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पंचामृत तकनीक से कराई जाएगी गन्ने की खेती
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2021-22 में 200 हेक्टेअर में आदर्श मॉडल खेती करने का मिला लक्ष्य
लखीमपुर खीरी। गन्ना विभाग ने गन्ना किसानों की आय में वृद्धि कराने के लिए खेती करने का आदर्श मॉडल बनाया है। इसमें समन्वित रूप से ट्रैंच प्लाटिंग, सहफसली, रैटून मैनेजमेंट, ट्रैश मल्चिंग एवं ड्रिप सिंचाई जैसी नवीन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसलिए विभाग ने इसे पंचामृत भी नाम दिया है। इस मॉडल को अपनाने वाले किसानों को उत्तम गन्ना कृषक घोषित किया जाएगा।
2021-22 में जनपद में 200 हेक्टेअर में आदर्श मॉडल खेती कराने का लक्ष्य मिला है। पंचामृत पद्धतियों के माध्यम से जिन प्लॉटों पर खेती की जाएगी, उन्हें आदर्श मॉडल के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने बताया कि गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीकी पद्धतियों को समन्वित रूप से अपनाने से गन्ने की उत्पादन लागत कम होगी और गन्ने की उपज में वृद्धि के साथ ही पानी की बचत होगी।
भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होगी और बाजार और घरेलू मांग के अनुसार अनाज, दलहन, तिलहन, शाक-सब्जी का उत्पादन आसानी से होगा। उन्होंने बताया कि ट्रैंच विधि से बुवाई, सहफसली खेती एवं ड्रिप के प्रयोग एक ही खेत पर शुरू करने वाले सफल किसानों को विभागीय योजनाओं व कार्यक्रमों में प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही उत्तम गन्ना कृषक का प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत शरदकालीन बुवाई के समय होगी।
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आदर्श मॉडल खेती में पंचामृत तकनीकी पद्धति अपनाकर खेती करने से किसानों को निश्चित ही अच्छा लाभ होगा। इस वर्ष 200 हेक्टेअर क्षेत्रफल में आदर्श मॉडल खेती प्रारंभ की जाएगी। किसानों को विभागीय योजनाओं समेत अच्छा बीज उपलब्ध कराया जाएगा। अन्य गन्ना किसान भी समन्वित तकनीकों को अपनाने के प्रति आकर्षित होंगे। - ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी
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लखीमपुर खीरी। गन्ना विभाग ने गन्ना किसानों की आय में वृद्धि कराने के लिए खेती करने का आदर्श मॉडल बनाया है। इसमें समन्वित रूप से ट्रैंच प्लाटिंग, सहफसली, रैटून मैनेजमेंट, ट्रैश मल्चिंग एवं ड्रिप सिंचाई जैसी नवीन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसलिए विभाग ने इसे पंचामृत भी नाम दिया है। इस मॉडल को अपनाने वाले किसानों को उत्तम गन्ना कृषक घोषित किया जाएगा।
2021-22 में जनपद में 200 हेक्टेअर में आदर्श मॉडल खेती कराने का लक्ष्य मिला है। पंचामृत पद्धतियों के माध्यम से जिन प्लॉटों पर खेती की जाएगी, उन्हें आदर्श मॉडल के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने बताया कि गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीकी पद्धतियों को समन्वित रूप से अपनाने से गन्ने की उत्पादन लागत कम होगी और गन्ने की उपज में वृद्धि के साथ ही पानी की बचत होगी।
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भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होगी और बाजार और घरेलू मांग के अनुसार अनाज, दलहन, तिलहन, शाक-सब्जी का उत्पादन आसानी से होगा। उन्होंने बताया कि ट्रैंच विधि से बुवाई, सहफसली खेती एवं ड्रिप के प्रयोग एक ही खेत पर शुरू करने वाले सफल किसानों को विभागीय योजनाओं व कार्यक्रमों में प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही उत्तम गन्ना कृषक का प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत शरदकालीन बुवाई के समय होगी।
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आदर्श मॉडल खेती में पंचामृत तकनीकी पद्धति अपनाकर खेती करने से किसानों को निश्चित ही अच्छा लाभ होगा। इस वर्ष 200 हेक्टेअर क्षेत्रफल में आदर्श मॉडल खेती प्रारंभ की जाएगी। किसानों को विभागीय योजनाओं समेत अच्छा बीज उपलब्ध कराया जाएगा। अन्य गन्ना किसान भी समन्वित तकनीकों को अपनाने के प्रति आकर्षित होंगे। - ब्रजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी