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Flood: लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का कहर... कई खेत नदी में समाए, बझेड़ा गांव के घरों पर भी खतरा

Wed, 06 Aug 2025 03:13 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Wed, 06 Aug 2025 03:13 PM IST
सार

लखीमपुर खीरी में शारदा नदी उफान पर बह रही है। बिजुआ ब्लॉक के गांव बझेड़ा को बाढ़ के पानी ने घेर लिया है, जिससे गांव वाले दहशत में हैं। कटान होने से खेती की जमीन भी नदी में समा चुकी है। 

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Sharda river wreaks havoc in Lakhimpur Kheri
शारदा नदी में समाए खेत, किसान मायूस

विस्तार

बनबसा बैराज से पानी पास किए जाने के बाद मंगलवार को शारदा नदी का कहर शुरू हो गया। लखीमपुर खीरी में शहर से करीब 45 किलोमीटर दूर बिजुआ ब्लॉक के गांव बझेड़ा को बाढ़ के पानी ने घेर लिया है, जिससे गांव वाले दहशत में हैं। खेती की जमीन समा चुकी है। घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है। 

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नदी के तेज बहाव के चलते गांव एकदम कटान के मुहाने पर है। गांव के आसपास करीब चार से पांच किलोमीटर से अधिक की जमीन कटकर फसल बर्बाद हो चुकी है। गांव के मुख्य मार्ग को छोड़कर बाकी अन्य रास्तों पर लोग नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। दो साल पहले प्रशासन ने गांव को बाढ़ और कटान से बचाने के लिए सवा छह करोड़ रुपये की लागत से 700 मीटर लंबा बंधा बनाया था, लेकिन शारदा की उफनती लहरों ने इस परियोजना के 60 मीटर हिस्से को लील लिया। 
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ग्रामीणों का कहना है कि इस साल बाढ़ कटान को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिसके चलते बंधा कमजोर पड़ गया और पानी गांव में घुसने लगा। मुख्य मार्ग अभी बचा है। 

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Sharda river wreaks havoc in Lakhimpur Kheri
गांव में बाढ़ का पानी

फसलें डूबीं, चारा भी खत्म, भूख का संकट
बझेड़ा गांव की कई एकड़ फसलें पानी में डूब चुकी हैं। खेतों में खड़ी धान, गन्ना और सब्जियां अब केवल कीचड़ और पानी के नीचे दफन हैं। ग्रामीणों के पास अपने पशुओं को खिलाने के लिए चारा और भूसा तक नहीं बचा। जिनके पास कुछ चारा है, वे ऊंचे स्थानों पर जाकर उसे काटने को मजबूर हैं। गांव के रामरतन बताते हैं कि हमारी सारी फसल बर्बाद हो गई। पशुओं को खाने के लिए कुछ नहीं बचा। अब तो हमारे भी भूखे मरने की नौबत आ रही है। 

ग्रामीणों में आक्रोश
लखीमपुर खीरी। ग्रामीण नन्हें, राजकुमार व सर्वेश का आरोप है कि प्रशासन ने समय रहते बाढ़ के कटान को रोकने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए। सवा छह करोड़ की परियोजना को गांव की रक्षा के लिए बनाया गया था, अब पानी की भेंट चढ़ चुकी है। अगर प्रशासन अब भी नहीं चेता तो दो-चार दिन में हालात और खराब हो जाएंगे। मकानों का कटना शुरू हो जाएगा। हमारा गांव पूरी तरह डूब जाएगा। 

Sharda river wreaks havoc in Lakhimpur Kheri
गांव में बाढ़ का पानी

खेतों में पानी आंखों में आंसू
चारों ओर फैला पानी, डूबती फसलें और कटती जमीन ने ग्रामीणों के चेहरों पर मायूसी की गहरी लकीरें खींच दी हैं। अपनी मेहनत से उगाई फसलों और पुश्तैनी जमीन को आंखों के सामने तबाह होते देख ग्रामीणों का दिल टूट रहा है। गांव जो कभी हरा-भरा था, आज उदासी और निराशा की चादर ओढ़े खड़ा है।

श्रीनगर पुल के किनारे कटे, आवागमन बाधित
निघासन तहसील के ग्रंट नं. 12 गांव में भू-कटान जारी है। कटान के चलते गांव निवासी सुमन देवी का प्रधानमंत्री आवास मंगलवार को नदी में समा गया, वहीं मंदिर के पास भी कटान हो रहा है। सिंचाई विभाग कटान रोकने के प्रयास में जुटा है। 

पहाड़ों व मैदानी इलाकों में बारिश से शारदा का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे ग्रामीणों में उजड़ने का खौफ है। उधर मिलपुरवा श्रीनगर तटबंध पर बने पुल के पास मिट्टी कट गई। दर्जनों गांवों का रास्ता बंद हो गया।  चिंता यह है कि नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी तटबंध तक पहुंचने लगा है। 

नाव से पहुंचे अधिकारी, राहत कार्यों को देखा
रिमझिम बारिश के बीच मंगलवार को एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने बाढ़ प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। एसडीएम राजीव कुमार निगम के साथ वेनाव से लालबोझी गांव पहुंचे। चारों ओर फैले जलभराव के बीच हालातों का जायजा लिया।  

एडीएम ने पीड़ितों को लंच के पैकेट वितरण करने के निर्देश दिए। गांव की आशा बहू से कहा कि गर्भवती महिलाओं को आवश्यक दवाएं दी जाएं। पशु चिकित्सा विभाग की टीम को सक्रिय करते हुए बाढ़ प्रभावित इलाकों में पशुओं के टीकाकरण व देखरेख की व्यवस्था करने के लिए के साथ ही लेखपालों को अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी बनाए रखने के लिए कहा। 

एडीएम ने रामाधीन इंटर कॉलेज बम्बनपुर स्थित बाढ़ आश्रय केंद्र पहुंचे और ठहरे लोगों से बातचीत की।  लालबोझी में 300 परिवारों को लंच के पैकेट बांटे। 

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