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जिला अस्पताल में खुलेगा मल्टीड्रग रजिस्टेंस टीबी सेंटर
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 24 Nov 2016 11:03 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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- महिला और पुरुषों के लिए बनेंगे अलग-अलग वार्ड
टीबी के गंभीर रोगियों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में 12 बेड का एक अलग से मल्टीड्रग रजिस्टेंस टीबी सेंटर (एमडीआर) खोला जाएगा, जिससे टीबी के गंभीर रोगियों को भर्ती करके इन्हें टीबी रोग से छुटकारा दिलाया जा सके। ऐसे रोगियों की देखरेख के लिए अलग से स्टाफ की तैनाती होगी। यह सेंटर डब्ल्यूएचओ के सहयोग से खुलेगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बलबीर सिंह का कहना है कि टीबी रोग लाइलाज नहीं है। यदि समय रहते इसका इलाज शुरू हो जाए, तो इसे पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है। बस जरूरत है इसकी जानकारी होने की। उन्होंने बताया कि ज्यादा दिनों तक इसकी अनदेखी किए जाने पर टीबी रोग प्रतिरोधक हो जाता हैं, जिसके ठीक होने की संभावना कम ही रहती है। ऐसे रोगियों के लिए डब्लयूएचओ की ओर से जिला अस्पताल के ओपीडी को मल्टीड्रग रजिस्टेंस टीबी सेंटर के रूप में तब्दील किया जाएगा, जिस पर करीब 15 लाख की लागत आएगी। उन्होंने बताया कि डब्ल्यूएचओ की एक चार सदस्यीय टीम द्वारा इसका निरीक्षण भी किया जा चुका है। यह सेंटर 12 बेड होगा, जिसमें छह बेड पुरुषों के लिए और छह महिलाओं के लिए होंगे। यहां पर टीबी के गंभीर रोगियों को भर्ती किया जाएगा। ऐसे मरीजों की निरंतर देखरेख करने के साथ ही उन्हें समय से दवाएं दी जाएगी, जिससे जल्द ही मरीज इस रोग से छुटकारा पा सकें। डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि इसके लिए अलग से स्टाफ रखा जाएगा, जिसमें चार नर्स और एक डॉक्टर होगा।
नई बिल्डिंग के तैयार होने के बाद ही बनेगा टीबी सेंटर
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि टीबी सेंटर बनने में अभी नई बिल्डिंग का अड़ंगा है, क्योंकि जब तक नई बिल्डिंग तैयार नहीं हो जाती है तब तक ओपीडी को उसमें शिफ्ट नहीं किया जा सकता है। इस बिल्डिंग के तैयार होते ही ओपीडी उसमें शिफ्ट हो जाएगा और इसे टीबी सेंटर खुल जाएगा।े
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टीबी के गंभीर रोगियों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में 12 बेड का एक अलग से मल्टीड्रग रजिस्टेंस टीबी सेंटर (एमडीआर) खोला जाएगा, जिससे टीबी के गंभीर रोगियों को भर्ती करके इन्हें टीबी रोग से छुटकारा दिलाया जा सके। ऐसे रोगियों की देखरेख के लिए अलग से स्टाफ की तैनाती होगी। यह सेंटर डब्ल्यूएचओ के सहयोग से खुलेगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बलबीर सिंह का कहना है कि टीबी रोग लाइलाज नहीं है। यदि समय रहते इसका इलाज शुरू हो जाए, तो इसे पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है। बस जरूरत है इसकी जानकारी होने की। उन्होंने बताया कि ज्यादा दिनों तक इसकी अनदेखी किए जाने पर टीबी रोग प्रतिरोधक हो जाता हैं, जिसके ठीक होने की संभावना कम ही रहती है। ऐसे रोगियों के लिए डब्लयूएचओ की ओर से जिला अस्पताल के ओपीडी को मल्टीड्रग रजिस्टेंस टीबी सेंटर के रूप में तब्दील किया जाएगा, जिस पर करीब 15 लाख की लागत आएगी। उन्होंने बताया कि डब्ल्यूएचओ की एक चार सदस्यीय टीम द्वारा इसका निरीक्षण भी किया जा चुका है। यह सेंटर 12 बेड होगा, जिसमें छह बेड पुरुषों के लिए और छह महिलाओं के लिए होंगे। यहां पर टीबी के गंभीर रोगियों को भर्ती किया जाएगा। ऐसे मरीजों की निरंतर देखरेख करने के साथ ही उन्हें समय से दवाएं दी जाएगी, जिससे जल्द ही मरीज इस रोग से छुटकारा पा सकें। डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि इसके लिए अलग से स्टाफ रखा जाएगा, जिसमें चार नर्स और एक डॉक्टर होगा।
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नई बिल्डिंग के तैयार होने के बाद ही बनेगा टीबी सेंटर
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि टीबी सेंटर बनने में अभी नई बिल्डिंग का अड़ंगा है, क्योंकि जब तक नई बिल्डिंग तैयार नहीं हो जाती है तब तक ओपीडी को उसमें शिफ्ट नहीं किया जा सकता है। इस बिल्डिंग के तैयार होते ही ओपीडी उसमें शिफ्ट हो जाएगा और इसे टीबी सेंटर खुल जाएगा।े
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