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हैरतअंगेज, जेल कर्मियों की लापरवाही या फिर मिलीभगत?
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 01 Nov 2016 11:26 PM IST
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न गेट टूटा, न दीवार...जेल से बंदी गायब, मेन गेट से फरार होने की है आशंका
बंदी के जिला जेल से फरार हो जाने से कड़ी चौकसी का दावा हवाई साबित हुआ है। न जेल का गेट टूटा, न दीवार टूटी और आरोपी मोहन कश्यप जेल के बाहर निकल गया। अब तक यह भी साफ नहीं हो सका है कि बंदी कब और कैसे बाहर निकला? हालांकि जेल प्रशासन मेन गेट के रास्ते उसके फरार होने की आशंका जता रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि मेन गेट से ही वह भागा तो उसे एक-दो नहीं, बल्कि छोटे-बड़े छह गेट पार करने पड़े होंगे तो फिर वह कहीं पकड़ में क्यों नहीं आया। यदि पकड़ा नहीं गया तो कहीं न कहीं मिलीभगत की बात भी रही होगी।
जिला जेल में मुख्य गेट पर शाम छह बजे से 10 बजे तक बंदी रक्षक संतरी वीर सिंह, गेट कीपर योगेंद्र चौधरी तैनात थे। गेट संख्या दो और तीन पर बंदी रक्षक श्याम स्वरूप की ड्यूटी थी, जबकि गेट संख्या चार और पांच पर होमगार्ड सुशील कुमार तैनात था। इसके अलावा सर्किल गेट पर चक्राधिकारी और डिप्टी जेलर मौजूद थे। इसके अलावा सुरक्षा की दृष्टि से बनी डबल मेनवॉल पर भी बंदी रक्षकों का पहरा था। जेल प्रशासन की मानें तो सोमवार को शाम 6.15 बजे गिनती के समय आरोपी मोहन लाइन में देखा गया था। इसके कुछ ही मिनट बाद वह गायब हो गया। डीएम-एसपी और जेल प्रशासन की मानें तो जेल के अंदर कहीं पर कोई ऐेसे निशान नहीं मिले, जिसके सहारे मोहन कश्यप मेनवॉल आदि के सहारे कूदकर भाग निकला हो। इससे यह आशंका प्रबल होती जा रही है कि आरोपी मेन गेट से ही निकला होगा। जेल अधीक्षक भी इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं। तीनों गेटों पर बंदी रक्षकों और सर्किल गेट पर चक्राधिकारी और डिप्टी जेलर की मौजूदगी के बाद भी बंदी के जिला कारागार से फरार हो जाना जेल प्रशासन को सवालों के घेरे में खड़ा कर गया है। इसके अलावा बंदी रक्षकों की भूमिका और नीयत पर सवाल उठने लगे हैं।
एएसपी ने खंगाले पुलिस चौकी के सीसीटीवी फुटेज
जिला जेल के गेट के सामने जेल गेट पुलिस चौकी है। एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी, सीओ सिटी एमपी सिंह और सदर कोतवाल दीपक शुक्ल जेल गेट चौकी पहुंचे और वहां लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाला। एएसपी ने बताया कि पूरे दिन की वीडियो रिकार्डिंग चेक की जा रही है, जो वीडियो रिकार्डिंग अब तक चेक की गई है उसमें फरार बंदी के फुटेज नहीं मिले हैं।
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कई जेल कर्मियों पर गिर सकती है गाज
रेप के बाद बालिका की हत्या का आरोपी मोहन कश्यप के फरार होने के मामले में कई जेल कर्मियों पर गाज गिर सकती है। जेल अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि जिस दिन और जिस समय पर आरोपी फरार होने की जानकारी बंदी रक्षकों ने दी है। उनके बयान लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जांच के बाद जिन जेल कर्मचारियों की लापरवाही उजागर होगी, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
...कहीं दिन में तो ही नहीं भाग निकला मोहन
