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तो इस बार विभागों की फिक्स होगी जिम्मेदारी

Tue, 28 Mar 2017 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ लखीमपुर खीरी
अमर उजाला ब्यूरो/ लखीमपुर खीरी Updated Tue, 28 Mar 2017 12:31 AM IST
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So this time the accounts of the departments will be responsible
गेहूं - फोटो : अमर उजाला
तो इस बार विभागों की फिक्स होगी जिम्मेदारी
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किसानों से नियमित गेहूं खरीद करने की होगी चुनौती
डीएम ने गेहूं खरीद के लिए तय किए चर्चा के बिंदू
एक अप्रैल से खोले जाएंगे 135 क्रय केंद्र

प्रदेश सरकार ने किसानों को उनकी फसल का मूल्य समर्थन योजना के तहत उचित मूल्य दिलाने का वादा किया है, जिसके बाद सालों से चले आ रहे क्रय केंद्रों की मनमानी वाले सिस्टम में बदलाव आने की उम्मीद बंधी है। डीएम आकाशदीप ने एक अप्रैल से क्रय केंद्र को खोलने से पहले ही गेहूं खरीद से जुड़े अधिकारियों की कार्यशाला 30 मार्च को लगाई है, जिसमें आठ विभागों के अधिकारियों को क्रय केंद्रों पर नियमित खरीद करने के साथ ही किसानों की सुविधाओं का ख्याल रखने के निर्देश दिए जाएंगे। 
रबी विपणन वर्ष 2017-18 में सरकार ने गेहूं खरीद का लक्ष्य दोगुना कर दिया है, जिससे जिला प्रशासन के समक्ष दोहरी चुनौती पेश हो गई है। पहली चुनौती 135 क्रय केंद्रों को समय पर खोलवाकर किसानों से नियमित खरीद कराने की होगी, जबकि दूसरी चुनौती लक्ष्य के मुताबिक गेहूं खरीद करना रहेगी। बताते चलें कि रबी विपणन वर्ष 2016-17 में जिले को 2,16,500 मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य मिला था। वहीं एजेंसियों ने किसानों से मनमाना रवैया अख्तियार करते हुए खरीद करने में दिलचस्पी ही नहीं दिखाई, जिससे सामान्य किसान क्रय केंद्रों पर फसल बेचने की हिम्मत नहीं जुटा सके। सिर्फ रसूखदार और राजनीतिक सिफारिश रखने वाले किसानों तक खरीद सिमटकर रह गई थी। नतीजन लक्ष्य के सापेक्ष 52,754 मीट्रिक टन (24.37 फीसदी) खरीद की गई। जबकि 137 क्रय केंद्र खोले गए थे। अब किसानों को उनका हक दिलाने का वादा कर सत्ता में आई योगी सरकार को खरा साबित होना होगा। तो अफसरों के सामने भी बिचौलियों के आगे घुटने टेक चुके सिस्टम को नए सिरे से दुरूस्त करने की चुनौती है। 
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इन अधिकारियों की रहेगी भूमिका
- जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी : क्रय नीति, स्टेशनरी, बैनर, क्रय केंद्रों से डिपो तक गेहूं भेजने का रोस्टर बनाना।
- एफसीआई के प्रबंधक गुण नियंत्रण एवं लेखा : गुणवत्ता, भंडारण, बिलिंग के समय लगाने वाले अभिलेखों की जानकारी देना।
- वरिष्ठ संभागीय लेखाधिकारी : क्रय किए गए गेहूं की बिलिंग, आरटीजीएस प्रणाली से भुगतान पर चर्चा।
- एआर कोआपरेटिव : सहकारिता विभाग संबंधित एजेंसियों की खरीद पर जवाबदेही तय करना। 
- मंडी सचिव : किसानों को देय सुविधाएं, गेहूं नीलामी की व्यवस्था, कांटा-बांट सत्यापन के लिए धनराशि जमा करना, प्रचार-प्रसार और उतराई-छनाई की दरें तय करना। 
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- वरिष्ठ निरीक्षक विधिक माप विज्ञान विभाग : कांटा बांट का सत्यापन कराना। 
- जिला सूचना विज्ञान अधिकारी : ई-प्रक्योरमेंट एवं आनलाइन डाटा फीडिंग की जानकारी देना। 
- लीड बैैंक मैनेजर : आरटीजीएस से किसानों को भुगतान कराने और बैंकिंग संबंधी जानकारी देंगे। 
बाक्स=वर्जन......
इस बार समय से क्रय केंद्रों को खोलने के साथ ही सीधे किसानों से खरीद करने के लिए तैयारी अंतिम दौर में है। 30 मार्च को कलेक्ट्रेट सभागार में चार बजे से गेहूं खरीद से संबंधित अधिकारियों के साथ कार्यशाला की जाएगी, जिसमें आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा कर कमियां दूर कर ली जाएंगी।
-कौशल देव, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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