह में उपलब्ध कराएंगी।