{"_id":"61ddd5eaf0d63a2af3257f15","slug":"talented-youth-making-a-different-identity-in-every-field-lakhimpur-news-bly4722428105","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रतिभा के धनी युवा... हर क्षेत्र में बना रहे अलग पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रतिभा के धनी युवा... हर क्षेत्र में बना रहे अलग पहचान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखीमपुर खीरी। युवा यानी उमंग, तरंग और हौसला। वो जो लीक से हटकर कुछ ऐसा करे और मिसाल बन जाए। जिले में ऐसे ही कुछ ऊर्जावान और प्रतिभावान युवा हैं जो अपनी प्रतिभा के दम पर लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। कोई अच्छी खासी डिग्री छोड़कर खेती किसानी में लगा है। कोई दूसरों की सेहत के लिए एक क्लब की शुरुआत कर देता है। बीता कुछ दौर देश और समाज के लिए काफी तकलीफदेह रहा। कोरोना संक्रमण काल शारीरिक, मानसिक समस्याओं के साथ आर्थिक चुनौतियां भी लेकर आया। युवा वर्ग ने न सिर्फ इनका डटकर मुकाबला किया, बल्कि लॉकडाउन में जरूरतमंदों की मदद के लिए भी सक्रिय रहे। काम धंधा बंद होने से दो वक्त की रोटी के लिए परेशान गरीबों को लंच पैकेट से लेकर राशन तक पहुंचाते रहे। उधर, कोरोना काल में रक्त का अभाव पड़ने होने के बावजूद जरूरतमंदों को रक्त मुहैया कराने के लिए मौजूद रहे।
आदित्य कुमार जिले में सबसे कम उम्र के डीएसपी
आदित्य कुमार गौतम जिले में सबसे युवा पुलिस अधिकारी हैं। अभी अंडर ट्रेनिंग और पुलिस लाइन का चार्ज देख रहे डीएसपी आदित्य कुमार गौतम 2017 बैच के पुलिस अधिकारी हैं। पढ़ाई में इंजीनियरिंग बैक ग्राउंड के रहे आदित्य की सफलता युवाओं के लिए इसलिए भी मिसाल हैं। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग के बाद नौकरी न कर अपना ध्यान पुलिस सेवा पर केंद्रित किया। चौथे प्रयास में उन्हें डीएसपी रैंक मिली। मूल रूप से संतकबीरनगर के रहने वाले आदित्य सिविल सर्विस की परीक्षा दे चुके हैं। वह साक्षात्कार तक भी पहुंचे थे।
आदित्य बताते हैं कि पिता सरकारी नौकरी में हैं और माता गृहिणी हैं। परिवार में एक भाई और एक बहन हैं। उनकी खीरी में पहली पोस्टिंग है और वह नवंबर से यहां ट्रेनिंग पर हैं। अभी वह पुलिस लाइन का चार्ज संभाल रहे हैं। इससे पहले वह मितौली सर्किल का कार्यवाहक के तौर पर काम देख रहे थे।
विज्ञापन
29 साल के ट्रेनी सीओ आदित्य पुलिस सेवाओं में अपनी प्राथमिकता के बारे में बताते हैं कि अभी तो सीखना और ट्रेनिंग पूरी करनी है। लेकिन सीओ स्तर पर एससी एसटी और दहेज हत्या की विवेचना को वह ईमानदारी और गंभीरतापूर्वक करना चाहते हैं।
लखीमपुर साइक्लिंग क्लब बनाकर लोगों को सेहत के लिए कर रहे जागरूक
लखीमपुर निवासी अजय मिश्रा साइक्लिंग क्लब बनाकर लोगों को सेहत के लिए जागरूक कर रहे हैं। दो साल पहले दो चार लोगों से शुरू हुआ उनका सफर आज अच्छे मुकाम पर है। तीन महिलाओं समेत 25 लोग उनके क्लब से रोजाना कई किलोमीटर की साइक्लिंग कर रहे हैं।
