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भक्तों के संकट हर लेती हैं मां संकटा

Sun, 18 Oct 2020 12:44 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2020 12:44 AM IST
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shardiya Navratra,sankata devi
प्राचान मां संकटा देवी मंदिर। - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। मां संकटा देवी का मंदिर श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र है। नवरात्र में माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। शहरवासी हर खुशी के अवसर पर मां के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।
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शहर स्थित महाभारतकालीन मां संकटा देवी मंदिर जिले के लोगों के लिए ही नही, बल्कि आस पास के जनपदवासियों के लिए भी विशेष आस्था का केंद्र है। पुराणों के अनुसार मां संकटा देवी की मूर्ति द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण ने लक्ष्मीवन (आज लखीमपुर) में स्थापित की थी। इसके बाद जंगल में खुदाई के दौरान देवी मां की मूर्ति मिलने पर महेवा स्टेट के राजा ने मठिया और उनके उत्तराधिकारियों ने मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर की देखरेख महेवा स्टेट के राजपरिवार की ओर से की जाती है।
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राजा जयेंद्र बहादुर ने बनवाया था मंदिर
महेवा स्टेट के कुंवर मानवेंद्र सिंह ने बताया करीब 1600 में पूर्वज राजा बलभद्र सिंह ने मूर्ति मिलने पर मठिया का निर्माण कराया था। इसके बाद सन 1922 में ततकालीन राजा जयेंद्र बहादुर सिंह ने मंदिर निर्माण कराया।
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नवरात्र पर होती है दुर्गा पूजा की धूम
हर साल नवरात्रों में माता दुर्गा की पूजा को लेकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। हर साल मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर देवी जागरण होता है। पुजारी ने बताया कि कोरोना के चलते इस बार मंदिर में मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित की गई, लेकिन जागरण आदि का आयोजन नहीं होगा।
आषाढ़ी मेला का है विशेष महत्व
पुजारी मदन शुक्ला बताते हैं कि आषाढ़ माह में संकटा देवी मंदिर में आषाढ़ी मेला लगता है। इसका अपना अलग ही महत्व है। जिले के ही नहीं आस पास के जनपदों की भी महिलाएं मंदिर आकर मां के दर्शन कर पूजा अर्चना करती हैं।

मां के नाम पर ही पड़ा लखीमपुर का नाम
मंदिर के पुजारी मदन शुक्ला बताते हैं कि पौराणिक काल में शहर की पहचान माता लक्ष्मी के इसी मंदिर से थी। मंदिर के गर्भ ग्रह में स्थापित माता महालक्ष्मी के नाम पर ही शहर का नाम लक्ष्मीपुर पड़ा। इसी कारण आज भी माता को नगर की कुलदेवी माना जाता है। पहले शहर का नाम लक्ष्मीपुर था जो जो बाद में अपभ्रंश होकर लखीमपुर हो गया। इतना ही नहीं संकटा मैया शहर वासियों के हृदय में अपना विशेष स्थान रखती हैं। संवाद
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