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प्राचीन मंदिर के समीप स्थापित हैं तीन शिवलिंग

Thu, 06 Aug 2015 07:24 PM IST
गोला गोकर्णनाथ
गोला गोकर्णनाथ Updated Thu, 06 Aug 2015 07:24 PM IST
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छोटी काशी में प्राचीन शिव मंदिर के समीप तीन शिवलिंग स्थापित हैं इनमें बूढ़े बाबा का शिवलिंग भी प्राचीन है, जिसे काटने का प्रयास औरंगजेब ने किया था। कहा जाता है कि ऐसे में समीप के कैमी वृक्ष से निकली भैरो की सेना ने औरंगजेब की सेना पर आक्रमण कर दिया तो वह भाग गया था।
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शिवलिंग में काटने के निशान अब भी स्पष्ट दिखाई देते हैं। यह शिवलिंग बहुत ही चमत्कारी माना गया है। इस मंदिर में पूजन-अर्चन करने के बाद भक्तों की मनोकामना शिवजी अवश्य पूरी करते हैं।
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शिव शृंग की आकृति का है शिवलिंग
गोला गोकर्णनाथ। प्राचीन शिव मंदिर के पीछे श्रीकाल भैरव जी महाराज का मंदिर है। मंदिर के बीच में गड्ढे में एक शिवलिंग स्थापित है जो प्राचीन गोकर्णनाथ शिव शृंग की आकृति का ही है। यहां भी भक्त भैरव जी का पूजन करने के साथ शिवलिंग का पूजन करते हैं।
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यहां स्थापित है पारद शिवलिंग
गोला गोकर्णनाथ। प्राचीन शिव मंदिर के सामने चबूतरे पर कई शिवलिंगों के बीच पारद शिवलिंग भी स्थापित है, जो अत्यंत ही दुर्लभ माना गया है।
इस शिवलिंग की स्थापना वर्ष 2001 में की गई थी। रसशास्त्र  रसरत्न समुच्चय में पारद को भगवान शिव का वीर्य लिखा गया है। पारद से शिवलिंग निर्मित करने की विधि भी बताई गई है जो काफी कठिन है। पारद शिवलिंग का पूजन करने से मनुष्य को अक्षय फल की प्राप्ति होती है। पारद का विशाल शिवलिंग हरिद्वार में भी स्थापित है।

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