खंडीय लेखाधिकारी के तौर पर कार्यरत अजय मिश्रा बताते हैं कि कोरोना की पहली लहर के दौरान इम्युनिटी शब्द काफी चर्चित रहा। इस दौरान लोगों को सेहत का महत्व समझ आया। इसलिए 2020 में उन्होंने अपने दोस्त नवनीत सिंह अजमानी और कुछ और दोस्तों के साथ साइक्लिंग का प्रयोग शुरू किया। इसके बाद में लोग जुड़ते गए। वह बताते हैं कि खीरी जैसे छोटे शहर में ऐसा क्लब आसान नहीं था लेकिन सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार से लोगों का अच्छा रिस्पॉंस मिला और लोग सेहत के लिए क्लब से जुड़कर साइक्लिंग करने लगे। अजय बताते हैं कि इसके अलावा वह समय समय पर कई इवेंट को भी प्रमोट करते हैं। वर्ल्ड कार डे पर क्लब से जुड़कर करीब 100 लोगों ने 20 किलोमीटर तक साइक्लिंग की थी। इसी दिन उन्होंने इस क्लब का लोगो लांच किया था। अजय बताते हैं कि फेसबुक पर पेज को महज फॉलो करके कोई भी इस क्लब का सदस्य बन सकता है।
अपनी मिट्टी से जुड़कर कुछ करने की ललक ने बनाया प्रयोग धर्मी
बायोटेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग करने के बाद प्रेरणा लाल अच्छी नौकरी के तमाम अवसर छोड़कर खेती में नए प्रयोग कर युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गईं हैं। वह सहजन, एलोवेरा, केला समेत औषधीय वनस्पतियों की खेती करने के साथ उन्नत ढंग से नींबू की खेती का अनूठा प्रयोग कर रहीं है। उनका कहना है कि नींबू की खेती किसानों को अच्छे मुनाफे की राह दिखाएगी।
बांकेगंज कस्बा निवासी दिवंगत प्रेम बिहारी लाल सिन्हा की इकलौती पुत्री प्रेरणा लाल ने वर्ष 2009 में बंगलुरु से बायोटेक्नोलॉजी में डिग्री हासिल करने के बाद दो बड़ी बायोटेक कंपनियों में नौकरी की। लेकिन अपनी मिट्टी से जुड़कर कुछ नया करने ललक प्रेरणा लाल को फिर बांकेगंज खींच लाई। उनके पिता प्रेम बिहारी लाल बड़े फार्मर थे। उनसे जुड़कर उन्होंने खेती में नित नए प्रयोग करने शुरू किए। उन्होंने केले की खेती को नए आयाम देने के बाद सहजन, एलोवेरा की खेती की। यही नहीं मलेरिया रोधी औषधीय वनस्पति (आर्टीमीसिया) की खेती कर यहां के किसानों को एक नई राह दिखाई। इसके बाद और भी नया करने की ललक ने उन्हें नींबू की खेती करने के लिए प्रेरित किया। कोरोना काल में नींबू की बढ़ी डिमांड ने उन्हें यह रास्ता दिखाया। उन्होंने वर्ष 2020 में देहरादून से पौध लगाकर यहां सात एकड़ में नींबू की खेती शुरू की। अब नींबू की फसल तैयार होने को है। आमतौर से पहाड़ी इलाके में होने वाली नींबू की प्रजाति बांकेगंज में फल-फूल रही है। नींबू की खेती से प्रेरणा लाल ने क्षेत्र के युवा किसानों को एक नई प्रेरणा दी है। खेती करने के साथ ही उन्होंने डिग्री हासिल की। इन दिनों वह इंजीनियरिंग छात्रों को ऑनलाइन कोचिंग भी दे रही हैं
लॉकडाउन में निराश्रित गोवंश एवं बंदरों को दी खाने की सामग्री
कोरोना काल में जहां लोग संक्रमण से बचने के लिए घर से निकलने में बचते थे। वहीं मोहल्ला श्रीराम नगर कॉलोनी निवासी अनुराग मौर्य सड़कों पर घूम रहे निराश्रित पशुओं से लेकर बंदरों के लिए पशु आहार सेवा शुरू की। पशुओं के लिए मंडी से हरी सब्जियां, बरसीम आदि लाते तो वहीं बंदरों के लिए चना भिगोते। इसके बाद शहर में घूमकर जानवरों का हरी सब्जियां और बंदरों को चना खिलाते।
