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अकीदत के साथ मनाई गई शब-ए-बराअत
अमर उजाला ब्यूरो-लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 23 May 2016 10:46 PM IST
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शब
- फोटो : अमर उजाला
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- नमाज पढ़कर और इबादत में गुजारी सारी रात
जिले में शब-ए-बराअत का त्योहार बड़ी ही अकीदत के साथ मनाया गया। मजारों, दरगाहों और कब्रिस्तानों में रोशनी की गई। लोगों ने पूरी रात इबादत में बसर की और अल्लाह से मगफिरत और गुनाहों से बचने की दुआएं मांगी। अपने बुजुर्गों की कब्रों पर फातिहा पढ़कर रूह को सुकून देने और जन्नत में जगह देने की दुआ की।
खीरी टाउन। कस्बे में शब-ए-बराअत के मौके पर रविवार की रात तमाम मुसलमानों ने इबादत में गुजारी। पूरे कस्बे में रोशनी का इंतजाम किया गया। मजारों, दरगाहों कब्रिस्तानों और इमामबाड़ों को सजाया गया। सारी रात लोगों ने इबादत में बसर की और अल्लाह से दुआएं मांगी। खीरी कस्बे में शब-ए-बराअत पर रविवार को लोगों का शाम से ही मजारों, दरगाहों, कब्रिस्तानों पर जाने सिलसिला शुरू हो गया था।
मोहल्ला शेखसरायं में दरगाह, शाही किले पर हाशिमपीर की मजार, सैयद खुर्द पीर बाबा तथा शिया इमामबाड़े को लोगों ने रंगबिरंगी झालरों से सजाया। वहीं मीरा तालाब का कब्रिस्तान, खंभाताल का कब्रिस्तान, पक्का तालाब आदि कब्रिस्तानों पर लोग अपने-अपने पूर्वजों की कब्रों पर फातहा पढ़ी। दरगाहों पर लोगों ने अगरबत्ती और मोमबत्ती से रोशनी कर दुआएं मांगी। सारी रात नमाजियों ने मस्जिदों में नमाजे पढ़कर अल्लाह से अपने और अपने पूर्वजों के लिए मगफिरत तलब की।
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जिले में शब-ए-बराअत का त्योहार बड़ी ही अकीदत के साथ मनाया गया। मजारों, दरगाहों और कब्रिस्तानों में रोशनी की गई। लोगों ने पूरी रात इबादत में बसर की और अल्लाह से मगफिरत और गुनाहों से बचने की दुआएं मांगी। अपने बुजुर्गों की कब्रों पर फातिहा पढ़कर रूह को सुकून देने और जन्नत में जगह देने की दुआ की।
खीरी टाउन। कस्बे में शब-ए-बराअत के मौके पर रविवार की रात तमाम मुसलमानों ने इबादत में गुजारी। पूरे कस्बे में रोशनी का इंतजाम किया गया। मजारों, दरगाहों कब्रिस्तानों और इमामबाड़ों को सजाया गया। सारी रात लोगों ने इबादत में बसर की और अल्लाह से दुआएं मांगी। खीरी कस्बे में शब-ए-बराअत पर रविवार को लोगों का शाम से ही मजारों, दरगाहों, कब्रिस्तानों पर जाने सिलसिला शुरू हो गया था।
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मोहल्ला शेखसरायं में दरगाह, शाही किले पर हाशिमपीर की मजार, सैयद खुर्द पीर बाबा तथा शिया इमामबाड़े को लोगों ने रंगबिरंगी झालरों से सजाया। वहीं मीरा तालाब का कब्रिस्तान, खंभाताल का कब्रिस्तान, पक्का तालाब आदि कब्रिस्तानों पर लोग अपने-अपने पूर्वजों की कब्रों पर फातहा पढ़ी। दरगाहों पर लोगों ने अगरबत्ती और मोमबत्ती से रोशनी कर दुआएं मांगी। सारी रात नमाजियों ने मस्जिदों में नमाजे पढ़कर अल्लाह से अपने और अपने पूर्वजों के लिए मगफिरत तलब की।
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