लखीमपुर खीरी। जेल अधीक्षक विनोद कुमार की माने तो बंदी रक्षकों ने सोमवार की शाम 6.15 बजे फरार आरोपी मोहन कश्यप को लाइन में लगा देखा था। इसके बाद वह गायब हो गया। तुरंत उसकी खोजबीन भी शुरू कर दी। शाम सात बजे सायरन बजाकर पूरी जेल खंगाली गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। यह बात जेल अधीक्षक ने दर्ज कराई गई रिपोर्ट में भी कही है। अब सवाल यह उठता है कि जिस जगह पर बंदी मोहन कश्यप लाइन में था। वहां से उसे छोटे-बड़े मिलाकर कुल छह गेट पार करने थे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि चंद मिनट में आरोपी का छहों गेट पार कर फरार हो जाना किसी के गले नहीं उतर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि ऐसा तो नहीं कहीं बंदी मोहन दिन में मिलाई के समय कहीं भीड़ के साथ ही बंदी रक्षकों के साथ बाहर जाने में सफल तो नहीं हो गया। बहरहाल जो भी हो इस रहस्य पर पड़ा पर्दा आरोपी के पकड़े जाने के बाद ही उठ सकेगा।
फरार बंदी के दिखने की सूचना पर भागी पुलिस, घेराबंदी की
लखीमपुर खीरी। तलाश में लगी जेल के बंदी रक्षकों की टीम को राजापुर रोड़ पर एक मोटर्स शो रूम के पास फरार बंदी मोहन के दिखाई पड़ने की सूचना मिली, जिस पर उस इलाके को घेर लिया गया। सूचना पर एएसपी, सीओ सिटी ने पुलिस बल के साथ घेराबंदी कर खेतों की कांबिग की, लेकिन मौके पर बंदी नहीं मिला, जिस पर पुलिस और जेल अफसर लौट आए।
डीआईजी जेल करेंगे जांच
जेल से बंदी के फरार होने की घटना को आईजी जेल गोपाल मीणा ने गंभीरता से लिया है। उनका कहना है कि मामले की जांच डीआईजी जेल आरपी सिंह को सौंपी गई है। मामले में कोई भी लापरवाही मिली तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
तो मेन गेट से हो चुकी फरारी से भी नहीं लिया सबक!
लखीमपुर खीरी। भले ही जेल प्रशासन सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करे लेकिन तल्ख हकीकत है कि खीरी जेल में मेन गेट से भी दो उम्रकैद की सजा पाए बंदियों की पहले भी फरारी हो चुकी है। मंगलवार की सुबह बंदी मोहन कश्यप की रहस्यमय हालात में फरारी किसी के गले नहीं उतर रही है। सूत्र बताते हैं कि सोमवार की शाम के बाद से बंदी मोहन कश्यप को नहीं देखा गया। कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि इस फरारी के खुलासे के बाद मेन गेट सुर्खियों में आ जाए।
एक ओर भोपाल जेल से फरारी की घटना के बाद पूरे देश में जेलों के लिए सुरक्षा सतर्कता व्यवस्था कड़ी करने के आदेश जारी किए गए हैं, वहीं जिला खीरी से शातिर अपराधी मोहन कश्यप बड़ी आसानी से फरार हो गया, हैरत की बात है कि जेल प्रशासन कैदी के फरार होने के बाद से अब तक इस बात से भी अंजान है कि आखिर मोहन कश्यप ने जेल से फरार होने के लिए कौन सा रास्ता चुना था, और किस समय वह फरार हुआ था।
गौरतलब है कि 29 जुलाई 2014 को सुबह दो उम्रकैद की सजा पाए रवींद्र लोध और अजय तिवारी उर्फ मुनीजर मेन गेट से तमंचा लहराते हुए फरार होने में सफल हो गए थे। इस बड़ी घटना के बाद भी आज तक जेल प्रशासन ने सीख नहीं ली।
तब जेल में पहुंचा था तमंचा
मेन गेट से दोनों उम्र कैद की सजा पाए बंदियों की फरार होने की घटना को अपने तरह से तोड़-मोड़कर पेश कर जेल प्रशासन ने फरार होने वाले बंदियों के पास तमंचा न होने की बात कही थी। क्योंकि अगर जेल प्रशासन हकीकत स्वीकार कर लेता तो उसकी अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो जाता कि आखिर जेल के भीतर कैसे तमंचा पहुंच गया था और घटना से पूर्व तमंचा क्यों जेल प्रशासन की निगाह में नहीं आया। बाद में फरारी के दौरान ही दोनों उम्रकैद की सजा पाए कैदियों ने राहगीर सूरज वर्मा की बाइक तमंचा दिखाकर लूट ली थी। बाद में दोनों बंदी भी पकड़े गए लेकिन आज तक जेल प्रशासन ने उनसे इस बाबत पड़ताल नहीं की कि उनके पास तमंचा कैसे और किसने पहुंचाया था।
