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Lakhimpur Kheri News: दूसरे दिन भी निविदा और संविदा कर्मचारियों ने दिया धरना
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गढ़ी पावर हाउस पर धरना देते संविदा बिजली कर्मचारी। संवाद
लखीमपुर खीरी। मांगों को लेकर दूसरे दिन शुक्रवार को भी उत्तर प्रदेश पॉवर काॅरपोरेशन के निविदा व संविदा कर्मचारियों ने शहर के गढ़ी पावर हाउस पर धरना दिया। कर्मचारियों ने मांगें न माने जाने पर सत्याग्रह शुरू करने की रणनीति बनाई। आउटसोर्स कर्मचारियों ने मोबाइल पर एप से फेस अटेंडेंस को लेकर नाराजगी व्यक्त की। धरने के बाद अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन भी सौंपा गया।
जिलाध्यक्ष ध्रुव कुमार मिश्रा ने बताया कि पावर कॉरपोरेशन और उसके सहयोगी संस्थानों द्वारा आउटसोर्सिंग से नियुक्त कर्मचारियों के साथ अनुचित व्यवहार किया जा रहा है। निर्धारित 18,000 रुपये के न्यूनतम मानक वेतन से कम वेतन पर कर्मचारियों को तैनात किया जा रहा है, जो उच्च प्रबंधन के आदेशों का उल्लंघन है। साथ ही 55 वर्ष की आयु पूरी कर चुके कर्मचारियों को सेवा से हटाया जा रहा है, और हटाए गए कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है।
आरोप लगाया कि घायल कर्मचारियों का कैशलेस इलाज नहीं कराया जा रहा और फेशियल अटेंडेंस के नाम पर कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। इन समस्याओं के विरोध में पांच मई को जिला मुख्यालय पर विरोध सभा और सात मई से 33/11 केवीए विद्युत केंद्रों पर सत्याग्रह आंदोलन की घोषणा की।
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संघ ने चेतावनी दी है कि इस आंदोलन के दौरान यदि किसी कर्मचारी को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा या अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मध्यांचल विद्युत वितरण निगम प्रबंधन की होगी। धरने में बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी शामिल हुए।
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जिलाध्यक्ष ध्रुव कुमार मिश्रा ने बताया कि पावर कॉरपोरेशन और उसके सहयोगी संस्थानों द्वारा आउटसोर्सिंग से नियुक्त कर्मचारियों के साथ अनुचित व्यवहार किया जा रहा है। निर्धारित 18,000 रुपये के न्यूनतम मानक वेतन से कम वेतन पर कर्मचारियों को तैनात किया जा रहा है, जो उच्च प्रबंधन के आदेशों का उल्लंघन है। साथ ही 55 वर्ष की आयु पूरी कर चुके कर्मचारियों को सेवा से हटाया जा रहा है, और हटाए गए कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है।
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आरोप लगाया कि घायल कर्मचारियों का कैशलेस इलाज नहीं कराया जा रहा और फेशियल अटेंडेंस के नाम पर कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। इन समस्याओं के विरोध में पांच मई को जिला मुख्यालय पर विरोध सभा और सात मई से 33/11 केवीए विद्युत केंद्रों पर सत्याग्रह आंदोलन की घोषणा की।
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संघ ने चेतावनी दी है कि इस आंदोलन के दौरान यदि किसी कर्मचारी को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा या अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मध्यांचल विद्युत वितरण निगम प्रबंधन की होगी। धरने में बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी शामिल हुए।