कई साल से रोजाना जरूरतमंदों तक पहुंचा रहे भोजन
भले ही भीषण ठंड पड़ रही हो या फिर बारिश हो रही हो। मगर, सुंदरपुरम निवासी शैलेश बरनवाल का जरूरतमंदों को भोजन मुहैया कराना निरंतर जारी रहा। शैलेश बताते हैं कि पिछले कई साल से अस्पताल में भर्ती मरीज और उनके तीमारदारों के साथ रोडवेज बस अड्डा व रेलवे स्टेशन पर रहने वाले निराश्रितों को दलिया से लेकर नि:शुल्क भोजन मुहैया कराया जा रहा है।
कोरोना काल में जरूरतमंदों को दिया सैनिटाइजर व मास्क
मोहल्ला संकटा देवी निवासी शुभम गुप्ता ने कोरोना संक्रमण काल में लोगों को कोविड से बचाने का बीड़ा उठाया। जरूरतमंदों को मास्क और सैनिटाइजर बांटना शुरू किया। शुभम बताते हैं कि पलायन करने वालों के पास न तो सैनिटाइजर होता था और न ही मास्क। इसलिए लखनऊ से शीशियां मंगवाकर और घर पर मास्क बनावाकर बांटना शुरू किया।
कोरोना संक्रमण काल में भी जारी रहा रक्तदान
गोला निवासी गुरुदेव शर्मा करीब 15 साल से निरंतर रक्तदान कर रहे हैं। उनका यह सिलसिला कोरोना काल में भी जारी रहा। गुरुदेव शर्मा कहते हैं कि यदि हमारे एक यूनिट रक्त देने से किसी के घर में खुशियां आ जाती है तो इससे बढ़कर और कोई दान नहीं है। शिविर चाहे शहर में लगे या फिर जिले पर रक्तदान करने जाता जरूर हूं। इसके अलावा भी जरूरतमंद करता रहता हूं।
बुलावा आने पर करने पहुंच जाता हूं रक्तदान
रक्तदान को लेकर हर समय तत्पर रहने वाले संकटा देवी निवासी रामजी पुरी बताते हैं कि रक्तदान से किसी की जान बचने के साथ शरीर को भी स्वस्थ रखा जा सकता है। पिछले करीब 10 साल से रक्तदान करता आ रहा हूं। अब तक 17-18 बार रक्तदान कर चुका हूं। जरूरतमंदों की जान बचाने के लिए ब्लड बैंक में नंबर तक दे रखा है।
जिला ताइक्वांडो चैंपियनशिप में जीता गोल्ड
स्नातक तृतीय वर्ष की छात्रा प्रियांशी दीक्षित ने हाल ही में जिला ताइक्वांडो चैंपियनशिप सीनियर वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन किया है। इसमें कई जिलों के लोगों ने प्रतिभाग किया था। प्रियांशी ने बताया कि एक बार कॉलेज में ताइक्वांडो शिविर लगा। इससे सीखने की चाह बढ़ी। आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट बेहद जरूरी है। हर छात्रा को इसे सीखना चाहिए।
विज्ञापन
आदित्य कुमार जिले में सबसे कम उम्र के डीएसपी
आदित्य कुमार गौतम जिले में सबसे युवा पुलिस अधिकारी हैं। अभी अंडर ट्रेनिंग और पुलिस लाइन का चार्ज देख रहे डीएसपी आदित्य कुमार गौतम 2017 बैच के पुलिस अधिकारी हैं। पढ़ाई में इंजीनियरिंग बैक ग्राउंड के रहे आदित्य की सफलता युवाओं के लिए इसलिए भी मिसाल हैं। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग के बाद नौकरी न कर अपना ध्यान पुलिस सेवा पर केंद्रित किया। चौथे प्रयास में उन्हें डीएसपी रैंक मिली। मूल रूप से संतकबीरनगर के रहने वाले आदित्य सिविल सर्विस की परीक्षा दे चुके हैं। वह साक्षात्कार तक भी पहुंचे थे।
विज्ञापन
आदित्य बताते हैं कि पिता सरकारी नौकरी में हैं और माता गृहिणी हैं। परिवार में एक भाई और एक बहन हैं। उनकी खीरी में पहली पोस्टिंग है और वह नवंबर से यहां ट्रेनिंग पर हैं। अभी वह पुलिस लाइन का चार्ज संभाल रहे हैं। इससे पहले वह मितौली सर्किल का कार्यवाहक के तौर पर काम देख रहे थे।
विज्ञापन
29 साल के ट्रेनी सीओ आदित्य पुलिस सेवाओं में अपनी प्राथमिकता के बारे में बताते हैं कि अभी तो सीखना और ट्रेनिंग पूरी करनी है। लेकिन सीओ स्तर पर एससी एसटी और दहेज हत्या की विवेचना को वह ईमानदारी और गंभीरतापूर्वक करना चाहते हैं।
लखीमपुर साइक्लिंग क्लब बनाकर लोगों को सेहत के लिए कर रहे जागरूक
लखीमपुर निवासी अजय मिश्रा साइक्लिंग क्लब बनाकर लोगों को सेहत के लिए जागरूक कर रहे हैं। दो साल पहले दो चार लोगों से शुरू हुआ उनका सफर आज अच्छे मुकाम पर है। तीन महिलाओं समेत 25 लोग उनके क्लब से रोजाना कई किलोमीटर की साइक्लिंग कर रहे हैं।
खंडीय लेखाधिकारी के तौर पर कार्यरत अजय मिश्रा बताते हैं कि कोरोना की पहली लहर के दौरान इम्युनिटी शब्द काफी चर्चित रहा। इस दौरान लोगों को सेहत का महत्व समझ आया। इसलिए 2020 में उन्होंने अपने दोस्त नवनीत सिंह अजमानी और कुछ और दोस्तों के साथ साइक्लिंग का प्रयोग शुरू किया। इसके बाद में लोग जुड़ते गए। वह बताते हैं कि खीरी जैसे छोटे शहर में ऐसा क्लब आसान नहीं था लेकिन सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार से लोगों का अच्छा रिस्पॉंस मिला और लोग सेहत के लिए क्लब से जुड़कर साइक्लिंग करने लगे। अजय बताते हैं कि इसके अलावा वह समय समय पर कई इवेंट को भी प्रमोट करते हैं। वर्ल्ड कार डे पर क्लब से जुड़कर करीब 100 लोगों ने 20 किलोमीटर तक साइक्लिंग की थी। इसी दिन उन्होंने इस क्लब का लोगो लांच किया था। अजय बताते हैं कि फेसबुक पर पेज को महज फॉलो करके कोई भी इस क्लब का सदस्य बन सकता है।
अपनी मिट्टी से जुड़कर कुछ करने की ललक ने बनाया प्रयोग धर्मी
बायोटेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग करने के बाद प्रेरणा लाल अच्छी नौकरी के तमाम अवसर छोड़कर खेती में नए प्रयोग कर युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गईं हैं। वह सहजन, एलोवेरा, केला समेत औषधीय वनस्पतियों की खेती करने के साथ उन्नत ढंग से नींबू की खेती का अनूठा प्रयोग कर रहीं है। उनका कहना है कि नींबू की खेती किसानों को अच्छे मुनाफे की राह दिखाएगी।
बांकेगंज कस्बा निवासी दिवंगत प्रेम बिहारी लाल सिन्हा की इकलौती पुत्री प्रेरणा लाल ने वर्ष 2009 में बंगलुरु से बायोटेक्नोलॉजी में डिग्री हासिल करने के बाद दो बड़ी बायोटेक कंपनियों में नौकरी की। लेकिन अपनी मिट्टी से जुड़कर कुछ नया करने ललक प्रेरणा लाल को फिर बांकेगंज खींच लाई। उनके पिता प्रेम बिहारी लाल बड़े फार्मर थे। उनसे जुड़कर उन्होंने खेती में नित नए प्रयोग करने शुरू किए। उन्होंने केले की खेती को नए आयाम देने के बाद सहजन, एलोवेरा की खेती की। यही नहीं मलेरिया रोधी औषधीय वनस्पति (आर्टीमीसिया) की खेती कर यहां के किसानों को एक नई राह दिखाई। इसके बाद और भी नया करने की ललक ने उन्हें नींबू की खेती करने के लिए प्रेरित किया। कोरोना काल में नींबू की बढ़ी डिमांड ने उन्हें यह रास्ता दिखाया। उन्होंने वर्ष 2020 में देहरादून से पौध लगाकर यहां सात एकड़ में नींबू की खेती शुरू की। अब नींबू की फसल तैयार होने को है। आमतौर से पहाड़ी इलाके में होने वाली नींबू की प्रजाति बांकेगंज में फल-फूल रही है। नींबू की खेती से प्रेरणा लाल ने क्षेत्र के युवा किसानों को एक नई प्रेरणा दी है। खेती करने के साथ ही उन्होंने डिग्री हासिल की। इन दिनों वह इंजीनियरिंग छात्रों को ऑनलाइन कोचिंग भी दे रही हैं