नहीं होती है मॉनीटरिंग
जेल प्रशासन फरार होने वाले बंदियों की सूचना कोतवाली में दर्ज कराने के बाद भूल जाता है, कोई नियमित मॉनीटरिंग या निगरानी भी करनी है। जेल प्रवास के दौरान फरार बंदी के कौन से अभिन्न मित्र थे, कौन-मुलाकाती थे, कौन वकील थे इन बिंदुओं पर भी तवज्जो नही दी जाती है लिहाजा फरार बंदी की सूचना दर्ज कराने के बाद जेल प्रशासन अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है।
जेल मैनुअल की अवज्ञा से ही संभव है फरारी
ब्रिटिश काल में ही जेलों की सुरक्षा व्यवस्था बंदियों के रख-रखाव को लेकर तमाम नियम कानून बनाए गए थे, उनमें से जेल का संचालन कैसे हो, कौन अधिकारी, कर्मचारी क्या कार्य करेगा, कैसे करेगा इसकी पूरी व्यवस्था जेल मैनुअल में दी गई है, खास बात है कि अगर शत प्रतिशत इस मैनुअल के निर्देश और व्यवस्थाओं का पालन किया जाए तो फरारी संभव ही नहीं है, फरारी के खुलासे के समय हरेक बार फरारी की वजह जेल मैनुअल के प्रावधानों की अवज्ञा की निकली है।
आज तक सिपाही की हत्या कर भागे शातिर बग्गा तक नहीं पहुंचे कानून के हाथ
जेल से जिला कोर्ट में पेशी पर गया शातिर अपराधी बग्गा न्यायालय परिसर से सिपाही की गोली मारकर हत्या कर भाग निकला था, लेकिन आज तक पुलिस के हाथ शातिर बग्गा से कोसों दूर हैं। पूर्व फरार हो चुके बंदियों की गिरफ्तारी न होने से भी अपराधी बेखौफ हो रहे हैं।
पिछलेे छह सालों में जेल से फरार होने की ये तीसरी घटना
जेल के भीतर से बंदियों के फरार होने की पिछले छह सालों में यह तीसरी घटना है। करीब पांच साल पहले जेल की लंबी दीवारों को चुनौती देते हुए फूलबेहड़ थाना क्षेत्र का बंदी सिकंदर जेल से देखते ही देखते फरार हो गया था। खास बात है कि शाम को खाना बंटने के दौरान ही सिकंदर बैरक की चहारदीवारी के सहारे मेन वॉल फिर मेन वाल से बिजली के खंभे और निर्माणाधीन कैंपस में प्रयुक्त बांस के सहारे भाग निकला था। इसके बाद 29 जुलाई 2014 को दूसरी घटना हुई, जब जेल के मेन गेट से रविंद्र लोध और अजय तिवारी तमंचा लहराते हुए फरार हो गए थे। अब यह तीसरी घटना हुई, जिसमें बंदी के भागने के तरीके को भी जेल प्रशासन नहीं जान पाया।
हाईटेक हुई व्यवस्था, फिर भी खीरी फिसड्डी
लखीमपुर खीरी। बंदियों की फरारी की तमाम घटनाओं के बाद प्रदेश स्तर पर इसके पीछे कचहरी रिमांड पेशी को बड़ी वजह माना गया था, लिहाजा बंदियों की कोर्ट पेशी के लिए शासन स्तर पर वीडियो कांफ्रेंसिंग की व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसके तहत अब कोर्ट परिसर स्थित वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम से ही न्यायाधीश जेल वीडियो कांफ्रेंसिंग स्थित रूम मे लगे कैमरे के जरिए बंदियों का अग्रिम रिमांड मंजूरी दे देते है, लिहाजा बंदी को कचहरी लाना व उसे वापस ले जाने का सिरदर्द काफी कम हो गया है। वहीं बंदियों को अपने परिवार वालों से टेलीफोन के जरिए बातचीत कराने मंजूरी दी गई है, इसके चलते 28 जुलाई 2016 को जेल में पीसीओ की स्थापना की गई थी। इतने हाईटेक इंतजाम के बाद भी जेल के भीतर सीसीटीवी कैमरों को ठीक कराने की जहमत नहीं उठाई गई, सुरक्षा जांच में मेटल डिटेक्टर की उपलब्धता के नियम निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
