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विदेश में की पढ़ाई अब गांव से निर्यात कर रहे कागज
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पत्नी रूचिता और बेटी विंदा के साथ बांकेगंज कस्बा निवासी अमित शंकर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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अमित शंकर ने बांकेगंज की जमीन को बनाया कर्मभूमि, जमीन से जुड़े रोजगार ने दी अलग पहचान
बांकेगंज। अमेरिका और आस्ट्रेलिया में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अमित शंकर ने बांकेगंज कस्बे को अपनी कर्मभूमि बनाया है। आज वह यहां खेती करने के साथ-साथ मछली पालन और केले के तने से कागज बनाने का उद्योग चला रहे हैं। उनका बनाया कागज निर्यात हो रहा है।
अमित ने विदेश में उच्च शिक्षा तो प्राप्त की। लेकिन सात समंदर पार की दुनिया उन्हें रास न आई। वह अपने ननिहाल बांकेगंज लौट आए। काफी दिनों से वह पत्नी रुचिता और पुत्री वृंदा शंकर के साथ तालाब किनारे बने मकान में रहकर खेती-बाड़ी कर रहे हैं। अमित ने धीरे-धीरे दस एकड़ जमीन खरीदी। उसके कुछ हिस्से में खेतीबाड़ी शुरू की और कुछ हिस्से में तालाब बनाकर मछली पालन का काम शुरू किया। अमित ने बताया कि उनके दिवंगत मामा प्रेम बिहारी लाल सिन्हा बड़े पैमाने पर केले की खेती कर रहे थे। उन्हें यह देख लगा कि केले की खेती में बेकार हो जाने वाले तने का उपयोग उद्योग के रूप में किया जा सकता है। इस पर अध्ययन किया और केले के तने से निकालने वाले रेशे से कागज बनाने की फैक्टरी लगा ली। आज वह कागज बांकेगंज से विदेशों तक और क्वालिटी के रेशे को वह साड़ी बनाने की फैक्ट्रियों को सप्लाई कर रहे हैं। गांव के कई लोग उनकी फैक्टरी में काम कर रहे है।
इस तरह लौटे गांव
अमित शंकर ने बताया कि उनके पिता उदय शंकर मूल रूप से बिहार के आरा जिले के रहने वाले थे। जांबिया की राजधानी लुसाका में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की नौकरी मिलने के बाद वहीं पर बस गए। उनकी माता रेखा शंकर भी उनके साथ थीं। वहीं पर 25 फरवरी 1973 को अमित शंकर का जन्म हुआ। उन्होंने इंटर तक की शिक्षा लुसाका में हासिल की। इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एलपेक्सो (टेक्सास अमेरिका) से बीबीए से स्नातक करने के बाद यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न आस्ट्रेलिया से बिजनेस मैनेजमेंट फाइनेंस से परस्नातक की डिग्री हासिल की। इस बीच पिता के रिटायर होने पर वह अपने माता-पिता और बहन के साथ के साथ वापस दिल्ली आ गए और गुड़गांव में रहने लगे। पढ़ाई में रुचि के चलते अमित ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ लर्निंग मैनेजमेंट (आईआईएलएम) दिल्ली में दाखिला लिया। यहां उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट इंश्योरेंस एंड रिस्क मैनेजमेंट में दूसरी बार परास्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी होने के बाद अमित के पिता उदय शंकर ने दिल्ली में ही केबल बनाने की फैक्टरी लगाई और अमित उसी को चलाने लगे।
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अमित बताते हैं कि इतना सब कुछ होने के बाद भी उनका मन दिल्ली में नहीं लगा। गांव की मिट्टी की खुशबू उन्हें आकर्षित कर रही थी। तब उनकी मां ने उन्हें ननिहाल में जाकर रहने के लिए प्रेरित किया।
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बांकेगंज। अमेरिका और आस्ट्रेलिया में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अमित शंकर ने बांकेगंज कस्बे को अपनी कर्मभूमि बनाया है। आज वह यहां खेती करने के साथ-साथ मछली पालन और केले के तने से कागज बनाने का उद्योग चला रहे हैं। उनका बनाया कागज निर्यात हो रहा है।
अमित ने विदेश में उच्च शिक्षा तो प्राप्त की। लेकिन सात समंदर पार की दुनिया उन्हें रास न आई। वह अपने ननिहाल बांकेगंज लौट आए। काफी दिनों से वह पत्नी रुचिता और पुत्री वृंदा शंकर के साथ तालाब किनारे बने मकान में रहकर खेती-बाड़ी कर रहे हैं। अमित ने धीरे-धीरे दस एकड़ जमीन खरीदी। उसके कुछ हिस्से में खेतीबाड़ी शुरू की और कुछ हिस्से में तालाब बनाकर मछली पालन का काम शुरू किया। अमित ने बताया कि उनके दिवंगत मामा प्रेम बिहारी लाल सिन्हा बड़े पैमाने पर केले की खेती कर रहे थे। उन्हें यह देख लगा कि केले की खेती में बेकार हो जाने वाले तने का उपयोग उद्योग के रूप में किया जा सकता है। इस पर अध्ययन किया और केले के तने से निकालने वाले रेशे से कागज बनाने की फैक्टरी लगा ली। आज वह कागज बांकेगंज से विदेशों तक और क्वालिटी के रेशे को वह साड़ी बनाने की फैक्ट्रियों को सप्लाई कर रहे हैं। गांव के कई लोग उनकी फैक्टरी में काम कर रहे है।
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इस तरह लौटे गांव
अमित शंकर ने बताया कि उनके पिता उदय शंकर मूल रूप से बिहार के आरा जिले के रहने वाले थे। जांबिया की राजधानी लुसाका में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की नौकरी मिलने के बाद वहीं पर बस गए। उनकी माता रेखा शंकर भी उनके साथ थीं। वहीं पर 25 फरवरी 1973 को अमित शंकर का जन्म हुआ। उन्होंने इंटर तक की शिक्षा लुसाका में हासिल की। इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एलपेक्सो (टेक्सास अमेरिका) से बीबीए से स्नातक करने के बाद यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न आस्ट्रेलिया से बिजनेस मैनेजमेंट फाइनेंस से परस्नातक की डिग्री हासिल की। इस बीच पिता के रिटायर होने पर वह अपने माता-पिता और बहन के साथ के साथ वापस दिल्ली आ गए और गुड़गांव में रहने लगे। पढ़ाई में रुचि के चलते अमित ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ लर्निंग मैनेजमेंट (आईआईएलएम) दिल्ली में दाखिला लिया। यहां उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट इंश्योरेंस एंड रिस्क मैनेजमेंट में दूसरी बार परास्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी होने के बाद अमित के पिता उदय शंकर ने दिल्ली में ही केबल बनाने की फैक्टरी लगाई और अमित उसी को चलाने लगे।
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अमित बताते हैं कि इतना सब कुछ होने के बाद भी उनका मन दिल्ली में नहीं लगा। गांव की मिट्टी की खुशबू उन्हें आकर्षित कर रही थी। तब उनकी मां ने उन्हें ननिहाल में जाकर रहने के लिए प्रेरित किया।