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इतनी गंदगी, फिर कैसे न फैले दिमागी बुखार
लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 29 Aug 2015 07:40 PM IST
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जिले में दिमागी बुखार का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। अस्पताल में संभावित दिमागी बुखार के मरीजों का आना लगातार जारी है। स्वास्थ्य विभाग जहां दिमागी बुखार से निपटने में पूरी तरह सक्षम नहीं है वहीं शहर में दिमागी बुखार फैलाने के पूरे संसाधन है। आवारा घूमते सूअर, यहां-वहां फैली गंदगी और बजबजाती नालियां बीमारियों को दावत दे रही हैं। इससे दिमागी बुखार का खतरा और बढ़ गया है।
जिले में दिमागी बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है जिला अस्पताल में अब तक दस बच्चों में दिमागी बुखार के लक्षण मिले हैं। इसमें गंभीर हालत के चलते एक बच्चे को लखनऊ रेफर किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की हालत यह है कि न तो जिले में जापानी इंसेफ्लाइटिस की जांच और न ही इलाज की समुचित व्यवस्था है। तमाम मरीजों को जमीन पर लिटाकर इलाज करना पड़ता है। ऐसे में दिमागी बुखार का प्रकोप बढ़ने से रोकना ही एकमात्र उपाय है लेकिन इस दिशा में भी कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। दिमागी बुखार में गंदगी, जलभराव और मोहल्लों में घूमते आवारा सुअर और मच्छर मुख्य कारक हैं लेकिन हालत यह है कि शहर के बाहरी हिस्सों में लगभग सभी मोहल्लों में गंदे पानी का भराव है। इन मोहल्लों में नियमित सफाई भी नहीं होती जिससे इन मोहल्लों में गंदगी का अंबार रहता है। इन क्षेत्रों में मच्छरों की भरमार है। शहर के बाहरी मोहल्ले जैसे हिदायत नगर, गंगोत्री कॉलोनी, कांशीनगर का बाहरी किनारा, गोविंद नगर, शिव कालोनी तथा संकटा देवी मोहल्लों में आवारा सुअर घूमते रहते हैं। जिले में दिमागी बुखार की भयावह स्थिति होने के बावजूद न तो सफाई व्यवस्था पर ही ध्यान दिया गया और न नहीं सुअरों के विचरण पर रोक लगाई गई जिससे जिले में दिमागी बुखार का खतरा बढ़ता जा रहा है।
दिमागी बुखार से पीड़ित एक बच्चा लखनऊ रेफर
जिला अस्पताल में दिमागी बुखार से पीड़ित सात वर्षीय जोगेंद्र पुत्र महेश निवासी अमजाबेहड़ थाना गोला को शुक्रवार को गंभीर हालत के चलते लखनऊ रेफर किया गया है। इस बच्चे में दिमागी बुखार के लक्षण मिले थे इसके बाद जिला अस्पताल में इसकी हालत में सुधार नहीं हो पाया।
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जिले में नहीं हैं संसाधन
दिमागी बुखार से निपटने के लिए एक वर्ष पूर्व ही स्वास्थ्य विभाग ने आसीयू वार्ड बनाने की शुरुआत की थी लेकिन जरूरत पड़ने पर यह वार्ड काम नहीं आया क्योंकि वार्ड अभी तक अपूर्ण है। इससे पीड़ित बच्चे सामान्य बच्चा वार्ड में भर्ती किए जा रहे है। इसके अलावा अन्य संसाधनों की भी कमी है।
शुरू कराया गया छिड़काव
सीएमओ डॉ.वीके साहू ने बताया कि जिन गांवों के बच्चों में दिमागी बुखार के लक्षण मिले हैं वहां छिड़काव कराया गया है। लोगों को दवाएं वितरित कराई गई हैं। शहर में मलेरिया अधिकारी को छिड़काव कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा नगर पालिका को शहर में सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए तथा आवारा सुअरों के घूमने पर रोक लगाने के लिए लिखा गया है।
सूअरों पर नियंत्रण के दिए गए निर्देश