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बंदी के जिला जेल से फरार हो जाने से कड़ी चौकसी का दावा हवाई साबित हुआ है। न जेल का गेट टूटा, न दीवार टूटी और आरोपी मोहन कश्यप जेल के बाहर निकल गया। अब तक यह भी साफ नहीं हो सका है कि बंदी कब और कैसे बाहर निकला? हालांकि जेल प्रशासन मेन गेट के रास्ते उसके फरार होने की आशंका जता रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि मेन गेट से ही वह भागा तो उसे एक-दो नहीं, बल्कि छोटे-बड़े छह गेट पार करने पड़े होंगे तो फिर वह कहीं पकड़ में क्यों नहीं आया। यदि पकड़ा नहीं गया तो कहीं न कहीं मिलीभगत की बात भी रही होगी।
जिला जेल में मुख्य गेट पर शाम छह बजे से 10 बजे तक बंदी रक्षक संतरी वीर सिंह, गेट कीपर योगेंद्र चौधरी तैनात थे। गेट संख्या दो और तीन पर बंदी रक्षक श्याम स्वरूप की ड्यूटी थी, जबकि गेट संख्या चार और पांच पर होमगार्ड सुशील कुमार तैनात था। इसके अलावा सर्किल गेट पर चक्राधिकारी और डिप्टी जेलर मौजूद थे। इसके अलावा सुरक्षा की दृष्टि से बनी डबल मेनवॉल पर भी बंदी रक्षकों का पहरा था। जेल प्रशासन की मानें तो सोमवार को शाम 6.15 बजे गिनती के समय आरोपी मोहन लाइन में देखा गया था। इसके कुछ ही मिनट बाद वह गायब हो गया। डीएम-एसपी और जेल प्रशासन की मानें तो जेल के अंदर कहीं पर कोई ऐेसे निशान नहीं मिले, जिसके सहारे मोहन कश्यप मेनवॉल आदि के सहारे कूदकर भाग निकला हो। इससे यह आशंका प्रबल होती जा रही है कि आरोपी मेन गेट से ही निकला होगा। जेल अधीक्षक भी इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं। तीनों गेटों पर बंदी रक्षकों और सर्किल गेट पर चक्राधिकारी और डिप्टी जेलर की मौजूदगी के बाद भी बंदी के जिला कारागार से फरार हो जाना जेल प्रशासन को सवालों के घेरे में खड़ा कर गया है। इसके अलावा बंदी रक्षकों की भूमिका और नीयत पर सवाल उठने लगे हैं।
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एएसपी ने खंगाले पुलिस चौकी के सीसीटीवी फुटेज
जिला जेल के गेट के सामने जेल गेट पुलिस चौकी है। एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी, सीओ सिटी एमपी सिंह और सदर कोतवाल दीपक शुक्ल जेल गेट चौकी पहुंचे और वहां लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाला। एएसपी ने बताया कि पूरे दिन की वीडियो रिकार्डिंग चेक की जा रही है, जो वीडियो रिकार्डिंग अब तक चेक की गई है उसमें फरार बंदी के फुटेज नहीं मिले हैं।
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कई जेल कर्मियों पर गिर सकती है गाज
रेप के बाद बालिका की हत्या का आरोपी मोहन कश्यप के फरार होने के मामले में कई जेल कर्मियों पर गाज गिर सकती है। जेल अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि जिस दिन और जिस समय पर आरोपी फरार होने की जानकारी बंदी रक्षकों ने दी है। उनके बयान लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जांच के बाद जिन जेल कर्मचारियों की लापरवाही उजागर होगी, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
...कहीं दिन में तो ही नहीं भाग निकला मोहन
