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Lakhimpur Kheri News: मैगलगंज में राहगीरों को असमंजस में डाल रहे साइन बोर्ड व माइल स्टोन

Sun, 12 Oct 2025 11:25 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Sun, 12 Oct 2025 11:25 PM IST
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Sign boards and milestones are confusing passersby in Magalganj
मैगलगंज के मेन चौराहा पर लगा साइन बोर्ड में दिल्ली की दूसरी 427। संवाद
मैगलगंज। कस्बे में सही दिशा व दूरी दर्शाने के लिए साइन बोर्ड व माइल स्टोन राहगीरों को असमंजस में डाल रहे हैं। दोनों में दूरी अलग-अलग लिखी है। ऐसे में उन्हें सही अनुमान नहीं लग पाता।
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दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे से कस्बा जुड़ा हुआ है। रोजाना हजारों की संख्या में वाहनों का आना-जाना रहता है। कस्बे के मुख्य चौराहे पर दूरी संकेतक बोर्ड वर्ष 2013-14 में लगा था। इस पर दिल्ली की दूरी 427 किलोमीटर और हाइवे किनारे लगे माइल स्टोन पर दिल्ली दूरी 420 किलोमीटर दर्शायी गई है। दोनों में लगभग सात किलोमीटर का अंतर है, जिससे यात्रियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है।
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यही हाल लखनऊ दिशा का है। मैगलगंज से लखनऊ की दूरी करीब 130 किमी है, जबकि जबकि बोर्ड पर 110 किमी अंकित है। राहगीरों को कहना है कि जब वे गूगल मैप के सहारे यात्रा करते हैं, तो वहां बताई गई दूरी और बोर्ड पर लिखी दूरी में काफी फर्क दिखाई देता है। इसी वजह से बाहर से आने वाले लोग अक्सर किसी स्थानीय व्यक्ति से दूरी पूछनी पड़ती है। रात में ज्यादा दिक्कतें होती हैं। सड़क के ऊपर लगे साइन बोर्ड आमतौर पर हरे रंग और उन पर सफेद रंग से लिखा होता है, जबकि माइल स्टोन सड़क के किनारे जमीन में लगे होते हैं।
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दुधवा पार्क की दूरी में भी अंतर



मैगलगंज से दुधवा नेशनल पार्क लगभग 130 किमी है, जबकि बोर्ड में 136 किमी लिखा हुआ है। वहीं, कतर्निया घाट वन्य जीव विहार की दूरी मैगलगंज से लगभग 125 किमी वाया लखीमपुर होते हुए है, लेकिन बोर्ड पर 135 किमी दर्शाया गया है।

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यह बोर्ड पिछले कई सालों से लोगों को असमंजस में डाल रहा है। कई बार बाहर से आने वाले लोग यहां रुककर दूरी पूछते हैं। हमने कई बार स्थानीय अधिकारियों को भी अवगत कराया, लेकिन अब तक किसी ने सुधार नहीं कराया।
प्रसून गुप्ता, दुकानदार

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जब हम गाड़ी से सफर करते हैं तो गूगल मैप और बोर्ड की दूरी में बड़ा फर्क दिखता है। इससे लगता है कि कहीं रास्ता गलत तो नहीं पकड़ लिया। रात में तो स्थिति और भी खराब होती है, क्योंकि तब कोई सही जानकारी देने वाला नहीं मिलता।

-ज्ञानेश अवस्थी

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जिम्मेदारों का ये है कहना

एनएचआईटी कंपनी के मैनेजर ब्रजेश कुमार ने बताया कि वे सिर्फ एनएच-30 को देखते हैं। कस्बे की रोड का चार्ज हमारे पास नहीं है। वहीं, लोक निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियर विकास यादव ने बताया कि यह बोर्ड लगभग 10-12 साल पुराना है। इसकी पड़ताल कर बोर्ड को बदलवाने के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार करेंगे।

मैगलगंज के मेन चौराहा पर लगा साइन बोर्ड में दिल्ली की दूसरी 427। संवाद

मैगलगंज के मेन चौराहा पर लगा साइन बोर्ड में दिल्ली की दूसरी 427। संवाद

मैगलगंज के मेन चौराहा पर लगा साइन बोर्ड में दिल्ली की दूसरी 427। संवाद

मैगलगंज के मेन चौराहा पर लगा साइन बोर्ड में दिल्ली की दूसरी 427। संवाद

मैगलगंज के मेन चौराहा पर लगा साइन बोर्ड में दिल्ली की दूसरी 427। संवाद

मैगलगंज के मेन चौराहा पर लगा साइन बोर्ड में दिल्ली की दूसरी 427। संवाद

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