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शारदा नदी और हुई विकराल, खेतों में भरा बाढ़ का पानी
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पलियाकलां। पहाड़ों पर होने वाली वर्षा से शारदा नदी का जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है। शारदा नदी खतरे के निशान से 52 सेमी ऊपर पहुंच गई है। इससे आसपास के ग्रामीणों में हड़कंप है। नदी लगातार बढ़ रही है लेकिन प्रशासन की ओर से बाढ़ से बचाव के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। जिससे ग्रामीण भी परेशान हैं और बाढ़ की विभाषिका से उनके चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगीं हैं।
बता दें कि शारदा नदी का जलस्तर दो दिनों से लगातार बढ़ रहा है। जल आयोग के राकेश कुमार ने बताया कि मंगलवार को शाम तीन बजे तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान 154.100 सेमी से 52 सेमी ऊपर 154.620 सेमी पर पहुंच गया। इससे आसपास के ग्रामीणों में हड़कंप है। ग्रामीणों के मुताबिक लगातार बढ़ रहे जलस्तर के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई खास इंतजाम नहीं किए गए हैं। जिससे बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है। इस दौरान अमर उजाला से बातचीत में ग्रामीणों ने अपना दर्द बयां किया।
इमलिया फार्म निवासी जसवीर सिंह पप्पू ने बताया कि हर साल बाढ़ आती है जिससे उनकी फसल तो बर्बाद होती ही हैं साथ ही रास्तों पर भी पानी भर जाता है। बाढ़ के दौरान इमलिया फार्म का लगभग चार माह तक रास्ता बंद रहता है। जिससे दिक्कत आती है, लोग भीरा होकर लंबा चक्कर लगाकर पलिया की ओर आते हैं। प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं देता है जिससे बरसात के मौसम में उनकी परेशानी बढ़ जाती है।
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प्रशासन की तरफ से बाढ़ प्रभावित गांवों पर नजर रखी जा रही है। जहां भी कटान होता है या पानी बढ़ता है उसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को रोजाना भेजी जाती है। अगर कहीं गांव में कटान हो रहा है तो उसको दिखवाया जाएगा और प्रशासन की तरफ से हरसंभव बाढ़ की रोकथाम के उपाय किए जाएंगे।
- आशीष कुमार सिंह, तहसीलदार, पलिया
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बता दें कि शारदा नदी का जलस्तर दो दिनों से लगातार बढ़ रहा है। जल आयोग के राकेश कुमार ने बताया कि मंगलवार को शाम तीन बजे तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान 154.100 सेमी से 52 सेमी ऊपर 154.620 सेमी पर पहुंच गया। इससे आसपास के ग्रामीणों में हड़कंप है। ग्रामीणों के मुताबिक लगातार बढ़ रहे जलस्तर के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई खास इंतजाम नहीं किए गए हैं। जिससे बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है। इस दौरान अमर उजाला से बातचीत में ग्रामीणों ने अपना दर्द बयां किया।
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इमलिया फार्म निवासी जसवीर सिंह पप्पू ने बताया कि हर साल बाढ़ आती है जिससे उनकी फसल तो बर्बाद होती ही हैं साथ ही रास्तों पर भी पानी भर जाता है। बाढ़ के दौरान इमलिया फार्म का लगभग चार माह तक रास्ता बंद रहता है। जिससे दिक्कत आती है, लोग भीरा होकर लंबा चक्कर लगाकर पलिया की ओर आते हैं। प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं देता है जिससे बरसात के मौसम में उनकी परेशानी बढ़ जाती है।
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प्रशासन की तरफ से बाढ़ प्रभावित गांवों पर नजर रखी जा रही है। जहां भी कटान होता है या पानी बढ़ता है उसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को रोजाना भेजी जाती है। अगर कहीं गांव में कटान हो रहा है तो उसको दिखवाया जाएगा और प्रशासन की तरफ से हरसंभव बाढ़ की रोकथाम के उपाय किए जाएंगे।
- आशीष कुमार सिंह, तहसीलदार, पलिया