नगर पालिका अध्यक्ष डॉ.इरा श्रीवास्तव ने बताया कि नगर पालिका ने सूअर पालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लोग सूअरों को बाड़े के अंदर रखें। इसके अलावा सेनेटरी इंस्पेक्टरों से कहा गया है कि वे लोग मोहल्लों में जाकर देखें। पालिका अध्यक्ष ने बताया कि जिन लोगों के सूअर आवारा घूमते मिलेंगे उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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जिले में दिमागी बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है जिला अस्पताल में अब तक दस बच्चों में दिमागी बुखार के लक्षण मिले हैं। इसमें गंभीर हालत के चलते एक बच्चे को लखनऊ रेफर किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की हालत यह है कि न तो जिले में जापानी इंसेफ्लाइटिस की जांच और न ही इलाज की समुचित व्यवस्था है। तमाम मरीजों को जमीन पर लिटाकर इलाज करना पड़ता है। ऐसे में दिमागी बुखार का प्रकोप बढ़ने से रोकना ही एकमात्र उपाय है लेकिन इस दिशा में भी कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। दिमागी बुखार में गंदगी, जलभराव और मोहल्लों में घूमते आवारा सुअर और मच्छर मुख्य कारक हैं लेकिन हालत यह है कि शहर के बाहरी हिस्सों में लगभग सभी मोहल्लों में गंदे पानी का भराव है। इन मोहल्लों में नियमित सफाई भी नहीं होती जिससे इन मोहल्लों में गंदगी का अंबार रहता है। इन क्षेत्रों में मच्छरों की भरमार है। शहर के बाहरी मोहल्ले जैसे हिदायत नगर, गंगोत्री कॉलोनी, कांशीनगर का बाहरी किनारा, गोविंद नगर, शिव कालोनी तथा संकटा देवी मोहल्लों में आवारा सुअर घूमते रहते हैं। जिले में दिमागी बुखार की भयावह स्थिति होने के बावजूद न तो सफाई व्यवस्था पर ही ध्यान दिया गया और न नहीं सुअरों के विचरण पर रोक लगाई गई जिससे जिले में दिमागी बुखार का खतरा बढ़ता जा रहा है।
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दिमागी बुखार से पीड़ित एक बच्चा लखनऊ रेफर
जिला अस्पताल में दिमागी बुखार से पीड़ित सात वर्षीय जोगेंद्र पुत्र महेश निवासी अमजाबेहड़ थाना गोला को शुक्रवार को गंभीर हालत के चलते लखनऊ रेफर किया गया है। इस बच्चे में दिमागी बुखार के लक्षण मिले थे इसके बाद जिला अस्पताल में इसकी हालत में सुधार नहीं हो पाया।
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जिले में नहीं हैं संसाधन
दिमागी बुखार से निपटने के लिए एक वर्ष पूर्व ही स्वास्थ्य विभाग ने आसीयू वार्ड बनाने की शुरुआत की थी लेकिन जरूरत पड़ने पर यह वार्ड काम नहीं आया क्योंकि वार्ड अभी तक अपूर्ण है। इससे पीड़ित बच्चे सामान्य बच्चा वार्ड में भर्ती किए जा रहे है। इसके अलावा अन्य संसाधनों की भी कमी है।
शुरू कराया गया छिड़काव
सीएमओ डॉ.वीके साहू ने बताया कि जिन गांवों के बच्चों में दिमागी बुखार के लक्षण मिले हैं वहां छिड़काव कराया गया है। लोगों को दवाएं वितरित कराई गई हैं। शहर में मलेरिया अधिकारी को छिड़काव कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा नगर पालिका को शहर में सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए तथा आवारा सुअरों के घूमने पर रोक लगाने के लिए लिखा गया है।
सूअरों पर नियंत्रण के दिए गए निर्देश
नगर पालिका अध्यक्ष डॉ.इरा श्रीवास्तव ने बताया कि नगर पालिका ने सूअर पालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लोग सूअरों को बाड़े के अंदर रखें। इसके अलावा सेनेटरी इंस्पेक्टरों से कहा गया है कि वे लोग मोहल्लों में जाकर देखें। पालिका अध्यक्ष ने बताया कि जिन लोगों के सूअर आवारा घूमते मिलेंगे उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।