{"_id":"5a6f1d9a4f1c1b87268b706a","slug":"snowfall-lowers-temperature-in-plains","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहाड़ों पर हिमपात, भीषण शीतलहर से तराई बेहाल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहाड़ों पर हिमपात, भीषण शीतलहर से तराई बेहाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 29 Jan 2018 06:41 PM IST
विज्ञापन
मौसम
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पहाड़ों पर हो रहे हिमपात के चलते तराई में लोग भीषण शीतलहर से बेहाल हैं। सोमवार की सुबह भी शहर घने कोहरे में लिपटा नजर आया, लेकिन यह कोहरा जल्दी ही छंट गया। आसमान में छाए बादलों के कारण सूरज दोपहर बाद करीब एक बजे अपनी चमक दिखा सका। तेज रफ्तार में चल रही बर्फीली हवाओं के कारण कुछ देर के लिए निकली यह धूप ठंड से राहत नहीं दे पाई। हालांकि सोमवार को तापमान में कुछ बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सोमवार की सुबह घना कोहरा छाया रहा। यह कोहरा सुबह आठ बजे तक पूरी तरह छंट गया। आसमान में बादल और धुंध छाए रहने से सूरज नहीं निकल सका। दोपहर बाद करीब एक बजे हल्की सी धूप निकली। इस दौरान चल रही सर्द हवाओं के कारण गलन बढ़ गई। गुनगुनी धूप भी लोगों को राहत देने में नाकाम रही। भीषण शीतलहर के चलते सोमवार को भी आम जनजीवन बुरी तरह अस्तव्यस्त रहा।
जनवरी के पहले दिन से शुरू हुई भीषण शीतलहर ने इस बार लोगों को बेहाल करके रख दिया है। माह के शुरुआती 15 दिन तो लोग सूरज के दर्शन को भी तरस गए थे। 15 जनवरी के बाद बाद मौसम में कुछ सुधार हुआ। धूप निकलने से भीषण शीतलहर से राहत मिली थी। इसी बीच पिछले सप्ताह मंगलवार को अचानक हुई बारिश ने ठंड बढ़ा दी, लेकिन अगले ही दिन से खिलकर निकलने वाली धूप से मौसम में फिर सुधार आना शुरू हो गया। जनवरी के अंतिम सप्ताह में पहाड़ों पर हिमपात होने से 26 जनवरी को मौसम ने फिर पलटी मार दी। तब से लेकर अब तक बर्फीली हवाओं का कहर जारी है। गलन इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि हाथ पैर सुन्न होने लगे हैं। भीषण शीतलहर से लोगों की दिनचर्या गड़बड़ा गई है। लोगों की कार्यक्षमता तो प्रभावित हुई ही। आम जनजीवन भी बुरी तरह अस्तव्यस्त हो गया है। यह सर्दी बच्चों, बीमारों और बुजुर्गों पर भारी पड़ रही है।मैलानी। तीन दिनों तक धूप निकलने के बाद मौसम ने एक बार फिर पलटवार किया है। बर्फीली हवाएं चलने से शीतलहर फिर कहर बरपाने लगी है। शुक्रवार को मौसम का मिजाज बदल गया। सुबह सेे ही घना कोहरा पड़ने लगा। साथ ही बर्फीली हवाएं चलने लगीं और दिनभर धूप के दर्शन नहीं हुए। शनिवार और रविवार को यही हाल रहा। सोमवार को भी सुबह से घना कोहरा छाया रहा। शीतलहर का कहर भी जारी रहने से कड़ाके की सर्दी में लोग ठिठुरते दिखाई दिए। दोपहर बाद ढाई बजे कोहरा छंटने के बाद धूप के दर्शन हो सके। शाम होते ही गलन बढ़ गई। कड़ाके की सर्दी से जनजीवन भी अस्त-व्यस्त रहा। अधिकांश लोग शाम होते ही घरों में दुबक गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
सोमवार की सुबह घना कोहरा छाया रहा। यह कोहरा सुबह आठ बजे तक पूरी तरह छंट गया। आसमान में बादल और धुंध छाए रहने से सूरज नहीं निकल सका। दोपहर बाद करीब एक बजे हल्की सी धूप निकली। इस दौरान चल रही सर्द हवाओं के कारण गलन बढ़ गई। गुनगुनी धूप भी लोगों को राहत देने में नाकाम रही। भीषण शीतलहर के चलते सोमवार को भी आम जनजीवन बुरी तरह अस्तव्यस्त रहा।
विज्ञापन
जनवरी के पहले दिन से शुरू हुई भीषण शीतलहर ने इस बार लोगों को बेहाल करके रख दिया है। माह के शुरुआती 15 दिन तो लोग सूरज के दर्शन को भी तरस गए थे। 15 जनवरी के बाद बाद मौसम में कुछ सुधार हुआ। धूप निकलने से भीषण शीतलहर से राहत मिली थी। इसी बीच पिछले सप्ताह मंगलवार को अचानक हुई बारिश ने ठंड बढ़ा दी, लेकिन अगले ही दिन से खिलकर निकलने वाली धूप से मौसम में फिर सुधार आना शुरू हो गया। जनवरी के अंतिम सप्ताह में पहाड़ों पर हिमपात होने से 26 जनवरी को मौसम ने फिर पलटी मार दी। तब से लेकर अब तक बर्फीली हवाओं का कहर जारी है। गलन इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि हाथ पैर सुन्न होने लगे हैं। भीषण शीतलहर से लोगों की दिनचर्या गड़बड़ा गई है। लोगों की कार्यक्षमता तो प्रभावित हुई ही। आम जनजीवन भी बुरी तरह अस्तव्यस्त हो गया है। यह सर्दी बच्चों, बीमारों और बुजुर्गों पर भारी पड़ रही है।मैलानी। तीन दिनों तक धूप निकलने के बाद मौसम ने एक बार फिर पलटवार किया है। बर्फीली हवाएं चलने से शीतलहर फिर कहर बरपाने लगी है। शुक्रवार को मौसम का मिजाज बदल गया। सुबह सेे ही घना कोहरा पड़ने लगा। साथ ही बर्फीली हवाएं चलने लगीं और दिनभर धूप के दर्शन नहीं हुए। शनिवार और रविवार को यही हाल रहा। सोमवार को भी सुबह से घना कोहरा छाया रहा। शीतलहर का कहर भी जारी रहने से कड़ाके की सर्दी में लोग ठिठुरते दिखाई दिए। दोपहर बाद ढाई बजे कोहरा छंटने के बाद धूप के दर्शन हो सके। शाम होते ही गलन बढ़ गई। कड़ाके की सर्दी से जनजीवन भी अस्त-व्यस्त रहा। अधिकांश लोग शाम होते ही घरों में दुबक गए।
विज्ञापन