लखीमपुर खीरी। जेल अधीक्षक विनोद कुमार की माने तो बंदी रक्षकों ने सोमवार की शाम 6.15 बजे फरार आरोपी मोहन कश्यप को लाइन में लगा देखा था। इसके बाद वह गायब हो गया। तुरंत उसकी खोजबीन भी शुरू कर दी। शाम सात बजे सायरन बजाकर पूरी जेल खंगाली गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। यह बात जेल अधीक्षक ने दर्ज कराई गई रिपोर्ट में भी कही है। अब सवाल यह उठता है कि जिस जगह पर बंदी मोहन कश्यप लाइन में था। वहां से उसे छोटे-बड़े मिलाकर कुल छह गेट पार करने थे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि चंद मिनट में आरोपी का छहों गेट पार कर फरार हो जाना किसी के गले नहीं उतर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि ऐसा तो नहीं कहीं बंदी मोहन दिन में मिलाई के समय कहीं भीड़ के साथ ही बंदी रक्षकों के साथ बाहर जाने में सफल तो नहीं हो गया। बहरहाल जो भी हो इस रहस्य पर पड़ा पर्दा आरोपी के पकड़े जाने के बाद ही उठ सकेगा।
फरार बंदी के दिखने की सूचना पर भागी पुलिस, घेराबंदी की
लखीमपुर खीरी। तलाश में लगी जेल के बंदी रक्षकों की टीम को राजापुर रोड़ पर एक मोटर्स शो रूम के पास फरार बंदी मोहन के दिखाई पड़ने की सूचना मिली, जिस पर उस इलाके को घेर लिया गया। सूचना पर एएसपी, सीओ सिटी ने पुलिस बल के साथ घेराबंदी कर खेतों की कांबिग की, लेकिन मौके पर बंदी नहीं मिला, जिस पर पुलिस और जेल अफसर लौट आए।
डीआईजी जेल करेंगे जांच
जेल से बंदी के फरार होने की घटना को आईजी जेल गोपाल मीणा ने गंभीरता से लिया है। उनका कहना है कि मामले की जांच डीआईजी जेल आरपी सिंह को सौंपी गई है। मामले में कोई भी लापरवाही मिली तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
तो मेन गेट से हो चुकी फरारी से भी नहीं लिया सबक!
लखीमपुर खीरी। भले ही जेल प्रशासन सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करे लेकिन तल्ख हकीकत है कि खीरी जेल में मेन गेट से भी दो उम्रकैद की सजा पाए बंदियों की पहले भी फरारी हो चुकी है। मंगलवार की सुबह बंदी मोहन कश्यप की रहस्यमय हालात में फरारी किसी के गले नहीं उतर रही है। सूत्र बताते हैं कि सोमवार की शाम के बाद से बंदी मोहन कश्यप को नहीं देखा गया। कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि इस फरारी के खुलासे के बाद मेन गेट सुर्खियों में आ जाए।
एक ओर भोपाल जेल से फरारी की घटना के बाद पूरे देश में जेलों के लिए सुरक्षा सतर्कता व्यवस्था कड़ी करने के आदेश जारी किए गए हैं, वहीं जिला खीरी से शातिर अपराधी मोहन कश्यप बड़ी आसानी से फरार हो गया, हैरत की बात है कि जेल प्रशासन कैदी के फरार होने के बाद से अब तक इस बात से भी अंजान है कि आखिर मोहन कश्यप ने जेल से फरार होने के लिए कौन सा रास्ता चुना था, और किस समय वह फरार हुआ था।
गौरतलब है कि 29 जुलाई 2014 को सुबह दो उम्रकैद की सजा पाए रवींद्र लोध और अजय तिवारी उर्फ मुनीजर मेन गेट से तमंचा लहराते हुए फरार होने में सफल हो गए थे। इस बड़ी घटना के बाद भी आज तक जेल प्रशासन ने सीख नहीं ली।
तब जेल में पहुंचा था तमंचा
मेन गेट से दोनों उम्र कैद की सजा पाए बंदियों की फरार होने की घटना को अपने तरह से तोड़-मोड़कर पेश कर जेल प्रशासन ने फरार होने वाले बंदियों के पास तमंचा न होने की बात कही थी। क्योंकि अगर जेल प्रशासन हकीकत स्वीकार कर लेता तो उसकी अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो जाता कि आखिर जेल के भीतर कैसे तमंचा पहुंच गया था और घटना से पूर्व तमंचा क्यों जेल प्रशासन की निगाह में नहीं आया। बाद में फरारी के दौरान ही दोनों उम्रकैद की सजा पाए कैदियों ने राहगीर सूरज वर्मा की बाइक तमंचा दिखाकर लूट ली थी। बाद में दोनों बंदी भी पकड़े गए लेकिन आज तक जेल प्रशासन ने उनसे इस बाबत पड़ताल नहीं की कि उनके पास तमंचा कैसे और किसने पहुंचाया था।
