{"_id":"6ac14536a8995de6c902aeba","slug":"somewhere-houses-were-submerged-in-the-river-somewhere-hopes-drowned-in-the-fields-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1008-186595-2026-10-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: कहीं घर नदी में समाए, कहीं खेतों में डूबी उम्मीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: कहीं घर नदी में समाए, कहीं खेतों में डूबी उम्मीद
Sat, 03 Oct 2026 11:41 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 03 Oct 2026 11:41 PM IST
विज्ञापन
रुरासुल्तानपुर में नदी में समाता मकान। स्रोत: ग्रामीण
बिजुआ/भीरा। शारदा नदी से बढ़ती कटान और बारिश से हुआ जलभराव ग्रामीणों-किसानों के लिए दोहरी मुसीबत बन गया है। रूरासुल्तानपुर में शनिवार को कटान की चपेट में एक और मकान और कई पेड़ नदी में समा गए। अब तक 11 पक्के और दो कच्चे मकान नदी में विलीन हो चुके हैं। उधर, बिजुआ क्षेत्र में धान समेत कई फसलें खेतों में गिर गई हैं। पानी भरे होने से फसल खराब होने की आशंका है।
रूरासुल्तानपुर में नदी की धारा गांव की ओर बढ़ रही है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। कटान अब वीरबाबा स्थान, शिव मंदिर और माता मंदिर तक पहुंच गया है। काली माता मंदिर का आधा हिस्सा नदी में समा चुका है। क्षेत्रीय लेखपाल राजीव वर्मा के अनुसार शनिवार को एक और मकान नदी में समाया।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव डूब क्षेत्र घोषित है, लेकिन कटान रोकने के लिए अब तक ठोस काम नहीं हुआ। उन्होंने कटान पीड़ित परिवारों को मुआवजा, सुरक्षित स्थान पर बसाने और शारदा नदी पर बोल्डर व कटानरोधी कार्य कराने की मांग की है। तहसीलदार अरुण कुमार ने बताया कि लेखपाल लगातार मौके पर रहकर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
विज्ञापन
उधर, बिजुआ ब्लॉक में जलभराव से किसानों की महीनों की मेहनत पर संकट है। खाद, बीज, पानी और फसल की देखभाल में मजदूरी व जमा पूंजी लगाने के बाद किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। इसी आमदनी से किसी को बेटी की शादी, किसी को बच्चों की पढ़ाई तो किसी को सालभर का घर-गृहस्थी का खर्च चलाना था।
राजपुर के राजू मौर्य की दो बेटियां हैं। उनका कहना है कि अच्छी फसल होने पर इस बार बेटी की शादी करने की उम्मीद थी। श्याम बिहारी खेती पर निर्भर हैं। उनका एक बेटा और एक बेटी है। फसल से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और शादी-ब्याह की जरूरतें पूरी होने की उम्मीद थी। डालचंद की एक बेटी की शादी हो चुकी है। एक बेटा और दो बेटियां हैं। परिवार की अन्य जिम्मेदारियां भी खेती की पैदावार पर टिकी हैं। फसल बर्बाद होने से उनकी चिंता बढ़ गई है।
एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि फसलों का सर्वे हो चुका है। जल्द ही किसानों के खेत में कृषि निवेश की धनराशि भेज दी जाएगी।
-- -- -- -- -- -
नदी के निशाने पर धार्मिक स्थल
रूरासुल्तानपुर में कटान वीरबाबा स्थान, शिव मंदिर और माता मंदिर तक पहुंच गया है। काली माता मंदिर का आधा हिस्सा नदी में समा चुका है। ग्रामीणों को अब धार्मिक स्थलों के भी नदी में समाने की चिंता है। किसानों के मुताबिक फसल की आमदनी से बेटी की शादी, बच्चों की फीस, घर का खर्च और अन्य जरूरतें पूरी होनी थीं। जलभराव से धान समेत कई फसलें प्रभावित हैं। किसानों ने मजदूरी और जमा पूंजी तक फसल में लगाई थी। अब फसल खराब होने की आशंका से परिवार की आर्थिक योजनाएं प्रभावित होने लगी हैं।
विज्ञापन
रूरासुल्तानपुर में नदी की धारा गांव की ओर बढ़ रही है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। कटान अब वीरबाबा स्थान, शिव मंदिर और माता मंदिर तक पहुंच गया है। काली माता मंदिर का आधा हिस्सा नदी में समा चुका है। क्षेत्रीय लेखपाल राजीव वर्मा के अनुसार शनिवार को एक और मकान नदी में समाया।
विज्ञापन
ग्रामीणों का कहना है कि गांव डूब क्षेत्र घोषित है, लेकिन कटान रोकने के लिए अब तक ठोस काम नहीं हुआ। उन्होंने कटान पीड़ित परिवारों को मुआवजा, सुरक्षित स्थान पर बसाने और शारदा नदी पर बोल्डर व कटानरोधी कार्य कराने की मांग की है। तहसीलदार अरुण कुमार ने बताया कि लेखपाल लगातार मौके पर रहकर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
विज्ञापन
उधर, बिजुआ ब्लॉक में जलभराव से किसानों की महीनों की मेहनत पर संकट है। खाद, बीज, पानी और फसल की देखभाल में मजदूरी व जमा पूंजी लगाने के बाद किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। इसी आमदनी से किसी को बेटी की शादी, किसी को बच्चों की पढ़ाई तो किसी को सालभर का घर-गृहस्थी का खर्च चलाना था।
राजपुर के राजू मौर्य की दो बेटियां हैं। उनका कहना है कि अच्छी फसल होने पर इस बार बेटी की शादी करने की उम्मीद थी। श्याम बिहारी खेती पर निर्भर हैं। उनका एक बेटा और एक बेटी है। फसल से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और शादी-ब्याह की जरूरतें पूरी होने की उम्मीद थी। डालचंद की एक बेटी की शादी हो चुकी है। एक बेटा और दो बेटियां हैं। परिवार की अन्य जिम्मेदारियां भी खेती की पैदावार पर टिकी हैं। फसल बर्बाद होने से उनकी चिंता बढ़ गई है।
एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि फसलों का सर्वे हो चुका है। जल्द ही किसानों के खेत में कृषि निवेश की धनराशि भेज दी जाएगी।
नदी के निशाने पर धार्मिक स्थल
रूरासुल्तानपुर में कटान वीरबाबा स्थान, शिव मंदिर और माता मंदिर तक पहुंच गया है। काली माता मंदिर का आधा हिस्सा नदी में समा चुका है। ग्रामीणों को अब धार्मिक स्थलों के भी नदी में समाने की चिंता है। किसानों के मुताबिक फसल की आमदनी से बेटी की शादी, बच्चों की फीस, घर का खर्च और अन्य जरूरतें पूरी होनी थीं। जलभराव से धान समेत कई फसलें प्रभावित हैं। किसानों ने मजदूरी और जमा पूंजी तक फसल में लगाई थी। अब फसल खराब होने की आशंका से परिवार की आर्थिक योजनाएं प्रभावित होने लगी हैं।