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Lakhimpur Kheri News: भारत-नेपाल सीमा का सर्वे कल से, सोनहा से होगी शुरुआत
Sun, 05 Apr 2026 12:20 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sun, 05 Apr 2026 12:20 AM IST
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एसएसबी 39वीं वाहिनी मुख्यालय पर चल रही बैठक। स्रोत: एसएसबी
पलियाकलां। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के सर्वे का कार्य सोमवार से शुरू होगा। एसएसबी 39वीं वाहिनी मुख्यालय पर हुई बैठक में सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने प्रस्ताव रखा कि छह अप्रैल से सीमा चौकी सोनहा के अंतर्गत पिलर संख्या 734/05 से सर्वेक्षण शुरू किया जाए।
इस अभियान से सीमा प्रबंधन मजबूत होगा और विवादित क्षेत्रों की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी। बैठक में एसएसबी की ओर से कमांडेंट रबींद्र कुमार राजेश्वरी, द्वितीय कमान अधिकारी माधवचंद घोष और उपकमांडेंट विजयेंद्र कुमार मौजूद रहे। सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से सर्वेक्षक आत्रेय ज्ञान, आदर्श राय, अमित मौर्य, विकास श्रीवास्तव और विक्रम कुमार शामिल हुए।
बैठक में सीमा स्तंभों के सर्वे, मरम्मत और पुनर्स्थापन को लेकर रणनीति तय की गई। कमांडेंट रबींद्र कुमार राजेश्वरी ने बताया कि नो मैन्स लैंड पर छह ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं, जहां नेपाली नागरिकों द्वारा अतिक्रमण किया गया है और सीमा पिलर गायब हैं, जिससे स्थिति विवादित बनी हुई है।
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सर्वे ऑफ इंडिया की टीम के साथ सहमति बनी कि दोनों देशों के सर्वे विभागों के समन्वय से इन पिलरों को प्राथमिकता के आधार पर पुनर्स्थापित किया जाएगा। साथ ही अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि नदी या झीलों के बीच स्थित पिलरों को भी थल सीमा पिलरों के समान महत्व देते हुए उनके चिह्नीकरण और पुनर्स्थापन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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इस अभियान से सीमा प्रबंधन मजबूत होगा और विवादित क्षेत्रों की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी। बैठक में एसएसबी की ओर से कमांडेंट रबींद्र कुमार राजेश्वरी, द्वितीय कमान अधिकारी माधवचंद घोष और उपकमांडेंट विजयेंद्र कुमार मौजूद रहे। सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से सर्वेक्षक आत्रेय ज्ञान, आदर्श राय, अमित मौर्य, विकास श्रीवास्तव और विक्रम कुमार शामिल हुए।
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बैठक में सीमा स्तंभों के सर्वे, मरम्मत और पुनर्स्थापन को लेकर रणनीति तय की गई। कमांडेंट रबींद्र कुमार राजेश्वरी ने बताया कि नो मैन्स लैंड पर छह ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं, जहां नेपाली नागरिकों द्वारा अतिक्रमण किया गया है और सीमा पिलर गायब हैं, जिससे स्थिति विवादित बनी हुई है।
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सर्वे ऑफ इंडिया की टीम के साथ सहमति बनी कि दोनों देशों के सर्वे विभागों के समन्वय से इन पिलरों को प्राथमिकता के आधार पर पुनर्स्थापित किया जाएगा। साथ ही अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि नदी या झीलों के बीच स्थित पिलरों को भी थल सीमा पिलरों के समान महत्व देते हुए उनके चिह्नीकरण और पुनर्स्थापन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।