लॉकडाउन में निराश्रित गोवंश एवं बंदरों को दी खाने की सामग्री
कोरोना काल में जहां लोग संक्रमण से बचने के लिए घर से निकलने में बचते थे। वहीं मोहल्ला श्रीराम नगर कॉलोनी निवासी अनुराग मौर्य सड़कों पर घूम रहे निराश्रित पशुओं से लेकर बंदरों के लिए पशु आहार सेवा शुरू की। पशुओं के लिए मंडी से हरी सब्जियां, बरसीम आदि लाते तो वहीं बंदरों के लिए चना भिगोते। इसके बाद शहर में घूमकर जानवरों का हरी सब्जियां और बंदरों को चना खिलाते।
कई साल से रोजाना जरूरतमंदों तक पहुंचा रहे भोजन
भले ही भीषण ठंड पड़ रही हो या फिर बारिश हो रही हो। मगर, सुंदरपुरम निवासी शैलेश बरनवाल का जरूरतमंदों को भोजन मुहैया कराना निरंतर जारी रहा। शैलेश बताते हैं कि पिछले कई साल से अस्पताल में भर्ती मरीज और उनके तीमारदारों के साथ रोडवेज बस अड्डा व रेलवे स्टेशन पर रहने वाले निराश्रितों को दलिया से लेकर नि:शुल्क भोजन मुहैया कराया जा रहा है।
कोरोना काल में जरूरतमंदों को दिया सैनिटाइजर व मास्क
मोहल्ला संकटा देवी निवासी शुभम गुप्ता ने कोरोना संक्रमण काल में लोगों को कोविड से बचाने का बीड़ा उठाया। जरूरतमंदों को मास्क और सैनिटाइजर बांटना शुरू किया। शुभम बताते हैं कि पलायन करने वालों के पास न तो सैनिटाइजर होता था और न ही मास्क। इसलिए लखनऊ से शीशियां मंगवाकर और घर पर मास्क बनावाकर बांटना शुरू किया।
कोरोना संक्रमण काल में भी जारी रहा रक्तदान
गोला निवासी गुरुदेव शर्मा करीब 15 साल से निरंतर रक्तदान कर रहे हैं। उनका यह सिलसिला कोरोना काल में भी जारी रहा। गुरुदेव शर्मा कहते हैं कि यदि हमारे एक यूनिट रक्त देने से किसी के घर में खुशियां आ जाती है तो इससे बढ़कर और कोई दान नहीं है। शिविर चाहे शहर में लगे या फिर जिले पर रक्तदान करने जाता जरूर हूं। इसके अलावा भी जरूरतमंद करता रहता हूं।
बुलावा आने पर करने पहुंच जाता हूं रक्तदान
रक्तदान को लेकर हर समय तत्पर रहने वाले संकटा देवी निवासी रामजी पुरी बताते हैं कि रक्तदान से किसी की जान बचने के साथ शरीर को भी स्वस्थ रखा जा सकता है। पिछले करीब 10 साल से रक्तदान करता आ रहा हूं। अब तक 17-18 बार रक्तदान कर चुका हूं। जरूरतमंदों की जान बचाने के लिए ब्लड बैंक में नंबर तक दे रखा है।
जिला ताइक्वांडो चैंपियनशिप में जीता गोल्ड
स्नातक तृतीय वर्ष की छात्रा प्रियांशी दीक्षित ने हाल ही में जिला ताइक्वांडो चैंपियनशिप सीनियर वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन किया है। इसमें कई जिलों के लोगों ने प्रतिभाग किया था। प्रियांशी ने बताया कि एक बार कॉलेज में ताइक्वांडो शिविर लगा। इससे सीखने की चाह बढ़ी। आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट बेहद जरूरी है। हर छात्रा को इसे सीखना चाहिए।