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एसएसबी की 10 बीओपी के स्थायीकरण का रास्ता साफ

Sat, 06 Feb 2021 11:49 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 06 Feb 2021 11:49 PM IST
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ssb bop
लखीमपुर खीरी। नेपाल बार्डर पर वन विभाग की जमीन पर संचालित एसएसबी की 10 बीओपी (बार्डर आउट पोस्ट) के स्थायीकरण का रास्ता साफ हो गया है। नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ (एनबीडब्ल्यूएल) से प्रत्येक बीओपी के लिए एक-एक हेक्टेअर जमीन हस्तांतरण की अनुमति वन विभाग को मिली है। वन विभाग ने जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
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नेपाल बार्डर पर स्थित बीओपी को राज्य सरकार की अनुमति से अब तक वन विभाग की जमीन पर अस्थायी रूप से संचालित किया जा रहा है। इससे एसएसबी द्वारा इन चौकियों पर सुरक्षा के लिहाज से स्थायी रूप से कोई निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। एसएसबी ने ऑनलाइन आवेदन के जरिए 10 बीओपी के लिए एक-एक हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराने की मांग की थी। दुधवा टाइगर बफर जोन के उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल ने बताया कि जिन जमीनों पर बीओपी संचालित हैं, उन स्थानों पर एक-एक हेक्टेयर जमीन एसएसबी को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। केंद्र सरकार से जमीन हस्तांतरण की अनुमति मिल गई है। सात बीओपी दुधवा पार्क और तीन बीओपी उत्तरी वन प्रभाग क्षेत्र में हैं। नोडल अधिकारी लखनऊ ने परीक्षण के बाद वन भूमि स्थानांतरण के लिए रिपोर्ट मांगी है, जिसकी संस्तुति कर रिपोर्ट शीघ्र कंजरवेटर के पास भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार से प्रस्ताव पास होने के बाद भारत सरकार को फाइल भेजी जाएगी।
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20 हेक्टेयर जमीन पर पौधरोपण के लिए जमा होगी धनराशि
वन विभाग ने बीओपी के लिए 10 हेक्टेयर जमीन एसएसबी को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है, जिसके एवज में एसएसबी को भुगतान भी करना होगा। कुल 10 हेक्टेयर जमीन के बदले 20 हेक्टेयर जमीन में पौधारोपण में आने वाले खर्च का भुगतान एसएसबी करेगी। इसके अलावा जमीन के वर्तमान मूल्य के सापेक्ष धनराशि का भुगतान वन विभाग को करना होगा।
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अभी नेपाल बार्डर पर वन विभाग की जमीन पर अस्थायी रूप से एसएसबी की बीओपी संचालित की जा रही हैं, जिससे बीओपी को विकसित करने के लिए स्थायी निर्माण कार्य की अनुमति नहीं है। जमीन एसएसबी को हस्तांतरित होने के बाद बीओपी स्थायी हो जाएंगी और उनमें सुविधा के मुताबिक एसएसबी कोई निर्माण करा सकेगी।
-डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, बफर जोन, दुधवा टाइगर रिजर्व
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