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रैनी गांव में घरों के साथ शारदा में समा रहे खेत-खलिहान
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लखीमपुर खीरी के मिलिक गांव में शुक्रवार को भरा बाढ़ का पानी। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। तहसील क्षेत्र में शारदा और घाघरा नदियों ने तबाही मचा रखी है। एक पखवाड़े में रैनी गांव में शारदा नदी ने 24 आशियानों को उजाड़ कर लोगों को बेघर कर दिया है। दो दिनों से खेत खलिहान भी नदी की तेज धार में समा रहे हैं। नदी की जद में 40 और घर आ चुके हैं, जो कभी भी तेज धार में बह सकते हैं, लेकिन बाढ़ खंड विभाग केवल तमाशबीन बना है। अब तक यहां कोई बचाव कार्य शुरू नहीं हुआ है।
धौरहरा तहसील क्षेत्र में शारदा और घाघरा नदियों ने तबाही मचा रखी है। पंद्रह दिनों में रैनी गांव में शारदा नदी 24 घरों को निगल चुकी है। दो दिनों से खेत खलिहान भी नदी की तेज धार में समा रहे हैं। नदी की जद में अब गांव निवासी रमाशंकर वर्मा, रामलखन वर्मा, देशराज वर्मा, बनवारी लाल वर्मा, ओमप्रकाश वर्मा, रामनरेश वर्मा, घनश्याम वर्मा, मुनालाल वर्मा, सोनू वर्मा सहित 40 घरों पर शारदा नदी का खतरा मंडराने लगा है, जो कभी भी बह सकते हैं, लेकिन बाढ़ खंड विभाग केवल तमाशबीन बना है। अब तक यहां कोई बचाव कार्य शुरू नहीं किए गए हैं। डीएम के आदेश के बाद बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों ने कोई बचाव कार्य शुरू नहीं किया है। अब तक नदी में करीब सौ बीघा जमीन कट चुकी है। साथ ही गांव में जाने वाले संपर्क मार्ग भी कट चुके हैं। राहत के नाम पर अब तक तहसील प्रशासन ने केवल 20 लोगों को राहत किट ही दी है। एसडीएम एस सुधाकरन ने बताया कि कटान पीड़ितों को शासन से स्वीकृति राशि प्रदान की जाएगी। बचाव कार्य शुरू कराने के लिए बाढ़ खंड विभाग से कहा गया है। जल स्तर कम होने पर ही बचाव कार्य शुरू हो पाएगा।
घाघरा ने 25 हजार ग्रामीणों की बढ़ाई मुश्किलें
धौरहरा पहाड़ों पर बारिश और नेपाल की नदियों के पानी ने तबाही मचा रखी है। 2.65 लाख क्यूसेक पानी घाघरा नदी में बढ़ गया है। ऊपर से दो दिन से हो रही बारिश से ईसानगर क्षेत्र की आठ ग्राम पंचायतों के करीब 30 गांवों की 25 हजार आबादी प्रभावित हुई। लोगों के घरों में पानी भरा हुआ है। कच्चे घरों की दीवारें और छप्पर गिर चुके हैं। बंशीबेली, बनटुकरा, संतरामपुरवा, कैरातीपुरवा, चकदहा, जंगलमटेरा, मिलिक, गौढ़ी, ओझापुरवा और इनके 30 मजरा गांवों में पानी भरा है।
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बाढ़ पीड़ितों को तिरपाल और राशन तहसील स्तर से दिया जा रहा है। राहत किट की मांग भेजी गई है। बाढ़ में गिरे कच्चे मकानों का लेखपाल सर्वे कर रहे हैं। रिपोर्ट आने पर सहायता राशि दी जाएगी।
- एस सुधाकरन एसडीएम धौरहरा
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धौरहरा तहसील क्षेत्र में शारदा और घाघरा नदियों ने तबाही मचा रखी है। पंद्रह दिनों में रैनी गांव में शारदा नदी 24 घरों को निगल चुकी है। दो दिनों से खेत खलिहान भी नदी की तेज धार में समा रहे हैं। नदी की जद में अब गांव निवासी रमाशंकर वर्मा, रामलखन वर्मा, देशराज वर्मा, बनवारी लाल वर्मा, ओमप्रकाश वर्मा, रामनरेश वर्मा, घनश्याम वर्मा, मुनालाल वर्मा, सोनू वर्मा सहित 40 घरों पर शारदा नदी का खतरा मंडराने लगा है, जो कभी भी बह सकते हैं, लेकिन बाढ़ खंड विभाग केवल तमाशबीन बना है। अब तक यहां कोई बचाव कार्य शुरू नहीं किए गए हैं। डीएम के आदेश के बाद बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों ने कोई बचाव कार्य शुरू नहीं किया है। अब तक नदी में करीब सौ बीघा जमीन कट चुकी है। साथ ही गांव में जाने वाले संपर्क मार्ग भी कट चुके हैं। राहत के नाम पर अब तक तहसील प्रशासन ने केवल 20 लोगों को राहत किट ही दी है। एसडीएम एस सुधाकरन ने बताया कि कटान पीड़ितों को शासन से स्वीकृति राशि प्रदान की जाएगी। बचाव कार्य शुरू कराने के लिए बाढ़ खंड विभाग से कहा गया है। जल स्तर कम होने पर ही बचाव कार्य शुरू हो पाएगा।
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घाघरा ने 25 हजार ग्रामीणों की बढ़ाई मुश्किलें
धौरहरा पहाड़ों पर बारिश और नेपाल की नदियों के पानी ने तबाही मचा रखी है। 2.65 लाख क्यूसेक पानी घाघरा नदी में बढ़ गया है। ऊपर से दो दिन से हो रही बारिश से ईसानगर क्षेत्र की आठ ग्राम पंचायतों के करीब 30 गांवों की 25 हजार आबादी प्रभावित हुई। लोगों के घरों में पानी भरा हुआ है। कच्चे घरों की दीवारें और छप्पर गिर चुके हैं। बंशीबेली, बनटुकरा, संतरामपुरवा, कैरातीपुरवा, चकदहा, जंगलमटेरा, मिलिक, गौढ़ी, ओझापुरवा और इनके 30 मजरा गांवों में पानी भरा है।
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बाढ़ पीड़ितों को तिरपाल और राशन तहसील स्तर से दिया जा रहा है। राहत किट की मांग भेजी गई है। बाढ़ में गिरे कच्चे मकानों का लेखपाल सर्वे कर रहे हैं। रिपोर्ट आने पर सहायता राशि दी जाएगी।
- एस सुधाकरन एसडीएम धौरहरा