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सुरेंद्र सिंह के प्रयासों को मिल रही सफलता
बिजुआ
Updated Sun, 21 Jun 2015 11:52 PM IST
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शारदा नदी के कटान से इलाके को बचाने की कोशिश में जुटे कुनबे की मदद को अब और लोग आगे आ रहे हैं। करीब दस लोगों ने सुरेंद्र सिंह से मिलकर उन्हें आर्थिक मदद दी है।
दंबलटांडा गांव के कट जाने के बाद अब पास के दूसरे गांव शारदा के निशाने पर हैं। ऐसे में दंबल निवासी सुरेंद्र सिंह बिग्गी व उनके परिवार के लोगों ने नदी कि किनारे खुद के पैसे से ठोकरें बनाने का काम शुरू किया था। इधर शारदा में पानी आ जाने से काम रोक दिया गया। फिर भी इन ठोकरों की रिपेयरिंग का काम जारी है। बगैर सरकारी मदद के सुरेंद्र सिंह के प्रयास को अमर उजाला ने शारदा की धार मोड़ने का भगीरथी प्रयास नाम से खबर प्रकाशित की थी। इस खबर के प्रकाशित होने के बाद करीब दस लोगों ने मदद को हाथ बढ़ाया है। इलाके के करमपाल सिंह, अमृतपाल सिंह और जगत सिंह ने दस-दस हजार रूपए व जसवंत सिंह, बलजीत सिंह बिल्ला, मंजीत सिंह बिट्टू ने पांच-पांच हजार रूपए के अलावा हरवंश सिंह ने दो हजार रुपए और जगीर सिंह ने 90 बांस का मूल्य दिया है। लोगों के जागरूक होने के बाद अभी तक कोई भी सरकारी अफसर इनके काम को देख कर हौसला अफजाई करने नही पहुंचा है।
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दंबलटांडा गांव के कट जाने के बाद अब पास के दूसरे गांव शारदा के निशाने पर हैं। ऐसे में दंबल निवासी सुरेंद्र सिंह बिग्गी व उनके परिवार के लोगों ने नदी कि किनारे खुद के पैसे से ठोकरें बनाने का काम शुरू किया था। इधर शारदा में पानी आ जाने से काम रोक दिया गया। फिर भी इन ठोकरों की रिपेयरिंग का काम जारी है। बगैर सरकारी मदद के सुरेंद्र सिंह के प्रयास को अमर उजाला ने शारदा की धार मोड़ने का भगीरथी प्रयास नाम से खबर प्रकाशित की थी। इस खबर के प्रकाशित होने के बाद करीब दस लोगों ने मदद को हाथ बढ़ाया है। इलाके के करमपाल सिंह, अमृतपाल सिंह और जगत सिंह ने दस-दस हजार रूपए व जसवंत सिंह, बलजीत सिंह बिल्ला, मंजीत सिंह बिट्टू ने पांच-पांच हजार रूपए के अलावा हरवंश सिंह ने दो हजार रुपए और जगीर सिंह ने 90 बांस का मूल्य दिया है। लोगों के जागरूक होने के बाद अभी तक कोई भी सरकारी अफसर इनके काम को देख कर हौसला अफजाई करने नही पहुंचा है।
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