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शारदा की धार मोड़ने को भगीरथ प्रयास

Fri, 19 Jun 2015 06:56 PM IST
दंबलटांडा-बिजुआ
दंबलटांडा-बिजुआ Updated Fri, 19 Jun 2015 06:56 PM IST
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Sharda edge bending The effort Bhagirath
सूखी रेत और नदी की जलधारा की जगह पर कभी दंबलटांडा गांव बसा था। पिछले छह साल में पूरा गांव शारदा में समा गया। बेलगाम शारदा पर काबू पाने को न सरकार आगे आई और न ही कोई जनप्रतिनिधि। इलाके को बचाने के लिए जब कोई मदद को नहीं आया तो लोग इस तबाही को अपना मुकद्दर मान बैठे। अब गांव के सुरेंद्र सिंह बिग्गी और उनके परिवार ने शारदा की धार मोड़ कर इलाका बचाने का बीड़ा उठाया है। बगैर सरकारी इमदाद के वह नदी की धार मोड़ने को ठोकरें बनाने में जुटे हैं।
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हर साल इलाके का भूगोल बदलने वाली शारदा के कटान रोकने के लिए दंबलटांडा गांव के कुछ लोग आगे आए हैं। इनके गांव को शारदा लील चुकी है अब इनकी कोशिश है कि कोई दूसरा गांव न उजडे़। गांव के सुरेंद्र सिंह बिग्गी व उनके बेटों ने नदी का रास्ता बदलने का ख्वाब देखा है और इसे पूरा करने के लिए यह परिवार करीब आठ लाख रुपये से नदी के किनारे ठोकरें बना रहा है। नदी से इलाके को बचाने के लिए सुरेंद्र सिंह ने सबसे मदद मांगी, लेकिन कहीं से कोई मदद उन्हें नहीं मिल पाई।  
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राज्यसभा सदस्य रविप्रकाश वर्मा के एक पत्र पर सिंचाई विभाग ने सर्वे कर चार करोड़ 21 लाख 72 हजार रुपये का इस्टीमेट बनाया, लेकिन शासन से बजट न मिलने से निराश होकर उन्होंने खुद ही ठोकरें बनवाने का बीड़ा उठा लिया। सुरेंद्र सिंह के साथ उनके भाई हरेंद्र सिंह, अन्य भाई राजेंद्र सिंह के बेटे हरपाल सिंह और मनवीर सिंह के बेटे पलवेंद्र सिंह भी ठोकरें बनवाने में बराबर का हिस्सा देने को तैयार हो गए।
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इंटरनेट से मिली मदद, नेपाल भी गए
सुरेंद्र सिंह के कंप्यूटर इंजीनियर बेटे सुमित ने काम शुरू करने से पहले नेट पर कटान रोकने से संबंधित डाटा ढूंढा। नेपाल के मोहाना नदी पर कटान रोकने का काम करने वाली संस्था मर्सी क्राप्स के लोगों से सलाह ली। आईआईटी दिल्ली के रिटायर्ड प्रोफेसर एसके मजूमदार से दिल्ली में मिले। प्रोफेसर के अलावा इस काम में सुमित के सिविल इंजीनियर दोस्त सुमित मिश्रा ने भी इंटरनेट के जरिए मदद की। बड़ा बेटा राबिन सिंह अमेरिका में डॉक्टर है, राबिन ने इंटरनेट के जरिए काफी लोगों से जानकारी एकत्र कर सुमित को शेयर की है।
इंटरनेट पर डाला है पूरा ब्योरा
सुमित ने इलाके को शारदा से बचाने की अपील के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.सेवअसफ्रामरिवर.कॉम नाम से एक वेबसाइट बनाई है। पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम अखिलेश यादव, जल संसाधन मंत्री उमा भारती, सांसद अजय मिश्रा टेनी, राज्यसभा सांसद रवि वर्मा, गोला विधायक विनय तिवारी से अपील कर मदद मांगी है। इस वेबसाइट पर नदी कटान के फोटो, सांसद का पत्र, प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अलावा काम के रोज की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं।

आठ लाख रुपये हो हैं चुके खर्च
चार ठोकरें बनाने में अभी तक करीब आठ लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। गांव के कुछ लोगों ने मामूली मदद तो की इससे करीब 40 हजार रुपये मिले हैं। बाकी का खर्च महज चार लोगों ने उठाया है। अभी तक 37 हजार बोरी बालू, 11 हजार नायलान क्रेट के अलावा बड़ी मात्रा में बांस लग चुका है। ये ठोकरें के बनने के बाद अभी तक नदी कुछ दूरी पर जाकर तिरछी हो रही है।

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