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... तो हो गए सारे रिकार्ड ध्वस्त
ब्यूरो पलियाकलां।
Updated Mon, 28 Mar 2016 10:50 PM IST
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दुधवा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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-दुधवा में 25 मार्च को हुई करीब एक लाख की आय, अब तक सबसे आय वाला दिन
- दुधवा के लिए मुनाफे का सबब बनी होली की छुट्टियां
दुधवा के पर्यटन ने नवंबर 2015 से जो बुरे दिन देखने शुरू किए तो वह वर्ष 2016 के मार्च माह में पहले सप्ताह तक जारी रहे। आंदोलन के चलते यहां के पर्यटन को नजर सी लग गई और सैलानियों ने आना ही बंद कर दिया था लेकिन हालात ज्यादा दिनों तक ऐसे नहीं रहे। दुधवा का प्रेम सैलानियों में जागा और वह एक बार फिर बड़ी तादाद में यहां आने लगे और सब हाउस फुल हो गया। इन हाउस फुल दिनों में सबसे ज्यादा आय वाला दिन 25 मार्च रहा। इसमें पार्क को करीब एक लाख रुपये की आय हुई जो अब तक का सर्वाधिक राजस्व है। माना जा रहा है कि ऐसा होली कि छुट्टियों के चलते हुआ है। फिलहाल पार्क प्रशासन हो रही आए से गदगद है और आगे भी उसे ऐसी आय होने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि दुधवा नेशनल पार्क का सत्र 15 नवंबर से शुरू होता है और शुरुआत होते ही यहां सैलानियों का तांता लग जाता है। पार्क का पर्यटन सत्र शुरू हुआ और सैलानी भी आ रहे थे लेकिन 23 नंवबर वर्ष 2015 को कर्मियों, तत्कालीन डीडी और डीएम के बीच विवाद हो गया और इसके खिलाफ कर्मी आंदोलित हो गए। नवंबर 2015 से सात मार्च वर्ष 2016 तक ये आंदोलन कई चरणों में हुआ और इसमें हुई हड़ताल से दुधवा का पर्यटन पूरी तरह से पटरी से उतर गया। इसके चलते सैलानियों का यहां आना तकरीबन बंद हो गया। हालात देख कर लग रहा था कि अब जल्द पर्यटन पटरी पर नहीं आने वाला है लेकिन इन आशंकाओं पर मार्च माह के दूसरे सप्ताह में ही विराम लग गया और सैलानी ज्यादा दिनों तक अपने को दुधवा से दूर नहीं रख पाए। सैलानियों का तांता एक बार फिर लगा और सब हाउस फुल होने लगा। आगे भी कई दिनों के लिए दुधवा फुल ही है। इससे पार्क को काफी राजस्व की प्राप्ति हुई है लेकिन इसमें सबसे ज्यादा आय वाला दिन 25 मार्च रहा है। जिसमें पार्क को करीब एक लाख रुपये प्राप्त हुए हैं जो अब तक एक रिकार्ड है। माना जा रहा है कि यह आय होली की छुट्टियों के चलते हुई है।
पार्क में सैलानी खासी तादाद में आ रहे हैं और इससे दुधवा की अच्छी आय हो रही है लेकिन इसमें सबसे ज्यादा आय वाला दिन 25 मार्च रहा है। इस दिन पार्क को करीब एक लाख रुपये की आय हुई है।
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-महावीर कौजलगि, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा नेशनल पार्क
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- दुधवा के लिए मुनाफे का सबब बनी होली की छुट्टियां
दुधवा के पर्यटन ने नवंबर 2015 से जो बुरे दिन देखने शुरू किए तो वह वर्ष 2016 के मार्च माह में पहले सप्ताह तक जारी रहे। आंदोलन के चलते यहां के पर्यटन को नजर सी लग गई और सैलानियों ने आना ही बंद कर दिया था लेकिन हालात ज्यादा दिनों तक ऐसे नहीं रहे। दुधवा का प्रेम सैलानियों में जागा और वह एक बार फिर बड़ी तादाद में यहां आने लगे और सब हाउस फुल हो गया। इन हाउस फुल दिनों में सबसे ज्यादा आय वाला दिन 25 मार्च रहा। इसमें पार्क को करीब एक लाख रुपये की आय हुई जो अब तक का सर्वाधिक राजस्व है। माना जा रहा है कि ऐसा होली कि छुट्टियों के चलते हुआ है। फिलहाल पार्क प्रशासन हो रही आए से गदगद है और आगे भी उसे ऐसी आय होने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि दुधवा नेशनल पार्क का सत्र 15 नवंबर से शुरू होता है और शुरुआत होते ही यहां सैलानियों का तांता लग जाता है। पार्क का पर्यटन सत्र शुरू हुआ और सैलानी भी आ रहे थे लेकिन 23 नंवबर वर्ष 2015 को कर्मियों, तत्कालीन डीडी और डीएम के बीच विवाद हो गया और इसके खिलाफ कर्मी आंदोलित हो गए। नवंबर 2015 से सात मार्च वर्ष 2016 तक ये आंदोलन कई चरणों में हुआ और इसमें हुई हड़ताल से दुधवा का पर्यटन पूरी तरह से पटरी से उतर गया। इसके चलते सैलानियों का यहां आना तकरीबन बंद हो गया। हालात देख कर लग रहा था कि अब जल्द पर्यटन पटरी पर नहीं आने वाला है लेकिन इन आशंकाओं पर मार्च माह के दूसरे सप्ताह में ही विराम लग गया और सैलानी ज्यादा दिनों तक अपने को दुधवा से दूर नहीं रख पाए। सैलानियों का तांता एक बार फिर लगा और सब हाउस फुल होने लगा। आगे भी कई दिनों के लिए दुधवा फुल ही है। इससे पार्क को काफी राजस्व की प्राप्ति हुई है लेकिन इसमें सबसे ज्यादा आय वाला दिन 25 मार्च रहा है। जिसमें पार्क को करीब एक लाख रुपये प्राप्त हुए हैं जो अब तक एक रिकार्ड है। माना जा रहा है कि यह आय होली की छुट्टियों के चलते हुई है।
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पार्क में सैलानी खासी तादाद में आ रहे हैं और इससे दुधवा की अच्छी आय हो रही है लेकिन इसमें सबसे ज्यादा आय वाला दिन 25 मार्च रहा है। इस दिन पार्क को करीब एक लाख रुपये की आय हुई है।
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-महावीर कौजलगि, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा नेशनल पार्क