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सावन : नेपाल में भी भारतीय परंपरा का बोलबाला

Tue, 18 Jul 2023 12:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 18 Jul 2023 12:00 AM IST
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Sawan: Indian tradition dominates even in Nepal
धनगढ़ी-नेपाल में ​स्थित भगवान ​शिव की 108 फिट की ​शिवलिंग।
धनगढ़ी (नेपाल)। नेपाल के सुदूर पश्चिम प्रदेश में पहले लोग पुरानी परंपरा से सावन मनाते थे मगर 30 वर्षों से धीरे-धीरे चलन बदलने के साथ ही यहां अब भारतीय परंपरा की झलक दिखाई देने लगी है।
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नेपाल के सुदूर पश्चिम के पुराने लोग बताते हैं कि सावन माह में गांव में सुबह होते ही बच्चे-बड़े जंगल की ओर दौड़ लगाते थे। वहां से कई प्रकार के पेड़ों के पत्ते व फूल तोड़कर लाते थे और देर शाम को आग जलाकर घंटा-शंख बजाकर राक्षस को भगाते थे। उनका मानना था कि धान रोपने के समय बच्चों में हुई स्किन बीमारी होने से आग तापने से ठीक होती है। बदलते परिवेश में अब धीरे-धीरे चलन खत्म होता जा रहा है। अब भारतीय परंपरा के अनुसार नेपाली युवतियां व महिलाएं हाथों में मेंहदी, हरी चूड़ियां व पीले वस्त्र धारण करती हुई नजर आती हैं और मंदिरों में भी भीड़ लगती है। संवाद
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बढ़ता जा रहा कांवड़ियों का जत्था
सन् 1993 में मध्य प्रदेश से चार युवक सुंदरी नदी से जलभर कर कांवड़िये के रूप में यहां आए थे। जिन्हें जलाभिषेक नहीं करने दिया गया था। एक साल बाद फिर अन्य युवाओं के साथ वह कांवड़ लेकर आए और शिवलिंग पर जल चढ़ाने में भी सफलता पाई। जिसके बाद से नेपाल में बोल बम की शुरूआत हुई। माओवादी संघर्ष के दौरान कुछ सालों तक यह परंपरा रुकी मगर अब प्रत्येक सोमवार को कांवड़ियों के जत्थे नजर आते हैं। जिनमें नेपाली व भारतीय मूल के नागरिक हिस्सा लेते हैं।
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