नहीं होती है मॉनीटरिंग
जेल प्रशासन फरार होने वाले बंदियों की सूचना कोतवाली में दर्ज कराने के बाद भूल जाता है, कोई नियमित मॉनीटरिंग या निगरानी भी करनी है। जेल प्रवास के दौरान फरार बंदी के कौन से अभिन्न मित्र थे, कौन-मुलाकाती थे, कौन वकील थे इन बिंदुओं पर भी तवज्जो नही दी जाती है लिहाजा फरार बंदी की सूचना दर्ज कराने के बाद जेल प्रशासन अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है।
जेल मैनुअल की अवज्ञा से ही संभव है फरारी
ब्रिटिश काल में ही जेलों की सुरक्षा व्यवस्था बंदियों के रख-रखाव को लेकर तमाम नियम कानून बनाए गए थे, उनमें से जेल का संचालन कैसे हो, कौन अधिकारी, कर्मचारी क्या कार्य करेगा, कैसे करेगा इसकी पूरी व्यवस्था जेल मैनुअल में दी गई है, खास बात है कि अगर शत प्रतिशत इस मैनुअल के निर्देश और व्यवस्थाओं का पालन किया जाए तो फरारी संभव ही नहीं है, फरारी के खुलासे के समय हरेक बार फरारी की वजह जेल मैनुअल के प्रावधानों की अवज्ञा की निकली है।
आज तक सिपाही की हत्या कर भागे शातिर बग्गा तक नहीं पहुंचे कानून के हाथ
जेल से जिला कोर्ट में पेशी पर गया शातिर अपराधी बग्गा न्यायालय परिसर से सिपाही की गोली मारकर हत्या कर भाग निकला था, लेकिन आज तक पुलिस के हाथ शातिर बग्गा से कोसों दूर हैं। पूर्व फरार हो चुके बंदियों की गिरफ्तारी न होने से भी अपराधी बेखौफ हो रहे हैं।
पिछलेे छह सालों में जेल से फरार होने की ये तीसरी घटना
जेल के भीतर से बंदियों के फरार होने की पिछले छह सालों में यह तीसरी घटना है। करीब पांच साल पहले जेल की लंबी दीवारों को चुनौती देते हुए फूलबेहड़ थाना क्षेत्र का बंदी सिकंदर जेल से देखते ही देखते फरार हो गया था। खास बात है कि शाम को खाना बंटने के दौरान ही सिकंदर बैरक की चहारदीवारी के सहारे मेन वॉल फिर मेन वाल से बिजली के खंभे और निर्माणाधीन कैंपस में प्रयुक्त बांस के सहारे भाग निकला था। इसके बाद 29 जुलाई 2014 को दूसरी घटना हुई, जब जेल के मेन गेट से रविंद्र लोध और अजय तिवारी तमंचा लहराते हुए फरार हो गए थे। अब यह तीसरी घटना हुई, जिसमें बंदी के भागने के तरीके को भी जेल प्रशासन नहीं जान पाया।
हाईटेक हुई व्यवस्था, फिर भी खीरी फिसड्डी
लखीमपुर खीरी। बंदियों की फरारी की तमाम घटनाओं के बाद प्रदेश स्तर पर इसके पीछे कचहरी रिमांड पेशी को बड़ी वजह माना गया था, लिहाजा बंदियों की कोर्ट पेशी के लिए शासन स्तर पर वीडियो कांफ्रेंसिंग की व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसके तहत अब कोर्ट परिसर स्थित वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम से ही न्यायाधीश जेल वीडियो कांफ्रेंसिंग स्थित रूम मे लगे कैमरे के जरिए बंदियों का अग्रिम रिमांड मंजूरी दे देते है, लिहाजा बंदी को कचहरी लाना व उसे वापस ले जाने का सिरदर्द काफी कम हो गया है। वहीं बंदियों को अपने परिवार वालों से टेलीफोन के जरिए बातचीत कराने मंजूरी दी गई है, इसके चलते 28 जुलाई 2016 को जेल में पीसीओ की स्थापना की गई थी। इतने हाईटेक इंतजाम के बाद भी जेल के भीतर सीसीटीवी कैमरों को ठीक कराने की जहमत नहीं उठाई गई, सुरक्षा जांच में मेटल डिटेक्टर की उपलब्धता के नियम निर्देशों का पालन नहीं किया गया।