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कहीं दूसरे किसान आंदोलन की वजह न बन जाएं जंगली हाथी
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हाथियों द्वारा रोंदी गई फसल।
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तीन माह में सैकड़ों किसानों की धान और गन्ने की फसल उजाड़ चुके हैं हाथी
बांकेगंज। नेपाल से आए जंगली हाथी तीन माह के अंदर सैकड़ों किसानों की मेहनत को बर्बाद कर चुके हैं। किसानों के खेतों में पककर तैयार खड़ी धान, गन्ने की फसलें ही हाथियों के पैरों तले नहीं रौंदी गईं, बल्कि उनके सपने भी कुचल गए हैं। इसको लेकर किसानों में जबर्दस्त गुस्सा है। मंगलवार को दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से सटे पहाड़नगर गांव में वन कर्मियों को बंधक बनाने की घटना किसानों के गुस्से का परिणाम थी। कहीं किसानों का यह गुस्सा दूसरे किसान आंदोलन की वजह न बन जाए।
पिछले करीब तीन महीने से दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल में डेरा डाले नेपाली हाथी जंगल के आसपास बसे किसानों के खेतों में पककर तैयार खड़ी धान, गन्ना की फसलें उजाड़ रहे हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसको लेकर किसानों में नाराजगी है।
मंगलवार को यह नाराजगी उस समय फूट पड़ी जब वन कर्मी किसानों के नुकसान का जायजा लेने के लिए पहाड़नगर गांव पहुंचे। जहां किसानों ने वनकर्मियों को बंधक बना लिया और कहा कि जब तक कोई बड़े अधिकारी नहीं आते तब तक उन्हें नहीं छोड़ेंगे। हालांकि किसानों ने वन कर्मियों से किसी तरह की कोई बदसलूकी नहीं की। किसानों को इस बात को लेकर भी नाराजगी थी कि वन विभाग किसानों की समस्याओं के प्रति तनिक भी संवेदनशील नहीं है। किसानों ने वन विभाग को मंगलवार सुबह ही हाथियों से फसलों के नुकसान की जानकारी दे दी थी, लेकिन वन कर्मी करीब चार घंटे बाद गांव पहुंचे।
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ग्रामीणों का आरोप है कि किसान खुद ही जंगली जानवरों से अपनी फसलें बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वन कर्मी इसमें कोई सहयोग नहीं कर रहे हैं न ही उन्हें नुकसान का मुआवजा समय से मिल रहा है। किसानों का कहना है कि इस साल हुए नुकसान के मुआवजे की तो बात छोड़िए दो साल पहले हुए नुकसान के मुआवजे का एक धेला अभी तक नहीं मिल पाया है।
हाथियों के उत्पात से दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के आसपास बसे गांव के लोग इसके अलावा दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी, गोला के साथ ही शाहजहांपुर जिले की खुटार रेंज के कुंभिया, मुकुंदापुर, गेहुंआ, बरगटपुर, सहजनियां सुंदरपुर, देवीपुर, बोझवा, रायपुर, बिहारीपुर, सुभाषनगर, मखना, नानकपुर, भरगिवां, भम्मापुर, काकोरी, ऊंचागांव, लोनपुरवा, नंदापुर, सुआबोझ, खरेहटा, नारंग, फुलैया, पहाड़नगर, सोहनरा भूड़, बरौंछा आदि गांव के लोग बुरी तरह प्रभावित हैं। लंबे समय से नुकसान झेल रहे इन किसानों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। कहीं किसानों का यह गुस्सा आंदोलन का रूप न ले ले ऐसी आशंका जताई जा रही है। हाल ही तिकुनिया में हुए बवाल के बाद यदि इस तरह का कोई आंदोलन होता है तो उसे संभालना मुश्किल हो सकता है।
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बांकेगंज। नेपाल से आए जंगली हाथी तीन माह के अंदर सैकड़ों किसानों की मेहनत को बर्बाद कर चुके हैं। किसानों के खेतों में पककर तैयार खड़ी धान, गन्ने की फसलें ही हाथियों के पैरों तले नहीं रौंदी गईं, बल्कि उनके सपने भी कुचल गए हैं। इसको लेकर किसानों में जबर्दस्त गुस्सा है। मंगलवार को दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट जंगल से सटे पहाड़नगर गांव में वन कर्मियों को बंधक बनाने की घटना किसानों के गुस्से का परिणाम थी। कहीं किसानों का यह गुस्सा दूसरे किसान आंदोलन की वजह न बन जाए।
पिछले करीब तीन महीने से दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल में डेरा डाले नेपाली हाथी जंगल के आसपास बसे किसानों के खेतों में पककर तैयार खड़ी धान, गन्ना की फसलें उजाड़ रहे हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसको लेकर किसानों में नाराजगी है।
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मंगलवार को यह नाराजगी उस समय फूट पड़ी जब वन कर्मी किसानों के नुकसान का जायजा लेने के लिए पहाड़नगर गांव पहुंचे। जहां किसानों ने वनकर्मियों को बंधक बना लिया और कहा कि जब तक कोई बड़े अधिकारी नहीं आते तब तक उन्हें नहीं छोड़ेंगे। हालांकि किसानों ने वन कर्मियों से किसी तरह की कोई बदसलूकी नहीं की। किसानों को इस बात को लेकर भी नाराजगी थी कि वन विभाग किसानों की समस्याओं के प्रति तनिक भी संवेदनशील नहीं है। किसानों ने वन विभाग को मंगलवार सुबह ही हाथियों से फसलों के नुकसान की जानकारी दे दी थी, लेकिन वन कर्मी करीब चार घंटे बाद गांव पहुंचे।
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ग्रामीणों का आरोप है कि किसान खुद ही जंगली जानवरों से अपनी फसलें बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वन कर्मी इसमें कोई सहयोग नहीं कर रहे हैं न ही उन्हें नुकसान का मुआवजा समय से मिल रहा है। किसानों का कहना है कि इस साल हुए नुकसान के मुआवजे की तो बात छोड़िए दो साल पहले हुए नुकसान के मुआवजे का एक धेला अभी तक नहीं मिल पाया है।
हाथियों के उत्पात से दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के आसपास बसे गांव के लोग इसके अलावा दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी, गोला के साथ ही शाहजहांपुर जिले की खुटार रेंज के कुंभिया, मुकुंदापुर, गेहुंआ, बरगटपुर, सहजनियां सुंदरपुर, देवीपुर, बोझवा, रायपुर, बिहारीपुर, सुभाषनगर, मखना, नानकपुर, भरगिवां, भम्मापुर, काकोरी, ऊंचागांव, लोनपुरवा, नंदापुर, सुआबोझ, खरेहटा, नारंग, फुलैया, पहाड़नगर, सोहनरा भूड़, बरौंछा आदि गांव के लोग बुरी तरह प्रभावित हैं। लंबे समय से नुकसान झेल रहे इन किसानों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। कहीं किसानों का यह गुस्सा आंदोलन का रूप न ले ले ऐसी आशंका जताई जा रही है। हाल ही तिकुनिया में हुए बवाल के बाद यदि इस तरह का कोई आंदोलन होता है तो उसे संभालना मुश्किल हो सकता है।
जंगली जानवरों से किसानों की फसल बचाने के लिए वन विभाग पूरी क्षमता से प्रयास कर रहा है। किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। उनकी फसलों में हुए नुकसान का मुआवजा जल्दी से जल्दी मिल सके इसके भी प्रयास किए जा रहे हैं।- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन