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सदाकत की हाजिरी के लिए जारी हुआ वांरट बी
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लखीमपुर खीरी। टेरर फंडिंग के मामले में पुलिस और एटीएस को चकमा देकर बरेली जेल पहुंचे सदाकत किसी तरह जमानत कराकर छूट न जाए, इसलिए एटीएस सक्रिय हो गई है। एटीएस ने बृहस्पतिवार को सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया, जिस पर कोर्ट ने बी वारंट (प्रोड्यूस वारंट) जारी कर दिया। अब एटीएस बरेली की संबंधित कोर्ट और जेल में इस वारंट को दाखिल करेगी।
निघासन में पकड़े गए टेरर फंडिंग के हाईप्रोफाइल मामले में पुलिस और एटीएस को धता देकर पहले मुमताज कोर्ट में हाजिर हो गया था। इसके बाद मोस्ट वांटेड सदाकत भी व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए धोखाधड़ी के एक पुराने केस में जमानत तुड़वाकर बरेली जेल पहुंच गया। सदाकत के चकमा देने को पुलिस महकमे के अधिकारियों को काफी गंभीरता से लिया, बरेली पहुंचे एडीजी एसके माथुर ने इसके पीछे सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी को माना था। इसके बाद एटीएस सतर्क हो गई, ताकि आगे कोई गड़बड़ी न हो जाए। एटीएस के डीएसपी शैलेंद्र सिंह राठौर ने सीजेएम कोर्ट पहुंचकर प्रार्थना पत्र दिया, जिसमें कहा कि बरेली जेल में बंद आरोपी सदाकत उनके (सीजेएम के) समक्ष लंबित टेरर फंडिंग के मामले में आरोपी है, जिसकी रिहाई बरेली जेल से न हो जाए, इसलिए उसे इस केस में भी बंदी बनाया जाना चाहिए। विवेचक की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई के बाद सीजेएम विकास श्रीवास्तव ने आरोपी सदाकत के खिलाफ बी वांरट जारी करने का आदेश दे दिया।
छह नवंबर तक बढ़ी बाकी आरोपियों की न्यायिक हिरासत
संजय अग्रवाल, सलीम सलमानी, एराज अली, उम्मेद अली को निघासन पुलिस ने 11 अक्तूबर को किया था। फहीम और सिराजुद्दीन को एटीएस ने बाद में गिरफ्तार किया था। वहीं कोर्ट में सरेंडर कर जेल पहुंचने वाले डांगा निवासी मुमताज भी सीखचों के पीछे है। एटीएस ने बृहस्पतिवार को इन सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाने के लिए सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। जिस पर कोर्ट ने छह नवंबर तक इन सभी छह आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ा दी है।
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मुमताज के पुलिस रिमांड के लिए नहीं दी अर्जी
जेल में मुमताज पूछताछ से एटीएस के पूरी तरह संतुष्ट न होने की बात सामने आने के बाद माना गया था कि उसे पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा सकती है, लेकिन हाजिर होने की सूचना के छह दिनों बाद भी एटीएस इसके लिए प्रयास नहीं किया। जबकि पुलिस रिमांड के लिए अर्जी दाखिल करने का वक्त निकलता जा रहा है।
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निघासन में पकड़े गए टेरर फंडिंग के हाईप्रोफाइल मामले में पुलिस और एटीएस को धता देकर पहले मुमताज कोर्ट में हाजिर हो गया था। इसके बाद मोस्ट वांटेड सदाकत भी व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए धोखाधड़ी के एक पुराने केस में जमानत तुड़वाकर बरेली जेल पहुंच गया। सदाकत के चकमा देने को पुलिस महकमे के अधिकारियों को काफी गंभीरता से लिया, बरेली पहुंचे एडीजी एसके माथुर ने इसके पीछे सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी को माना था। इसके बाद एटीएस सतर्क हो गई, ताकि आगे कोई गड़बड़ी न हो जाए। एटीएस के डीएसपी शैलेंद्र सिंह राठौर ने सीजेएम कोर्ट पहुंचकर प्रार्थना पत्र दिया, जिसमें कहा कि बरेली जेल में बंद आरोपी सदाकत उनके (सीजेएम के) समक्ष लंबित टेरर फंडिंग के मामले में आरोपी है, जिसकी रिहाई बरेली जेल से न हो जाए, इसलिए उसे इस केस में भी बंदी बनाया जाना चाहिए। विवेचक की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई के बाद सीजेएम विकास श्रीवास्तव ने आरोपी सदाकत के खिलाफ बी वांरट जारी करने का आदेश दे दिया।
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छह नवंबर तक बढ़ी बाकी आरोपियों की न्यायिक हिरासत
संजय अग्रवाल, सलीम सलमानी, एराज अली, उम्मेद अली को निघासन पुलिस ने 11 अक्तूबर को किया था। फहीम और सिराजुद्दीन को एटीएस ने बाद में गिरफ्तार किया था। वहीं कोर्ट में सरेंडर कर जेल पहुंचने वाले डांगा निवासी मुमताज भी सीखचों के पीछे है। एटीएस ने बृहस्पतिवार को इन सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाने के लिए सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। जिस पर कोर्ट ने छह नवंबर तक इन सभी छह आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ा दी है।
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मुमताज के पुलिस रिमांड के लिए नहीं दी अर्जी
जेल में मुमताज पूछताछ से एटीएस के पूरी तरह संतुष्ट न होने की बात सामने आने के बाद माना गया था कि उसे पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा सकती है, लेकिन हाजिर होने की सूचना के छह दिनों बाद भी एटीएस इसके लिए प्रयास नहीं किया। जबकि पुलिस रिमांड के लिए अर्जी दाखिल करने का वक्त निकलता जा रहा है।