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पति की खुदकुशी से आहत महिला ने फंदे से लटककर दी जान
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निघासन-बम्हनपुर। पति के आत्महत्या करने से आहत महिला ने शनिवार की रात घर के अंदर रस्सी का फंदा कस लिया और घर की बड़ेर में लटकर जान दे दी। परिवार वालों ने शव का अंतिम संस्कार करा दिया है। पुलिस ने घटना की जानकारी से इनकार किया है।
बौधिया कलां के मजरा लोनियन पुरवा निवासी सतीश ने बताया कि 28 वर्षीय छोटा भाई रामजी करीब चार साल से अलग घर बनाकर पत्नी कविता के साथ रहता था। महीने भर पहले पत्नी कविता अपने मायके गांव सुरजी पुरवा चली गई थी। इससे परेशान रामजी ने गुरुवार की रात रस्सी से घर के अंदर बनीं बड़ेर से लटककर आत्महत्या कर ली थी। ग्राम प्रधान और गांव वालों की सहमति से पंचायतनामा भरकर घर वालों ने अंतिम संस्कार करा दिया था। पति की मौत के बाद से पत्नी कविता भी गुमसुम रहने लगी। कविता अपनी मां रामगुनी के साथ मायके आई थी। और उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया था। मां रामगुनी बताती हैं पुत्री रोती ही रहती थी। शनिवार की रात कविता ने भी रस्सी से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सतीश ने बताया कि उसके पिता डालचंद की मौत करीब 15 साल पहले हो गई थी। दोनों भाइयों को उसकी मां शिवप्यारी ने ही संभाला। शादी के चार साल बीत जाने के बाद भी रामजी के कोई औलाद नहीं थी। इसके बाद भी दोनों में गहरा प्यार था। ग्राम प्रधान यशपाल सिंह ने बताया कि अधिक गरीब होने के अलावा परिवार के लोग पुलिस में कोई भी शिकायत नहीं करना चाहते थे, जिसके चलते उनकी सहमति से समझौता कर अंतिम संस्कार करा दिया गया है।
घटना की सूचना पुलिस को नहीं दी गई है। यदि इस तरह से कोई घटना हुई है तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
- डीके सिंह, प्रभारी निरीक्षक
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बौधिया कलां के मजरा लोनियन पुरवा निवासी सतीश ने बताया कि 28 वर्षीय छोटा भाई रामजी करीब चार साल से अलग घर बनाकर पत्नी कविता के साथ रहता था। महीने भर पहले पत्नी कविता अपने मायके गांव सुरजी पुरवा चली गई थी। इससे परेशान रामजी ने गुरुवार की रात रस्सी से घर के अंदर बनीं बड़ेर से लटककर आत्महत्या कर ली थी। ग्राम प्रधान और गांव वालों की सहमति से पंचायतनामा भरकर घर वालों ने अंतिम संस्कार करा दिया था। पति की मौत के बाद से पत्नी कविता भी गुमसुम रहने लगी। कविता अपनी मां रामगुनी के साथ मायके आई थी। और उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया था। मां रामगुनी बताती हैं पुत्री रोती ही रहती थी। शनिवार की रात कविता ने भी रस्सी से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सतीश ने बताया कि उसके पिता डालचंद की मौत करीब 15 साल पहले हो गई थी। दोनों भाइयों को उसकी मां शिवप्यारी ने ही संभाला। शादी के चार साल बीत जाने के बाद भी रामजी के कोई औलाद नहीं थी। इसके बाद भी दोनों में गहरा प्यार था। ग्राम प्रधान यशपाल सिंह ने बताया कि अधिक गरीब होने के अलावा परिवार के लोग पुलिस में कोई भी शिकायत नहीं करना चाहते थे, जिसके चलते उनकी सहमति से समझौता कर अंतिम संस्कार करा दिया गया है।
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घटना की सूचना पुलिस को नहीं दी गई है। यदि इस तरह से कोई घटना हुई है तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
- डीके सिंह, प्रभारी निरीक्षक