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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पीड़ित पिता का वीडियो
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लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में दो दिन पूर्व कंधे पर बेटे का शव लेकर भटकने के मामले में पीड़ित पिता का वीडियो शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पीड़ित ने डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही बरतने और वार्ड स्टाफ द्वारा रुपये लिए जाने आरोप लगाया है।
सीएचसी नीमगांव क्षेत्र के गांव रमुआपुर निवासी दिनेश कुमार बुखार पीड़ित चार साल के पुत्र दिव्यांश को एक अक्तूबर को जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। मगर, इलाज के दौरान दो अक्तूबर को उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत के से आहत दिनेश कुमार को उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जिला अस्पताल में काफी देर तक भटकना पड़ा था। शनिवार को पीड़ित दिनेश का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उसने डॉक्टर पर बेटे का इलाज करने में लापरवाही बरतने के साथ वार्ड स्टाफ पर देने और इंजेक्शन लगाने के नाम पर सौ रुपये लेने का आरोप लगाया है। दिनेश का आरोप है कि बेटे को भर्ती कराने के बाद डॉक्टर काफी देर तक उसे देखने नहीं आए। कई बार कहा तब जाकर डॉक्टर देखने आए। उनके जाने के बाद वार्ड में मौजूद एक युवक ने सौ रुपये लेने के बाद बेटे के दवा लगाई। पीड़ित पिता ने जिला प्रशासन से मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
दो अक्तूबर को दिव्यांश की मौत दो बजकर 50 मिनट पर हुई। तीन बजे दिनेश को मृत्यु प्रमाण पत्र मुहैया करा दिया गया। इसे उसने स्वयं रिसीव किया है। रही बात मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटकने की, तो डॉक्टर मृत घोषित करने के बाद पहले मृत्यु प्रमाण पत्र बनाते हैं, जिससे पीड़ित को शव वाहन से घर भेजवाया जा सके। -डॉ. आरके वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल
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सीएचसी नीमगांव क्षेत्र के गांव रमुआपुर निवासी दिनेश कुमार बुखार पीड़ित चार साल के पुत्र दिव्यांश को एक अक्तूबर को जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। मगर, इलाज के दौरान दो अक्तूबर को उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत के से आहत दिनेश कुमार को उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जिला अस्पताल में काफी देर तक भटकना पड़ा था। शनिवार को पीड़ित दिनेश का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उसने डॉक्टर पर बेटे का इलाज करने में लापरवाही बरतने के साथ वार्ड स्टाफ पर देने और इंजेक्शन लगाने के नाम पर सौ रुपये लेने का आरोप लगाया है। दिनेश का आरोप है कि बेटे को भर्ती कराने के बाद डॉक्टर काफी देर तक उसे देखने नहीं आए। कई बार कहा तब जाकर डॉक्टर देखने आए। उनके जाने के बाद वार्ड में मौजूद एक युवक ने सौ रुपये लेने के बाद बेटे के दवा लगाई। पीड़ित पिता ने जिला प्रशासन से मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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दो अक्तूबर को दिव्यांश की मौत दो बजकर 50 मिनट पर हुई। तीन बजे दिनेश को मृत्यु प्रमाण पत्र मुहैया करा दिया गया। इसे उसने स्वयं रिसीव किया है। रही बात मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटकने की, तो डॉक्टर मृत घोषित करने के बाद पहले मृत्यु प्रमाण पत्र बनाते हैं, जिससे पीड़ित को शव वाहन से घर भेजवाया जा सके। -डॉ. आरके वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल
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