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थारू बच्चों को वजीफा दिलाने के नाम पर ठगी
ब्यूरो पलियाकलां।
Updated Mon, 28 Mar 2016 10:50 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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दी गई है बच्चों के अभिभावकों को रसीद
शिक्षाधिकारियों ने कहा कि हो रही है जांच
आदिवासी थारू जनजाति क्षेत्र के गांव पुरैना में छात्र-छात्राओं को प्रधानमंत्री की एक योजना के तहत दो सौ रुपये प्रतिमाह का वजीफा दिलाने के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। थारू बच्चों के अभिभावकों से वजीफे के नाम पर 60-60 रुपये वसूले गए हैं और बाकायदा उनको इसकी रसीद भी दी गई है। शिक्षाधिकारियों का कहना है कि यह पूरी तरह से ठगी का मामला है और इसकी जांच की जा रही है।
पुरैना गांव में होली की छुट्टियों के दौरान कुछ लोग पहुंचे और आदिवासी थारू ग्रामीणों को बताया कि वे प्रधानमंत्री की ओर से सर्व बैंक संपत्ति शिक्षा अभियान के तहत यहां आए हैं। इस योजना में बच्चों को हर माह दो-दो सौ रुपये वजीफा दिया जाना है। उन्होंने अपनी बातों में अभिभावकों को फंसा लिया और उनसे योजना में शामिल होने के नाम पर 60-60 रुपये वसूल लिए और चलते बने। पता किया गया तो स्थानीय स्कूल के लोगों को इसके बारे में कोई भी जानकारी नहीं थी। स्थानीय स्कूल के लोगों ने अधिकारियों को इसकी जानकारी दी तो हड़कंप मच गया और पड़ताल होने लगी। पड़ताल के दौरान अधिकारियों को वे रसीदें भी मिलीं जो अभिभावकों से वसूली की एवज में दी गईं थीं। इन रसीदों में भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार लिखा हुआ था। एबीआरसी अरुण कुमार का कहना है कि इस प्रकार की योजना की उन्हें कोई जानकारी नहीं है और न ही इसके लिए कोई विभागीय आदेश मिला है। शुरुआती दौर में मामला ठगी का है जिसकी जांच शुरू कर दी गई है। उनके मुताबिक ग्रामीण टेगाराम, श्यामकुमार, खोजराम, फूलराम, परदेशू, दिलीप आदि से वसूली की पुष्टि हुई है। इस मामले में खंड शिक्षाधिकारी भरत कुमार वर्मा ने बताया कि बीआरसी के जरिए वजीफे की सूची बीएसए कार्यालय भेजी जाती है और इस तरह से वजीफे के लिए शुल्क लेने का कोई प्रावधान नहीं है। प्रकरण की जांच करवाई जा रही है।
शिक्षाधिकारियों ने कहा कि हो रही है जांच
आदिवासी थारू जनजाति क्षेत्र के गांव पुरैना में छात्र-छात्राओं को प्रधानमंत्री की एक योजना के तहत दो सौ रुपये प्रतिमाह का वजीफा दिलाने के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। थारू बच्चों के अभिभावकों से वजीफे के नाम पर 60-60 रुपये वसूले गए हैं और बाकायदा उनको इसकी रसीद भी दी गई है। शिक्षाधिकारियों का कहना है कि यह पूरी तरह से ठगी का मामला है और इसकी जांच की जा रही है।
पुरैना गांव में होली की छुट्टियों के दौरान कुछ लोग पहुंचे और आदिवासी थारू ग्रामीणों को बताया कि वे प्रधानमंत्री की ओर से सर्व बैंक संपत्ति शिक्षा अभियान के तहत यहां आए हैं। इस योजना में बच्चों को हर माह दो-दो सौ रुपये वजीफा दिया जाना है। उन्होंने अपनी बातों में अभिभावकों को फंसा लिया और उनसे योजना में शामिल होने के नाम पर 60-60 रुपये वसूल लिए और चलते बने। पता किया गया तो स्थानीय स्कूल के लोगों को इसके बारे में कोई भी जानकारी नहीं थी। स्थानीय स्कूल के लोगों ने अधिकारियों को इसकी जानकारी दी तो हड़कंप मच गया और पड़ताल होने लगी। पड़ताल के दौरान अधिकारियों को वे रसीदें भी मिलीं जो अभिभावकों से वसूली की एवज में दी गईं थीं। इन रसीदों में भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार लिखा हुआ था। एबीआरसी अरुण कुमार का कहना है कि इस प्रकार की योजना की उन्हें कोई जानकारी नहीं है और न ही इसके लिए कोई विभागीय आदेश मिला है। शुरुआती दौर में मामला ठगी का है जिसकी जांच शुरू कर दी गई है। उनके मुताबिक ग्रामीण टेगाराम, श्यामकुमार, खोजराम, फूलराम, परदेशू, दिलीप आदि से वसूली की पुष्टि हुई है। इस मामले में खंड शिक्षाधिकारी भरत कुमार वर्मा ने बताया कि बीआरसी के जरिए वजीफे की सूची बीएसए कार्यालय भेजी जाती है और इस तरह से वजीफे के लिए शुल्क लेने का कोई प्रावधान नहीं है। प्रकरण की जांच करवाई जा रही है।
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